पेरनेम (Pernem) गोवा के उत्तर गोवा जिले में स्थित एक प्रमुख कस्बा और नगर परिषद क्षेत्र है. यह पेरनेम उप-जिले का मुख्यालय भी माना जाता है. महाराष्ट्र सीमा के पास स्थित यह इलाका प्रशासनिक, धार्मिक और स्थानीय बाजार गतिविधियों के कारण क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है.
पेरनेम का इतिहास पुर्तगाली शासन से जुड़ा रहा है. वर्ष 1852 में पुर्तगालियों ने अपने “नोवा कॉन्क्विस्टाडोर” अभियान के बाद यहां एक चैपल का निर्माण कराया था. बाद में 2 जनवरी 1855 को इसे पैरिश का दर्जा दिया गया. इसके बाद 1864 में सेंट जोसेफ चर्च का पुनर्निर्माण किया गया. साल 2002 में चर्च का नवीनीकरण भी हुआ. वर्तमान में यह पैरिश पांच सब-स्टेशनों और 11 छोटे ईसाई समुदायों से मिलकर बना है. चर्च से जुड़े धार्मिक कार्यों की देखरेख पैरिश प्रीस्ट फादर पाउलो डायस करते हैं.
पेरनेम हिंदू धार्मिक आयोजनों के लिए भी जाना जाता है. यहां दशहरा उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है, जो पांच दिनों तक चलता है और कोजागिरी पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है. इसी दिन यहां बड़े सामुदायिक भोज और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इलाके में कई पुराने मंदिर मौजूद हैं, जिनमें आदिस्थान मंगर, भगवती, रावलनाथ, भूतनाथ, सातेरी, द्वारपाल, मौली, गौतमेश्वर, नारायण, मुलवीर, मारुति और श्री सोमनाथ मंदिर प्रमुख हैं.
आर्थिक रूप से पेरनेम पूरी तरह किसी एक बड़े उद्योग पर निर्भर नहीं है. यहां बड़े स्तर का औद्योगिक ढांचा मौजूद नहीं है और स्थानीय बाजार भी सीमित माना जाता है. रोजगार के लिए बड़ी संख्या में लोग गोवा के अन्य हिस्सों या बाहरी क्षेत्रों पर निर्भर रहते हैं. हालांकि, उप-जिले में लगभग 300 से 400 छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग और व्यवसाय संचालित होते हैं.
पेरनेम का साप्ताहिक गुरुवार बाजार उत्तर गोवा के बड़े बाजारों में गिना जाता है. यहां आसपास के गांवों और कस्बों से लोग खरीदारी और व्यापार के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय कृषि उत्पाद, घरेलू सामान और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बिक्री इस बाजार की प्रमुख गतिविधियों में शामिल है.
सड़क मार्ग के जरिए पेरनेम गोवा के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है और यह क्षेत्र राज्य के उत्तरी प्रवेश द्वार के रूप में भी जाना जाता है.