इस वक्त पूरी दुनिया एक खास तरह की चीज, जिसे सेमिकंडक्टर (Semiconductor chip) कहा जाता है, उसकी भारी कमी से जूझ रही है. सेमीकंडक्टर, कंडक्टर और नॉन-कंडक्टर या इंसुलेटर्स के बीच की कड़ी है. ये न तो पूरी तरह से कंडक्टर होता है और न ही पूरी तरह से इंसुलेटर और इसकी कंडक्टिविटी या करंट दौड़ाने की क्षमता मेटल और सेरामिक्स जैसे इंसुलेटर्स के बीच की होती है. इसी सेमिकंडक्टर की बदौलत आज दुनिया दौड़ रही है. दुनिया में जितने भी इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद हैं या जिन चीजों में इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल होता है वे सभी संकट की दौर से गुजर रहे हैं. वैश्विक स्तर पर चिप संकट (Chip shortage) से भारत भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. भारत में इस चिप का निर्माण नहीं होता और भारत इसके लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर हैं. ऑटो इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक 2021 में कार कंपनियों की बिक्री में 5 अरब डॉलर की कमी आई जो उनके कुल उत्पादन का 20 फीसदी है. ग्लोबल ऑटोमोटिव फोरकास्टिंग फर्म IHS Market के Associate Director गौरव वंगाल (Gaurav Vangaal) ने कहा कि 2021 में सेमीकंडक्टर की कमी के कारण भारत को करीब 5 लाख लाइट Vehicles का नुकसान हुआ. इस shortage के कारण पिछले 6 महीने में रेनॉ इंडिया (Renault India) को 25,000 से 30,000 यूनिट का नुकसान हुआ है जो उनके Monthly Production का 30 फीसदी है, प्रमुख कार निर्माता कंपनियां जैसे मारुति, हुंदई और महिंद्रा अपने ग्राहकों को समय पर डिलिवरी नहीं दे पा रही हैं. आप इस संकट का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि देश में पांच लाख से अधिक कारों की Delivery Pending हैं. इसमें अकेले मारुति के कारों की संख्या 2.15 लाख से अधिक हैं और वहीं हुंदई एक लाख से अधिक कारों की बुकिंग ले चुकी है लेकिन उसके पास सप्लाई के लिए गाड़ियां नहीं हैं. भारत इस कमी को कैसे दूर करने की सोच रहा है देखिए वीडियो.