अन्वेषा सैटेलाइट (Anvesha Satellite) भारत की उभरती अंतरिक्ष क्षमताओं का प्रतीक माना जा रहा है. यह उपग्रह वैज्ञानिक अनुसंधान, पृथ्वी अवलोकन और संचार तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है. ‘अन्वेषा’ शब्द का अर्थ ही खोज या अन्वेषण होता है, और यह नाम इस मिशन के मूल उद्देश्य को दर्शाता है- अंतरिक्ष और पृथ्वी से जुड़े रहस्यों की गहन पड़ताल.
अन्वेषा सैटेलाइट को अत्याधुनिक सेंसरों और इमेजिंग उपकरणों से लैस किया गया है, जो मौसम के पूर्वानुमान, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, कृषि आकलन और पर्यावरणीय परिवर्तनों पर सटीक जानकारी प्रदान कर सकते हैं. इसके माध्यम से बादलों की स्थिति, समुद्री गतिविधियां, वनों की कटाई और शहरी विस्तार जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जा सकेंगे. इससे न केवल वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नीति निर्माण और आपदा प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी.
यह उपग्रह संचार के क्षेत्र में भी अहम योगदान देने में सक्षम है. दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी, शिक्षा और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं को मजबूत करने में अन्वेषा की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. इसके अलावा, यह उपग्रह रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में भी सहयोग प्रदान कर सकता है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी और रणनीतिक संचार को मजबूती मिलेगी.
अन्वेषा सैटेलाइट की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत और नवाचार शामिल है. यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी साकार करती है, क्योंकि इसमें स्वदेशी तकनीक और संसाधनों का व्यापक उपयोग किया गया है.
ISRO ने 9 साल में 44 सैटेलाइट लॉन्च किए. इसमें से 5 फेल हुए. पांचों डिफेंस सेक्टर से जुड़े हुए थे. तीन तो पिछले एक साल में फेल हुए. डिफेंस सेक्टर के सैटेलाइट्स को लेकर इसरो बार-बार क्यों फेल हो रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए. रॉकेट्री जीरो एरर के साथ होनी चाहिए.
इसरो का PSLV-C62 मिशन 12 जनवरी 2026 को फेल हो गया. चार स्टेज का रॉकेट 90% सही काम करता है, फिर फेल हो जाता है. तीसरे स्टेज में रोल रेट डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ डिस्टर्ब होने के कारण 16 सैटेलाइट्स (अन्वेषा सहित) सही ऑर्बिट में नहीं पहुंचे. यह लगातार दूसरी असफलता (C61 के बाद) है, जिससे ISRO, DRDO, NSIL और देश को 500-800 करोड़ रुपये का वित्तीय व इज्जत को बड़ा झटका लगा है.
इसरो की PSLV-C62 मिशन फेल हो चुका है. रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ. लेकिन तीसरे स्टेज के बाद आंकड़ा देरी से मिलने लगा. चौथा स्टेज शुरू तो हुआ लेकिन उसके बाद कोई अपडेट नहीं मिला. मिशन कंट्रोल सेंटर में सन्नाटा पसर गया. बाद में इसरो चीफ ने बताया कि तीसरे स्टेज में गड़बड़ हुई थी. रॉकेट दिशा बदल चुका था. इसलिए सभी सैटेलाइट अंतरिक्ष में खो गए. उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
ISRO PSLV-C62 Launch LIVE Updates: इसरो की अन्वेषा सैटेलाइट की लॉन्चिंग फेल हो गई है. तीसरे स्टेज के बाद रॉकेट ने दिशा बदली. चौथा स्टेज नहीं शुरू हो पाया, जिसके कारण सैटेलाइट सेपरेट नहीं हुआ. सारे पेलोड अंतरिक्ष में खो गए.