scorecardresearch
 

वो स्टेशन जहां ट्रेन आते ही होता है अंधेरा, क्या सच में है कोई 'भूतिया' साया!

चेन्नई के तांबरम रेलवे स्टेशन पर हर दिन एक ऐसा नजारा दिखता है, जिसे देखकर नए यात्री सहम जाते हैं. जैसे ही लोकल ट्रेन स्टेशन के करीब आती है, अचानक डिब्बों की बत्ती गुल हो जाती है और पंखे बंद हो जाते हैं. लोग इसे स्टेशन का भूतिया साया या बिजली की गड़बड़ी मानते हैं, लेकिन सच तो कुछ और ही है.

Advertisement
X
यहां ट्रेन आते ही अचानक गायब हो जाती है बिजली (Photo: indiarailinfo.com)
यहां ट्रेन आते ही अचानक गायब हो जाती है बिजली (Photo: indiarailinfo.com)

क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि किसी स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही बिजली डर के मारे भाग जाए? सुनने में यह किसी डरावनी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन चेन्नई के तांबरम रेलवे स्टेशन पर यह हकीकत है. यहां जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ती है, अचानक लाइटें बुझ जाती हैं, पंखे थम जाते हैं और यात्रियों के बीच एक अजीब सी घबराहट छा जाती है.

कुछ लोग इसे भूतिया घटना समझने लगते हैं, तो कुछ को लगता है कि बिजली फेल हो गई है. लेकिन असलियत तो यह है कि इसके पीछे न कोई भूत है और न ही कोई खराबी, बल्कि यह रेलवे का एक ऐसा तकनीकी राज है जो आपको हैरान कर देगा. 

यह भी पढ़ें: इस स्टेशन पर रोज टिकट खरीदते हैं लोग, लेकिन ट्रेन में बैठते क्यों नहीं

1931 से चला आ रहा है ये सिलसिला

तांबरम रेलवे स्टेशन तमिलनाडु के चेन्नई के पास स्थित है और इसका इतिहास काफी पुराना है. साल 1931 में बने इस स्टेशन को अक्सर भारत के सबसे रहस्यमयी स्टेशनों की लिस्ट में गिना जाता है. यहां से गुजरने वाली हर लोकल ट्रेन के साथ यह अंधेरे वाला खेल होता है. कई बार यात्री इस तकनीकी प्रक्रिया को पैरानॉर्मल एक्टिविटी या तकनीकी खराबी समझ बैठते हैं, लेकिन रेलवे का कहना है कि यह न तो कोई भूतिया साया है और न ही बिजली विभाग की लापरवाही.

Advertisement

दरअसल, तांबरम स्टेशन पर बिजली गुल होने के पीछे न्यूट्रल सेक्शन का हाथ है. इसे ऐसे समझिये कि रेलवे की बिजली लाइनें अलग-अलग पावर जोन में बंटी होती हैं. जब कोई लोकल ट्रेन एक पावर जोन से निकलकर दूसरे में जाती है, तो बीच में एक छोटा सा हिस्सा ऐसा आता है जहां बिजली की सप्लाई नहीं होती. इसी हिस्से को न्यूट्रल सेक्शन कहते हैं. तांबरम में न्यूट्रल सेक्शन बदलते समय सप्लाई कुछ सेकंड के लिए कट जाती है, जिससे ट्रेन की बत्ती गुल हो जाती है.

यह भी पढ़ें: यहां सिर्फ 'पितरों' के लिए रुकती हैं ट्रेनें! 27 साल से नहीं बिका एक भी टिकट!

क्यों सिर्फ लोकल ट्रेनों में ही होता है ब्लैकआउट?

आपके मन में सवाल होगा कि फिर एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में अंधेरा क्यों नहीं होता? इसकी वजह यह है कि एक्सप्रेस ट्रेनें अक्सर डीजल इंजन पर शिफ्ट कर जाती हैं या उनमें इनबिल्ट पावर बैकअप होता है. इसके उलट, लोकल ट्रेनें पूरी तरह से ऊपर लगे बिजली के तारों पर निर्भर होती हैं. जैसे ही तांबरम के पास ओएचई में करंट खत्म होता है, लोकल ट्रेनों की लाइटें और पंखे बंद हो जाते हैं. यह महज कुछ सेकंड की प्रक्रिया है, जिसके बाद ट्रेन दूसरे बिजली जोन में पहुंचते ही फिर से जगमगा उठती है.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement