भारत सरकार देशभर में SIM Binding को अनिवार्य करने जा रही है. इसका मतलब है कि अगर स्मार्टफोन से एक्टिव सिम निकाल दी और उस सिम कार्ड पर WhatsApp रजिस्टर्ड है तो वह भी बंद हो जाएगा. सिम बाइडिंग की मदद से सरकार साइबर ठग, क्रिमिनल और डिजिटल अरेस्ट करने वाले गैंग पर लगाम लगाना चाहती है.
दूरसंचार विभाग (DoT) टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी (TCS) नियम, 2024 के तहत अनिवार्य SIM बाइंडिंग लागू कर रहा है. 28 मार्च इसको लेकर डेडलाइन दी गई थी और आज 1 मार्च है. हालांकि WhatsApp ने अभी इस संबंध में कोई ऑफिशियल जानकारी पोस्ट नहीं की है, लेकिन टेस्टिंग शुरू हो चुकी है.
सरकार पहले ही साफ कर चुकी थी कि 28 फरवरी की डेडलाइन के बाद कोई समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी. केंद्रीय मंत्रालय के मुताबिक, यह फैसला राष्ट्रीय नेशनल सिक्योरिटी और देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है.
दुनियाभर में WhatsApp का मॉडल
WhatsApp की पॉपुलैरिटी दुनियाभर में है. यह एक ऐसे मॉडल पर काम करता है, जिसमें उसको एक बार वेरिफाई करना होता है, जिसे वेरिफाई वन्स मॉडल भी करते हैं.
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स्मार्टफोन यूजर को एक बार फोन नंबर एंटर करने के बाद OTP डालना होता है, जिसके बाद उस सर्विस को एक्सेस कर सकते हैं. इसके बाद अगर सिम कार्ड को निकाल भी देते हैं तब भी WhatsApp उस नंबर पर काम करता है. क्रिमिनल्स और साइबर ठग इसका मिसयूज कर रहे थे.
सिम बाइडिंग नियम से होगा फायदा
भारत सरकार के सिम बाइडिंग नियम की वजह से लोगों को बेहतर सुरक्षा मिलने वाली है. अब क्रिमिनल्स और साइबर स्कैमर्स सिम कार्ड से WhatsApp ऑन करके उसका मिसयूज नहीं कर पाएंगे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp ने भारत में नोटिफिकेशन्स से जरिए लोगों को अलर्ट करना शुरू कर दिया है कि भारत में नियामकीय आवश्यकताओं के कारण WhatsApp को यह जांचना होगा कि आपका SIM कार्ड आपके फोन में है.
स्मार्टफोन यूजर्स अगर SIM को निकाल देता है या डिएक्टिवेट कर देते हैं तो WhatsApp भी बंद हो जाएगा. इसके लिए यूजर्स को दोबारा से ओरिजिनल एक्टिव SIM दोबारा फोन में डालकर वेरिफाई करना होगा.
सरकार यह कदम क्यों उठा रही है?
DoT ने अनिवार्य SIM बाइंडिंग के फैसले की मदद से साइबर स्कैमर्स और क्रिमिनल्स पर लगाम लगाना है. हाल ही साइबर क्रिमिनल्स ने भोले-भाले लोगों को ठगने के लिए डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीके का फायदा उठाया है.
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सरकार के अनुसार, कई मामलों में साइबर ठग सिर्फ एक बार भारतीय मोबाइल नंबर को ऑथेंटिकेट करते हैं और उसके बाद WhatsApp अकाउंट को दूर से ऑपरेट करते रहते हैं, कई बार ठग विदेश में मौजूद भी होते हैं. इससे ट्रेस करना और कानूनी एक्शन लेना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है.