WhatsApp अब सिर्फ मैसेजिंग टूल नहीं रहा. पर्सनल बातें हों, ऑफिस की बातें हों या फैमिली ग्रुप की गपशप, सब कुछ इसी ऐप पर चलता है.
ऐसे में जब दिमाग में ये सवाल आए कि कहीं कोई हमारी चैट पढ़ तो नहीं रहा, तो घबराहट होना लाज़मी है. कई लोग बताते हैं कि अचानक उनके मैसेज पर ब्लू टिक दिख गया, जबकि सामने वाला फोन यूज़ ही नहीं कर रहा था.
कुछ लोगों को लगता है कि उनका फोन बिना वजह स्लो हो रहा है या बैटरी तेजी से खत्म हो रही है. इन सब बातों से शक पैदा होता है कि कहीं WhatsApp अकाउंट से छेड़छाड़ तो नहीं हो रही.
क्या है एंड टू एंड एन्किप्शन?
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि WhatsApp में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) होता है. इसका मतलब ये कि आपके मैसेज रास्ते में कोई तीसरा नहीं पढ़ सकता. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आपकी चैट हर हालत में पूरी तरह सुरक्षित है.
अगर आपने कभी WhatsApp Web या Desktop का इस्तेमाल किया है और लॉगआउट करना भूल गए, तो वही जगह सबसे बड़ा खतरा बन सकती है.
आपके अकाउंट से जुड़ा कोई दूसरा डिवाइस आपकी चैट रीयल-टाइम में पढ़ सकता है, और आपको पता भी नहीं चलेगा. यही वजह है कि कई बार लोगों को लगता है कि कोई उनकी बातें जान रहा है.
WhatsApp चैट्स का क्लाउड बैकअप
एक बड़ा रिस्क क्लाउड बैकअप से जुड़ा होता है. बहुत से लोग अपनी WhatsApp चैट का बैकअप Google Drive या iCloud पर रखते हैं.
अगर किसी तरह आपका ईमेल अकाउंट या क्लाउड अकाउंट हैक हो गया, तो आपकी चैट का बैकअप भी गलत हाथों में जा सकता है. यह सीधा WhatsApp हैक नहीं होता, लेकिन नतीजा वही होता है कि आपकी पर्सनल बातें किसी और तक पहुंच सकती हैं.
इसलिए सिर्फ WhatsApp को सुरक्षित रखना काफी नहीं है, आपको अपने ईमेल और क्लाउड अकाउंट की सुरक्षा भी उतनी ही सीरियसली लेनी होगी. WhatsApp क्लाउड बैकअप के लिए भी एंड टू एंड का ऑप्शन देता है.
कुछ मामलों में फोन के अंदर छिपा हुआ जासूसी सॉफ्टवेयर भी परेशानी की वजह बन सकता है. अगर फोन अचानक बहुत गर्म रहने लगे, बिना इस्तेमाल के भी बैटरी तेजी से खत्म होने लगे, या डेटा यूज़ अचानक बढ़ जाए, तो यह इशारा हो सकता है कि फोन में कुछ गड़बड़ है.
कीलॉगर या जासूसी वाले सॉफ्टवेयर
ऐसे सॉफ्टवेयर आपकी स्क्रीन, नोटिफिकेशन या मैसेज की जानकारी बाहर भेज सकते हैं. आम यूज़र को यह पता भी नहीं चलता कि फोन के अंदर क्या चल रहा है. यही वजह है कि अनजान ऐप्स इंस्टॉल करने या किसी भी लिंक पर बिना सोचे क्लिक करने से बचना जरूरी है.
यह भी समझना जरूरी है कि ब्लू टिक या ऑनलाइन स्टेटस देखकर हर बार यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई तीसरा आपकी चैट पढ़ रहा है.
कई बार सामने वाला फोन किसी और के पास होता है, या उसने कहीं और लॉगिन कर रखा होता है. इसलिए हर शक को सीधे हैकिंग से जोड़ देना सही नहीं है. लेकिन अगर आपको बार-बार अजीब हरकतें दिखें, जैसे अनजान डिवाइस से लॉगिन, अपने आप मैसेज पढ़े जाने का एहसास, या अकाउंट की सेटिंग्स में बदलाव, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी कदम यह है कि आप अपने WhatsApp अकाउंट से जुड़े सभी डिवाइस चेक करें और अनजान डिवाइस को तुरंत हटा दें.
इसके साथ ही अपने ईमेल अकाउंट का पासवर्ड बदलें और टू फैक्टर ऑथेन्टिकेशन ऑन रखें. फोन में जो भी ऐप्स समझ में न आएं, उन्हें हटाएं और भरोसेमंद सिक्योरिटी ऐप से फोन को स्कैन करवा लें. यह छोटे-छोटे कदम आपकी प्राइवेसी को काफी हद तक सुरक्षित कर सकते हैं.
WhatsApp पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं, यह सिर्फ ऐप पर नहीं, आपकी आदतों पर भी निर्भर करता है. आप अगर लॉगिन खुले छोड़ देते हैं, क्लाउड अकाउंट को हल्के में लेते हैं या हर लिंक पर क्लिक कर देते हैं, तो कोई भी सिस्टम आपको नहीं बचा पाएगा.
अगर आप थोड़ी सावधानी रखें और समय-समय पर अपनी सेटिंग्स चेक करते रहें, तो आपकी पर्सनल बातचीत तक किसी का पहुंचना आसान नहीं होगा.