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संजय सिन्हा से सुनें अपनी भाषा को भूलने की कहानी

संजय सिन्हा से सुनें अपनी भाषा को भूलने की कहानी

संजय सिन्हा आज अपने एक परिचित की कहानी सुना रहे हैं कि कैसे उनके परिचित के बेटे उनसे इस बात का जिक्र किया करते कि उनका बेटा हिन्दी न पढ़ता है और न बेहतरी से समझ पाते हैं. वे आगे सुना रहे हैं कि कैसे अमेरिका में पढ़ने वाले छात्र उनसे मिलने के लिए आज तक के दफ्तर पहुंचे और वे भारत के हिन्दी बाजार को समझना चाहते हैं. कैसे मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वालों के लिए भारत आज भी अहम बिजनेस हब है और हम सभी अपनी ही भाषा को त्यागते जा रहे हैं. कैसे विदेशी हमारी भाषा को सीखकर हमारे बाजार पर कब्जा कर रहे हैं और हम उनकी भाषा सीखकर गुलामी करते जा रहे हैं.

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