हर्षिल (Harshil या Harsil) उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक गांव, पर्यटन स्थल और सैन्य क्षेत्र है. यह भागीरथी नदी के किनारे बसा हुआ है और प्रसिद्ध गंगोत्री धाम जाने वाले मार्ग पर पड़ता है. प्रशासनिक रूप से यह उत्तरकाशी जिले का हिस्सा है और चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ावों में शामिल माना जाता है.
हर्षिल समुद्र तल से लगभग 9,005 फीट (2,745 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है. यह उत्तरकाशी शहर से करीब 78 किलोमीटर और गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है. यह क्षेत्र हिमालयी पर्वतीय भूभाग का हिस्सा है और भारत-चीन सीमा के निकट स्थित हर्षिल घाटी में आता है. इस घाटी में आसपास के कई छोटे गांव शामिल हैं, जबकि ऊपरी क्षेत्र नेलांग घाटी से जुड़ता है. इसके अलावा यह विभिन्न पर्वतीय दर्रों के माध्यम से बस्पा घाटी से भी संपर्क रखता है.
हर्षिल नाम को लेकर एक स्थानीय मान्यता प्रचलित है. इसके अनुसार भागीरथी और जलंधरी नदियों के बीच हुए विवाद को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने शिला का रूप धारण किया था. इसी कथा के आधार पर इस स्थान का नाम 'हरि-शिला' से आगे चलकर हर्षिल माना जाता है.
यह क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छोटा चारधाम यात्रा के गंगोत्री मार्ग पर स्थित है. दीपावली के बाद जब भारी बर्फबारी के कारण गंगोत्री मंदिर शीतकाल के लिए बंद हो जाता है, तब मां गंगा की प्रतिमा को हर्षिल के निकट स्थित मुखबा गांव में स्थापित किया जाता है. शीतकाल के दौरान श्रद्धालु वहीं दर्शन करते हैं और मंदिर खुलने पर प्रतिमा को दोबारा गंगोत्री ले जाया जाता है.
हर्षिल में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत कार्यरत डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-एनर्जी रिसर्च (DIBER) का एक फील्ड रिसर्च स्टेशन भी मौजूद है. इस संस्थान की स्थापना यहां वर्ष 1973 में की गई थी. संस्थान हिमालयी क्षेत्रों के लिए जैव-ऊर्जा, ऊंचाई वाले इलाकों में कृषि तकनीक तथा भारतीय सेना के उपयोग से जुड़े अनुसंधान कार्य करता है.
परिवहन की दृष्टि से हर्षिल राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (NH-34) पर स्थित है, जो चारधाम हाईवे नेटवर्क का हिस्सा है. निकटतम रेलवे स्टेशन मनेरी में प्रस्तावित गंगोत्री चारधाम रेलवे परियोजना का रेलहेड है. इसके अलावा देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा और शिमला हवाई अड्डा निकटतम प्रमुख एयरपोर्ट हैं. दिल्ली, हरिद्वार, देहरादून और उत्तरकाशी से हर्षिल के लिए सड़क मार्ग द्वारा नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं.
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल क्षेत्र से 29 तारीख की रात लापता हुई रामनगर निवासी बबीता का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है. कई दिनों से पुलिस, प्रशासन और बचाव दल लगातार खोज अभियान चला रहे हैं. सेना और आईटीबीपी की जगह अब एनआईएम की विशेषज्ञ टीम को लगाया गया है. हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण भी किया गया. बबीता के इंस्टाग्राम पर हर्षिल के लामा टॉप की तस्वीरें मिलने के बाद उस एंगल से भी जांच जारी है.
उत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र में पिछले साल की विनाशकारी धराली-हर्षिल आपदा के बाद फिर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. भागीरथी नदी के बढ़ते कटाव और अस्थायी झील से ग्रामीणों में दहशत है. आठ ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी से तत्काल सुरक्षा कार्य कराने की मांग की है. प्रशासन ने मौके का निरीक्षण कर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है.
उत्तरकाशी के हर्षिल में भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर और कटाव से फिर खतरा मंडरा रहा है. धराली आपदा के बाद स्थाई सुरक्षा नहीं हुई है. विशेषज्ञों ने झील बनने की आशंका जताई है.