राजस्थान की पहचान केवल उसके किले, हवेलियां और रेगिस्तानी नजारों से ही नहीं, बल्कि वहां के समृद्ध और शाही खानपान से भी होती है. इन व्यंजनों में सबसे लोकप्रिय नाम है दाल बाटी चूरमा (Dal Baati Churma). यह केवल एक डिश नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और मेहमाननवाजी का प्रतीक है.
इस व्यंजन में दाल का अपना अलग महत्व है. इसमें प्रायः तुअर, मूंग और चना दाल तीनों को मिलाकर बनाया जाता है. घी और मसालों से बनी यह दाल स्वाद में गाढ़ी और पौष्टिक होती है. इसमें डाला गया हींग, जीरा और लहसुन का तड़का इसे और भी लजीज बना देता है.
बाटी, गेहूं के आटे से बने गोल, सख्त और कुरकुरे ब्रेड जैसे होते हैं. इन्हें पारंपरिक रूप से गोबर के उपलों की आग या तंदूर में पकाया जाता था. आजकल ओवन या गैस पर भी आसानी से तैयार किया जाता है. पकने के बाद गरम बाटियों पर खूब सारा देसी घी लगाया जाता है.
चूरमा इस थाली का मीठा हिस्सा है. बाटी या आटे को घी में भूनकर उसमें गुड़ या शक्कर और मेवे मिलाए जाते हैं. यह स्वादिष्ट मिठाई खाने के बाद ऊर्जा देने के साथ-साथ भोजन का संतुलन भी बनाती है.
दाल बाटी चूरमा राजस्थान के त्यौहारों, शादी-ब्याह और खास अवसरों पर अनिवार्य रूप से परोसा जाता है. यह व्यंजन ऊर्जा से भरपूर होता है और रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले लोगों को लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है.
राजस्थान की फेमस बाटी की शुरुआत युद्ध के मैदान में राजपूत सैनिकों द्वारा की गई थी, जहां वे आटे की लोइयों को गर्म रेत में सेंकते थे. यह भोजन लंबे समय तक ताजा रहता था और कम पानी वाले इलाकों के लिए उपयुक्त था. इसके इतिहास के बारे में आर्टिकल में जानेंगे.
भारतीय डिश या व्यंजन जो कभी गरीबों और मजदूरों के लिए सस्ते और पेट भरने वाले भोजन थे, अब वे प्रीमियम और शाही व्यंजनों में बदल गए हैं. उनके बारे में आर्टिकल में जानेंगे.