गुलफिशा फातिमा (Gulfisha Fatima) दिल्ली की कार्यकर्ता हैं, जिन्हें नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और धार्मिक स्वतंत्रता एवं अल्पसंख्यक अधिकारों की वकालत के लिए जाना जाता है. उन्होंने दिल्ली के सेलमपुर में हुए प्रदर्शनों में अपनी भूमिका के लिए काफी सुर्खियां बटोरीं, जो भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव करने वाले कानून, सीएए के एक बड़े राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे.
फातिमा वर्तमान में 9 अप्रैल 2020 से तिहाड़ जेल में बंद हैं. जमानत मिलने के बावजूद, वह एक कथित साजिश के मामले में बिना किसी मुकदमे के जेल में बंद हैं.
फातिमा को 9 अप्रैल 2020 को, दिल्ली दंगों से संबंधित विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था, और तब से उन पर दंगा, साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के उल्लंघन सहित कई गंभीर अपराधों के तहत आरोप लगाए गए हैं.
गुलफिशा फातिमा का जन्म दिल्ली में एक मुस्लिम परिवार में हुआ. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से उर्दू ऑनर्स की पढ़ाई की और फिर गाजियाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एजुकेशन से एमबीए किया. 2020 में गिरफ्तार होने से पहले वह रेडियो जॉकी के तौर पर काम कर रही थीं.
साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने 7 जनवरी को चार आरोपियों शिफा उर रहमान, मीरान हैदर, मोहम्मद सलीम खान और गुलफिशा फातिमा की रिहाई के आदेश जारी किए
साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद चार आरोपी बुधवार को जेल से रिहा हो गए. तिहाड़ और मंडोली जेल से बाहर निकलते ही परिजनों ने माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका इस्तकबाल किया.