scorecardresearch
 

जहां धरती उगलती है सिर्फ आग! टूरिस्टों को भा रहा है 'नरक का द्वार'

मध्य एशिया के रेगिस्तान में 55 सालों से जल रहा एक गड्ढा, जिसे लोग 'नरक का द्वार' कहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह खौफनाक अजूबा कुदरत ने नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों की गलती ने बनाया था.

Advertisement
X
55 सालों से रेगिस्तान के बीच धधक रही है आग (Photo: pexels)
55 सालों से रेगिस्तान के बीच धधक रही है आग (Photo: pexels)

दुनिया भर में कई रहस्यमयी जगहें हैं, लेकिन मध्य एशिया के देश तुर्कमेनिस्तान में एक ऐसी जगह है, जिसे देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं. काराकुम रेगिस्तान के रेतीले धोरों के बीच एक विशालकाय गड्ढा पिछले 55 सालों से लगातार आग उगल रहा है. इसे आधिकारिक तौर पर 'दरवाजा गैस क्रेटर' कहा जाता है, लेकिन इसकी खौफनाक लपटों की वजह से लोग इसे 'नरक का द्वार' पुकारते हैं.

रात के अंधेरे में जब मीलों दूर तक सिर्फ इस गड्ढे की नारंगी चमक दिखाई देती है, तो ऐसा लगता है मानो धरती फाड़कर पाताल का रास्ता खुल गया हो. तो चलिए जानते हैं कि आखिर इस रेगिस्तान के बीचों-बीच आग का ये दरिया कैसे शुरू हुआ और क्यों इसे वैज्ञानिकों की एक बड़ी चूक माना जाता है. 

यह भी पढ़ें: मोहब्बत के शहर में वेलेंटाइन डे, पार्टनर को दें ये खूबसूरत सरप्राइज

एक चूक जिसने इतिहास बदल दिया

इस दहकते हुए अजूबे की कहानी किसी कुदरती करिश्मे से नहीं, बल्कि इंसानी भूल से शुरू होती है. साल 1971 में सोवियत संघ के वैज्ञानिक यहां प्राकृतिक गैस की तलाश में खुदाई कर रहे थे. ड्रिलिंग के दौरान अचानक वहां की जमीन धंस गई और एक करीब 70 मीटर चौड़ा गहरा गड्ढा बन गया. इस हादसे में किसी की जान तो नहीं गई, लेकिन गड्ढे से जहरीली मीथेन गैस का रिसाव होने लगा.

Advertisement

वैज्ञानिकों को डर था कि यह गैस आसपास के इलाकों में फैलकर लोगों और मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. इस खतरे को टालने के लिए भूवैज्ञानिकों ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने इतिहास बदल दिया. उन्होंने सोचा कि अगर इस गड्ढे में आग लगा दी जाए, तो गैस कुछ ही दिनों में जलकर खत्म हो जाएगी और खतरा टल जाएगा. उन्होंने आग तो लगा दी, लेकिन उनका अंदाजा पूरी तरह गलत निकला. वो आग जो कुछ दिनों में बुझनी थी, वह गैस के विशाल भंडार की वजह से पिछले 55 सालों से आज तक नहीं बुझी है. आज यह जगह दुनिया भर के पर्यटकों के लिए रोमांच और अचरज का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है.

यह भी पढ़ें: यहां सिर्फ 'पितरों' के लिए रुकती हैं ट्रेनें! 27 साल से नहीं बिका एक भी टिकट!

दुनिया का खौफनाक अजूबा

आजकल 'नरक का रास्ता' उन साहसी यात्रियों के लिए सबसे आकर्षक जगह बन चुका है, जो दुनिया के अनोखे और रोमांचक नजारों को देखने की हिम्मत रखते हैं. राजधानी अश्गाबात से 260 किलोमीटर दूर रेगिस्तान के सन्नाटे के बीच जब आप इस गड्ढे के करीब पहुंचते हैं, तो दूर से ही आग की गर्जना और मीथेन गैस की गंध महसूस होने लगती है. खासकर रात के समय, इस गड्ढे के किनारे खड़े होकर धधकती लपटों को देखना एक ऐसा अनुभव है जो रोंगटे खड़े कर देता है. यही वजह है कि इसे देखने के लिए दुनिया भर से सैलानी तुर्कमेनिस्तान के इस दुर्गम इलाके में खिंचे चले आते हैं.

Advertisement

हालांकि, अब इस दहकते अजूबे का अंत करीब नजर आ रहा है. पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों ने पाया है कि दशकों से सीना तानकर जल रही ये लपटें अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही हैं. गड्ढे के कई हिस्सों में आग अब पहले जैसी तेज नहीं रही और कुछ जगह तो पूरी तरह शांत हो चुकी है. इसके अलावा, तुर्कमेनिस्तान की सरकार भी पर्यावरण को होने वाले नुकसान और कीमती गैस की बर्बादी को रोकने के लिए इसे बुझाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement