गंगासागर
गंगासागर (Gangasagar) भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल (West Bengal) में दक्षिण 24 परगना (24 Pargana) जिले के काकद्वीप उपखंड में स्थित है. माना जाता है कि गंगासागर संगम (Ganga Sagar Sangam) में एक बार स्नान करने से बहुत सारे पुण्य मिलते हैं, कहा जाता है कि सारे तीर्थ एक तरफ और गंगासगर में स्नान एक तरफ. खास कर मकर संक्राति (Makar Sankranti) के मौके पर गंगासागर में स्नान करने से 1 हजार गौ दान और 10 अश्वमेध यज्ञ के बराबर का पुण्य भी मिलता है, इस पुण्य के मिलने के पीछे बड़ी पुरानी मान्यताएं हैं (Gangasgar Snan).
एक पवित्र व्यक्ति, कर्दम मुनि ने विष्णु के साथ एक समझौता किया कि वह वैवाहिक जीवन की कठोरता से गुजरना होगा, इस शर्त पर कि विष्णु उनके पुत्र के रूप में अवतार लेंगे. नियत समय में कपिल मुनि विष्णु के अवतार के रूप में पैदा हुए और एक महान संत बने. कपिल मुनि का आश्रम गंगासागर में स्थित था. एक दिन राजा सगर का बलि का घोड़ा गायब हो गया जिसे भगवान इन्द्र ने चुरा लिया था (Lord Indra).
राजा ने इसे खोजने के लिए अपने 60,000 पुत्रों (60,000 Son) को भेजा, और उन्होंने इसे कपिल मुनि (Kapil Muni) के आश्रम के बगल में पाया, जहां इंद्र ने इसे छुपाया था. कपिल मुनि को चोर समझकर, पुत्रों ने कपिल मुनि पर आरोप लगाया, जिन्होंने झूठे आरोप पर अपने क्रोध में पुत्रों को जलाकर भस्म कर दिया और उनकी आत्मा को नर्क में भेज दिया. बाद में राजा सागर के पुत्रों के लिए दया करते हुए, कपिल मुनि ने राजा सागर के वंशजों की प्रार्थनाओं को स्वीकार कर लिया उन्होंने कहा कि अगर नदी, देवी गंगा पृथ्वी पर उतरेगी इस राख को पवित्र जल के साथ मिलाना, आपके पुत्र जीवित हो जाएंगे ( Earth to perform the Last Ritual, Tarpan).
प्रगाढ़ ध्यान के माध्यम से, राजा भगीरथ (King Bhagirath) ने शिव को गंगा को स्वर्ग से नीचे लाने के लिए विवश किया जिसके बाद उनके 60,000 पुत्रों को मुक्ती मिली और वे स्वर्ग चले गए लेकिन गंगा नदी पृथ्वी पर ही रहीं. गंगा के अवतरण की तिथि को मकर संक्रांति (Makar Sankratni) के रूप में मनाया जाता है.
मकर संक्रांति से पहले गंगासागर मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है. बड़ी संख्या में लोग गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के पवित्र संगम पर स्नान कर सूर्य देव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं. मकर श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ इस पवित्र तीर्थ में पहुंच रहे हैं.
2026 गंगा सागर मेला अपनी भव्यता और दिव्यता के कारण अनोखा है. इस मेले की जितनी भी तारीफ की जाए कम है क्योंकि यह गंगा की गोद में होने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक आयोजन है. इसकी भव्यता और धार्मिक महत्ता हर किसी को आकर्षित करती है.
गंगा सागर में वर्षों से हो रही गंगा आरती एक अत्यंत ऐतिहासिक और दिव्य आयोजन है. यह आरती न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि उसमें एक अलौकिक अनुभव भी छिपा होता है. हर साल हजारों श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर आकर गंगा आरती में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं.
पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ मंत्री अरूप विश्वास ने बताया कि 1 जनवरी से अब तक कुल 85 लाख श्रद्धालुओं ने गंगासागर में पवित्र स्नान किया है. गंगासागर मेले के लिए राज्य सरकार ने बेहतरीन इंतजाम किए हैं. साथ ही चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है. करीब 13,000 पुलिसकर्मी, 2,500 सिविल डिफेंस कर्मी, आपदा प्रबंधन टीम और भारतीय तटरक्षक बल के सदस्य मेले की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं.
गंगासागर में रविवार शाम तक 42 लाख श्रद्धालु पहुंच चुके थे. पवित्र स्नान वाले दिन तक और 80 श्रद्धालुओं के सागर तट पर पहुंचने की उम्मीद है. इस बीच यहां अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है. प्रशासन के मुताबिक तीनों श्रद्धालुओं की मौतें हार्ट अटैक से हुई हैं.
भारत में मकर संक्रांति का त्यौहार बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. इस पर्व को देश के अलग- अलग प्रांत में कई नामों से जाना जाता है.
पश्चिम बंगाल में होने वाले गंगासागर मेले को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज सचिवालय में बैठक की. बैठक के बाद सीएम ने घोषणा की कि गंगासागर मेला 8 से 17 जनवरी के बीच आयोजित किया जाएगा. राज्य में 14 जनवरी से पवित्र स्नान शुरू हो जाएगा और मकर संक्रांति 15 जनवरी को होगी.
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