सत्तू (Sattu) भारतीय खान-पान का एक बहुत ही पुराना और पौष्टिक हिस्सा है, खासकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे बड़े चाव से खाया जाता है. सत्तू मुख्य रूप से भूने हुए चने से बनाया जाता है, जिसे पीसकर पाउडर बना लिया जाता है. गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.
सत्तू को कई तरीकों से खाया जाता है. लोग इसका शरबत बनाकर पीते हैं, जिसमें पानी, नमक, जीरा और नींबू मिलाया जाता है. वहीं मीठा सत्तू भी बनाया जाता है, जिसमें चीनी या गुड़ डाला जाता है. इसके अलावा सत्तू का पराठा और लिट्टी भी बहुत लोकप्रिय है. यह खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर और ऊर्जा का अच्छा स्रोत है.
बिहार में सत्तू का संबंध एक खास त्योहार से भी है, जिसे सत्तुआनी (Sattuani) या सत्तुआन कहा जाता है. यह पर्व हर साल अप्रैल के संक्राति तिथि में मनाया जाता है. इस दिन लोग सत्तू, कच्चे आम, प्याज और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं. माना जाता है कि यह भोजन शरीर को गर्मी से बचाता है और ऊर्जा देता है.
सत्तुआन के दिन लोग नदी या तालाब में स्नान करते हैं और फिर सत्तू का प्रसाद ग्रहण करते हैं. कई जगहों पर इसे दान करने की भी परंपरा है. यह पर्व न सिर्फ खान-पान से जुड़ा है, बल्कि प्रकृति और मौसम के बदलाव को अपनाने का प्रतीक भी है.
गर्मियों के मौसम में सत्तू को वरदान कहा जाता है. यह न केवल शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है बल्कि लू से बचाने में किसी ढाल की तरह काम करता है. यहां हम आपको इसके फायदे बता रहे हैं.
बिहार और यूपी का पारंपरिक 'सत्तू पराठा' न केवल प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है, बल्कि इसे बनाना भी बेहद आसान है. इसे बनाने का आसान तरीका क्या है, इसकी आसान रेसिपी आर्टिकल में जानेंगे.
Sattu Ki Roti Recipe: गेहूं के आटे और चने के सत्तू से बनी चटपटी सत्तू की रोटी सुबह के नाश्ते के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है. आज हम आपको सत्तू की रोटी बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे, जिसे आप आसानी से कम समय में बना सकते हैं.
आकाश में सूर्य के आभासी पथ को 12 बराबर हिस्सों में बांटा गया है, जिन्हें राशियां कहा जाता है. इनमें मेष राशि पहली राशि है. जिस दिन सूर्य हिंदू कैलेंडर के अनुसार मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है, उस दिन को मेष संक्रांति कहा जाता है.
भारतीय परंपरा में हमारी रसोई और थाली मौसम के आधार पर बदलती है. यहां कहा गया है 'ऋतु भुक्तम' यानी ऋतु के आधार पर भोजन करें. जब 13-14 अप्रैल को सूर्य मेष राषि में प्रवेश करते हैं तो यह समय मेष संक्रांति का कहलाता है. इसी मौके पर बिहार, बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश में सतुआन पर्व मनाया जाता है. सतुआन पर्व गर्मी के आने का संदेश है.
Homemade Chana Sattu: गर्मियों में सत्तू का सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने और एनर्जी बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. आज हम आपको घर पर काले चने से शुद्ध सत्तू बनाने का आसान तरीका बताएंगे.
वनवास के दौरान पांडवों के जीवन का आधार बना था सत्तू. संत महात्माओं के लिए सात्विक भोजन था सत्तू… जानें भारतीय संस्कृति में इसका इतिहास और महत्व