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क्या मोबाइल कंपनियों से सीक्रेट कोड मांग रही भारत सरकार? PIB फैक्ट चेक ने खोल दी सच्चाई

भारत सरकार के PIB फैक्ट चेक यूनिट ने एक बड़ी जानकारी शेयर की है. फैक्ट चेक यूनिट ने बताया है कि रॉयटर्स का वह दावा फेक है, जिसमें बताया है कि भारत सरकार मोबाइल कंपनियों से सीक्रेट सोर्स कोड मांगने की प्लानिंग बना रही है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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PIB फैक्ट चेक ने खुलास किया. (File Photo: Unsplash.com)
PIB फैक्ट चेक ने खुलास किया. (File Photo: Unsplash.com)

भारत सरकार की फैक्ट चेकिंग यूनिट PIB फैक्ट चेक ने एक खुलासा किया है. PIB फैक्ट चेक ने उन खबरों को खारिज किया गया गया है, जिनमें दावा किया था कि भारत सरकार स्मार्टफोन निर्माताओं को अपना सोर्स कोड शेयर करने के लिए प्रेशर बनाने की प्लानिंग कर रही है.  

रॉयटर्स की उस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया था कि भारत सिक्योरिटी सिस्टम में बदलाव के तहत स्मार्टफोन निर्माताओं को अपना सोर्स कोड शेयर करने के लिए प्रेशर बनाने की प्लानिंग कर रहा है. 

साथ ही बताया है कि भारत सरकार ने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं रखा है. स्मार्टफोन कंपनियों से उनका सोर्स कोड साझा करने की कोई मांग नहीं की गई है. 

PIB फैक्ट चेक का पोस्ट 

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मोबाइल सेफ्टी के लिए एक जरूरी रेगुलेटरी फ्रेम वर्क के लिए सिर्फ रूटीन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन शुरू करने की योजना बनाई है. यह एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जो सुरक्षा और सेफ्टी स्टैंडर्ड पर बेस्ड होता है. फैक्ट चेक टीम ने यह भी क्लियर किया है कि अभी तक रूटीन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है.  

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मोबाइल का सोर्स कोड क्या होता है? 

मोबाइल में सोर्स कोड, असल में फोन के अंदर चलने वाले सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को तैयार करने वाली असली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखी गईं फाइलें हैं. आसान भाषा में समझें तो यह किसी बिल्डिंग का ब्लू प्रिंट होता है. मोबाइल सोर्स, स्मार्टफोन के बहुत से फीचर्स को कंट्रोल करता है. मोबाइल कंपनियां अपना सोर्स कोड किसी को इसलिए नहीं देती हैं, क्योंकि इसमें सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी भी छिपी होती है. 

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