नए साल 2026 का आगाज हो चुका है और अब बारी है साल के पहले बड़े त्योहार यानी मकर संक्रांति की. लोहड़ी की मस्ती के ठीक बाद आने वाला यह त्योहार पूरे भारत में अलग-अलग रंगों में नजर आता है. अगर आप भी इस बार घर की छत पर पतंग उड़ाने के बजाय, खिचड़ी और तिल-गुड़ का मजा कुछ हटकर लेना चाहते हैं, तो अपना बैग पैक कर लीजिए. भारत के ये 5 शहर ऐसे हैं, जहां का टिकट बुक करके आप इस त्योहार को अपनी जिंदगी का सबसे यादगार अनुभव बना सकते हैं. यहां न सिर्फ आपको आस्था की लहरें मिलेंगी, बल्कि आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों के बीच एक अलग ही रोमांच महसूस होगा. जानते हैं उन 5 जगहों के बारे में जहां आपको संक्रांति की असली चमक देखने को मिलेगी.
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1. प्रयागराज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मकर संक्रांति का मतलब सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि पवित्र स्नान का एक महापर्व है. यहां गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर लाखों लोग श्रद्धा की डुबकी लगाने पहुंचते हैं. ठिठुरती ठंड के बीच संगम किनारे की यह रौनक देखते ही बनती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन संगम में नहाने से जीवन के सारे कष्ट धुल जाते हैं. नहाने के बाद घाट किनारे बैठकर खिचड़ी, तिल और ऊनी कपड़ों का दान करने की पुरानी परंपरा आपको एक अलग ही मानसिक शांति देगी. भक्ति के साथ-साथ यहां के आसमान में होने वाले पतंगों के पेंच इस धार्मिक माहौल में उत्साह का तड़का लगा देते हैं.
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2. हरिद्वार
अगर आप थोड़ी और शांति और पहाड़ों की ताजी हवा के साथ संक्रांति मनाना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का हरिद्वार आपके लिए जन्नत जैसा साबित होगा. हर की पौड़ी पर जब शाम को ढलते सूरज के साथ गंगा आरती शुरू होती है, तो उसका दृश्य किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकता है. यहां मकर संक्रांति के दिन गंगा के ठंडे और पवित्र पानी में डुबकी लगाकर लोग सूर्य देव की वंदना करते हैं. इनता ही नहीं घाटों पर सजे बाजार और मंदिरों से आती घंटियों की गूंज इस पूरी यात्रा को आध्यात्मिक रूप से यादगार बना देती है.
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3. जयपुर
सर्दियों के मौसम में राजस्थान की सैर का अपना ही मजा है, लेकिन मकर संक्रांति के दौरान जयपुर की रौनक कुछ अलग ही स्तर पर होती है. इस दिन पूरा गुलाबी शहर अपनी छतों पर उमड़ पड़ता है और आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों का एक ऐसा दंगल शुरू होता है कि नजरें हटाना मुश्किल हो जाता है. यहां का अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव इतना मशहूर है कि सात समंदर पार से लोग अपनी पतंग बाजी का हुनर दिखाने खींचे चले आते हैं. जयपुर की गलियों में गूंजता राजस्थानी लोक संगीत, हवा में उड़ती पतंगें और प्लेट में सजा गरमा-गरम घेवर और दाल-बाटी चूरमा, यह एक ऐसा शाही मेल है जो आपको सिर्फ यहीं देखने को मिलेगा. अगर आप चाहते हैं कि आपकी संक्रांति एकदम फिल्मी और यादगार हो, तो जयपुर के जल महल या नाहरगढ़ के बैकग्राउंड के साथ पतंग उड़ाने का यह मौका हाथ से जाने न दें.
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4. वडोदरा
अगर आपको पतंगबाजी का असली जुनून देखना है, तो गुजरात के वडोदरा और अहमदाबाद से बेहतर कोई और जगह हो ही नहीं सकती. यहां मकर संक्रांति को 'उत्तरायण' के तौर पर मनाया जाता है और यकीन मानिए, इस दिन यहां का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता है. त्योहार से हफ्तों पहले ही बाजार रंग-बिरंगे मांझे और अनोखी पतंगों से पट जाते हैं. वडोदरा की खासियत यहां की मेहमाननवाजी है, जहां लोग अपनी छतों पर म्यूजिक सिस्टम लगाकर सुबह से ही डट जाते हैं. आसमान इतना रंगीन हो जाता है कि सूरज की रोशनी भी मद्धम पड़ने लगती है. दिन भर 'लपेटे-लपेटे' और 'कायो छे' के शोर के बीच पतंगों के पेंच चलते हैं और जैसे ही सूरज ढलता है, आसमान हजारों 'तुक्कल' यानी लालटेन वाली पतंगों से जगमगा उठता है. अगर आप पतंग उड़ाने की कला और गुजराती जायके का मेल देखना चाहते हैं, तो इस बार वडोदरा का टिकट पक्का कर लीजिए.
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5. चेन्नई
उत्तर भारत की कड़ाके की ठंड से बचकर अगर आप त्योहार का आनंद लेना चाहते हैं, तो चेन्नई की ओर रुख करें. यहां संक्रांति को 'पोंगल' के रूप में 4 दिनों तक बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. यह त्योहार फसलों की कटाई और किसानों के सम्मान का प्रतीक है. नए मिट्टी के बर्तनों में नए चावल से बनी मीठी पोंगल, बैलों की पूजा और घरों के बाहर बनी खूबसूरत रंगोलियां (कोलम) इस उत्सव को बेहद पारंपरिक और सुंदर बनाती हैं. यहां आपको भारत की सांस्कृतिक विविधता का सबसे बेहतरीन नजारा देखने को मिलेगा.
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