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ये है दुनिया का सबसे ठंडा गांव, आंखों पर भी जम जाती है बर्फ, -67°C में कैसे रहते हैं लोग

रूस के साइबेरिया में स्थित ओय्म्याकॉन दुनिया का सबसे ठंडा बसा हुआ इलाका है. यहां तापमान -67.7°C तक गिर जाता है, जिससे इंसानी सांसें भी बर्फ बन जाती हैं. यहां रहने वाले लोग बहुत सी परेशानियों का सामना करते हैं.

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ओय्म्याकॉन गांव में पाइपलाइन का नामोनिशान नहीं है. (Photo: ITG)
ओय्म्याकॉन गांव में पाइपलाइन का नामोनिशान नहीं है. (Photo: ITG)

वो बहुत सुंदर है, वो सबसे साफ गांव है... आपने आज तक दुनिया के ऐसे बहुत से गांवों के बारे में सुना होगा. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे गांव की कल्पना की है जहां पलकें झपकते ही आंखों पर बर्फ की परत जम जाए? हो सकता है आपको ये पहले किसी फिल्मी स्क्रिप्ट में लिखे गांव जैसा लग सकता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ऐसा गांव हकीकत में है. ये गांव रूस के साइबेरिया में है, जिसका नाम ओय्म्याकॉन (Oymyakon) है. ये दुनिया का सबसे ठंडा गांव है, जहां लोग रहते हैं. यहां रहना अपने आप में ही बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि यहां हद से ज्यादा ठंड है. चलिए जानते हैं दुनिया के सबसे ठंडे गांव के बारे में और यहां लोग कैसे रहते हैं. 

जमा देने वाला तापमान
ओय्म्याकॉन अपनी हाड़ कंपा देने वाली ठंड के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां सर्दियों में औसत तापमान -50°C के आसपास रहता है, लेकिन साल 1933 में यहां का तापमान -67.7°C पहुंच गया था. ये किसी भी आबादी वाले इलाके में दर्ज किया गया अब तक का सबसे कम तापमान है. यहां हवा में नमी नाम की कोई चीज नहीं होती है और ठंड इतनी ज्यादा होती है कि अगर गलती से शरीर का कोई हिस्सा खुला रह गया तो वो तुरंत जमने लगता है. 

ये गांव एक कटोरे जैसी घाटी में बसा है, जिसे ओय्म्याकॉन डिप्रेशन कहा जाता है. इसकी वजह से यहां की ठंडी हवा बाहर नहीं निकल पाती और वहीं फंसकर रह जाती है. यही वजह है कि यहां का तापमान बाकी इलाकों की तुलना में बहुत ज्यादा गिर जाता है. अक्टूबर से मार्च तक यहां लोग सूरज को रोशनी देखने को तरस जाते हैं. दरअसल, इन महीनों में यहां सूरज की रोशनी न के बराबर मिलती है.

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लोग बंद नहीं करते अपनी गाड़ियां  
ओय्म्याकॉन में करीब 500 से 2,000 लोग रहते हैं, जो हर दिन न जाने कितनी चुनौतियों का सामना करते हैं. आप यहां रहने वालों की अनोखी लाइफस्टाइल जानकर हैरान रह जाएंगे. इसका सबसे पहला उदाहरण ये है कि यहां के लोग अपनी गाड़ियां कभी बंद ही नहीं करते हैं. जी हां, यहां लोग अपनी कार के इंजन सर्दियों में बंद नहीं करते. अगर इंजन बंद कर दिया जाए, तो तेल और मशीनरी जम जाएगी और गाड़ी फिर कभी स्टार्ट नहीं होगी.

इसे यूं ही दुनिया का सबसे ठंडा गांव नहीं कहते हैं. यहां जमीन हमेशा जमी रहती है, इसलिए पाइप बिछाना नामुमकिन है. घरों में टॉयलेट घर के बाहर 'पिट टॉयलेट' के रूप में होते हैं क्योंकि इनडोर प्लंबिंग यहां काम नहीं करती. यानी आप कह सकते हैं कि पूरे ओय्म्याकॉन में एक भी पाइनलाइन नहीं है.

जब कोई पाइन ही नहीं है तो ड्रेनेज से लेकर पानी की सप्लाई का तो कोई सवाल ही नहीं उठता है. ऐसे में लोग पीने के पानी के लिए बर्फ के बड़े टुकड़ों को घर लाकर पिघलाते हैं और उसी का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए भी करते हैं.

क्या खाते हैं यहां के लोग?
यहां पहले तो ठंड है, दूसरा पानी की सप्लाई नहीं है तो खेती करना तो दूर, यहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता. यहां के लोग सर्वाइवल के लिए पूरी तरह से नॉन-वेज फूड्स जैसे मांस और मछली पर निर्भर रहते हैं. वे घोड़ों, गायों और रेनडियर का पालन-पोषण करते हैं. इसके साथ ही मछली पकड़ने के लिए जमी हुई झील में गड्ढा करते हैं और ताजी मछली निकालते है. मछली भी बाहर निकलते ही कुछ ही सेकंड में पत्थर की तरह सख्त हो जाती है.

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हालातों से बिल्कुल अलग है नाम का मतलब 
यहां के तापमान और लाइफस्टाइल के साथ ही इस गांव के नाम का मतलब जानकर भी आपको हैरानी ही होगी. स्थानीय भाषा में 'ओय्म्याकॉन' शब्द का मतलब होता है 'वो पानी जो जमता नहीं'. ये नाम इस गांव में मौजूद एक गर्म पानी के सोते झरने (हॉट स्प्रिंग) की वजह से पड़ा है, जहां पानी कभी बर्फ नहीं बनता.  

 सर्दियों में यहां रहना बहुत ही मुश्किल और जानलेवा होता है, लेकिन गर्मियों के दौरान यहां का तापमान कभी-कभी 30°C तक पहुंच जाता है. हालांकि, जमीन के नीचे की बर्फ तब भी नहीं पिघलती.  

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