ज्यादातर लोगों के लिए घूमने-फिरने का मतलब होता है अपनी मर्जी से कहीं भी आना-जाना और मनपसंद जगहों को करीब से देखना. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के नक्शे पर कुछ ऐसे देश भी हैं, जहां पर्यटन का मतलब आजादी नहीं, बल्कि अनुशासन है.
इन देशों में आप अपनी मर्जी से गली-मोहल्लों में नहीं घूम सकते और न ही हर चीज की फोटो खींच सकते हैं. यहां कदम-कदम पर सरकारी गाइड, सख्त वीजा नियम और पहले से तय प्रोग्राम का पालन करना होता है. आइए नजर डालते हैं उन 5 देशों पर, जहां सैर-सपाटा करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है
1. नॉर्थ कोरिया
दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश उत्तर कोरिया पर्यटन के मामले में सबसे सख्त है. यहां आप अकेले घूमने का सपना भी नहीं देख सकते. आपको सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी के जरिए ही जाना होगा और हर समय सरकारी गाइड आपके साथ रहेंगे. आप क्या देखेंगे, कहां रुकेंगे और किससे बात करेंगे, यह सब पहले से तय होता है. सैन्य ठिकानों या राजनीतिक इमारतों की फोटो लेना यहां भारी मुसीबत में डाल सकता है.
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2. इरिट्रिया
इरिट्रिया की राजधानी अस्मारा तक पहुंचना तो आसान है, लेकिन शहर की सीमा पार करते ही नियम कड़े हो जाते हैं. अगर आप राजधानी से बाहर कहीं भी जाना चाहते हैं, तो आपको विशेष सरकारी परमिट की जरूरत होती है. बिना अनुमति के कहीं भी जाने पर आपको अधिकारियों की पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही, सरकारी इमारतों और बंदरगाहों के आसपास कैमरा निकालना वर्जित है.
तुर्कमेनिस्तान में विदेशी सैलानियों पर कड़ी प्रशासनिक नजर रहती है. यहां बैकपैकिंग या बिना किसी प्लान के घूमना लगभग असंभव है. पर्यटकों को अपनी पूरी यात्रा का ब्यौरा पहले ही देना होता है और सरकार द्वारा मंजूर गाइड के साथ ही रहना पड़ता है. यहां नियम कब बदल जाएं, कोई नहीं जानता, इसलिए मुसाफिरों को पूरी तरह सरकारी दिशा-निर्देशों पर ही निर्भर रहना पड़ता है.
4. सऊदी अरब
सऊदी अरब ने अब पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे तो खोल दिए हैं, लेकिन यहां के नियम अब भी काफी सख्त हैं. पवित्र शहर मक्का में गैर-मुसलमानों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके अलावा, पूरे देश में पहनावे और सामाजिक व्यवहार को लेकर कड़े कानून हैं. संवेदनशील इलाकों और सरकारी दफ्तरों की फोटोग्राफी यहां भी मना है और नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है.
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5. भूटान
भूटान का मामला बाकी देशों से अलग है. यहां राजनीतिक पाबंदी नहीं, बल्कि पर्यावरण और संस्कृति को बचाने के लिए नियम बनाए गए हैं. यहां आने वाले पर्यटकों को हर दिन के हिसाब से 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस' चुकानी होती है, जो काफी महंगी पड़ती है. यहां का मकसद कम पर्यटकों को बुलाकर अपनी शांति और शुद्धता को बरकरार रखना है. हालांकि भारतीय पर्यटकों को कुछ शर्तों में छूट मिलती है.