केतुग्राम, (Ketugram) पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान (Purba Bardhaman) ज़िले का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. कहा जाता है कि केतुग्राम का नाम राजा भोपाल के पुत्र चंद्रकेतु के नाम पर रखा गया था. केतुग्राम का पुराना नाम 'बहुला' था. यह मुख्य रूप से ग्रामीण इलाका है, जो अपनी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. केतुग्राम कटवा उप-मंडल के अंतर्गत आता है और यहां की अधिकतर आबादी खेती और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर करती है.
इस क्षेत्र में धान, आलू, जूट और विभिन्न सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. यहां की उपजाऊ मिट्टी और नदी क्षेत्रों की निकटता खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है. ग्रामीण बाजार और छोटे व्यापार भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं. केतुग्राम धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां कई प्राचीन मंदिर और स्थानीय धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. दुर्गा पूजा, काली पूजा और अन्य बंगाली त्योहार यहां काफी उत्साह के साथ मनाए जाते हैं.