सिप्ला (Cipla) भारत की एक जानी-मानी दवा बनाने वाली कंपनी है, जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी सस्ती और असरदार दवाओं के लिए प्रसिद्ध है. इस कंपनी की शुरुआत साल 1935 में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को किफायती दाम पर अच्छी गुणवत्ता की दवाएं उपलब्ध कराना रहा है.
सिप्ला की स्थापना ख्वाजा अब्दुल हमीद ने की थी. उनका सपना था कि भारत में ऐसी दवाएं बनें जो हर आम इंसान की पहुंच में हों. उन्होंने उस समय यह काम शुरू किया, जब देश में दवाएं महंगी और कम उपलब्ध थीं. सिप्ला कई तरह की दवाएं बनाती है, जैसे कि सांस से जुड़ी बीमारियों (अस्थमा), दिल की बीमारी, कैंसर, इंफेक्शन और HIV/AIDS जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं. खास बात यह है कि सिप्ला ने HIV की दवाओं को बहुत सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराया, जिससे लाखों लोगों की जान बची.
आज सिप्ला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि 80 से ज्यादा देशों में अपनी दवाएं सप्लाई करती है. इसकी पहचान एक भरोसेमंद और किफायती दवा कंपनी के रूप में बनी हुई है. डॉक्टर और मरीज दोनों ही इस पर भरोसा करते हैं. सिप्ला रिसर्च और नई तकनीकों पर भी काफी ध्यान देती है. कंपनी लगातार नई दवाएं और बेहतर इलाज के तरीके विकसित करने में लगी रहती है. इससे मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल पाता है.
Cipla सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी काम करती है. कंपनी का मानना है कि हर व्यक्ति को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए. इसी सोच के साथ यह सस्ती और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने पर जोर देती है.
महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला के पुणे C&F सेंटर का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है. दरअसल, रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स मामले में जांच में मिली गड़बड़ियां और नियमों का उल्लंघन सामने आने के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है. कंपनी को मार्केट से दवाएं वापस लेने का भी निर्देश दिया है.
कर्नाटक को 300 करोड़ रुपये के दो बड़े निवेश प्रस्ताव मिले हैं. दवा कंपनी सिप्ला बेंगलुरु के बोम्मासंद्रा प्लांट के विस्तार पर 200 करोड़ रुपये निवेश करेगी, जबकि रॉकेट इंडिया बेलगावी के गोकाक में 100 करोड़ रुपये की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी. मुंबई रोडशो के दौरान कई प्रमुख कंपनियों ने भी राज्य में निवेश की रुचि दिखाई.