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टेक न्यूज़

ऑक्सीमीटर-फिटनेस बैंड: जानें- ब्लड ऑक्सीजन लेवल चेक करने की तकनीक क्या है

Oximeter vs watch
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भारत में इस वक्त जिनता ऑक्सीमीटर यूज किया जा रहा है शायद इससे पहले कभी नहीं किया गया होगा. वजह आप सब जानते ही होंगे. कोरोना वायरस की वजह से कुछ लोगों का ब्लड ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है और ऑक्सीमीटर इसे ही चेक करने के लिए यूज किया जाता है. 

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ब्लड ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर सिर्फ ऑक्सीमीटर ही नहीं, बल्कि अब स्मार्ट वॉच और फिटनेस बैंड में मिलने लगा है. इन दिनों आपदा अवसर तलाशने वाली कंपनियां लोगों को जम कर लूट रही हैं और 1,500 रुपये में मिलने वाला प्लस ऑक्सीमीटर 2 से 5 हजार रुपये के बीच मिल रहा है. ऐसे में 2 हजार से 3 हजार रुपये में फिटनेस बैंड लोग खरीद कर उससे ही अपना ऑक्सीजन लेवल चेक कर रहे हैं. 

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आइए जानते हैं डेडिकेटेड प्लस ऑक्सीमीटर और फिटनेस बैंड या स्मार्ट वॉच में दिया गया ऑक्सीमीटर फीचर कैसे काम करता है. क्या ये दोनों अलग तरह से काम करते हैं या एक तरह से काम करते हैं. इनका रिजल्ट कितनी सटीक होता है और आप भरोसा कर सकते हैं या नहीं. 

ऑक्सीमीटर एक छोटा डिवाइस होता है जिसमें LED लाइट्स लगी होती हैं. इसे फिंगरटिप पर लगा कर इसे ऑन करते ही एक रेड लाइट निकलती है. इसमें इन्फ्रारेड लाइट भी निकलती है. दरअसल दो तरह की लाइट्स का काम अलग होता है. दो तरह की लाइट्स से ही सैचुरेशन डिटेक्ट होता है. 

Oximeter fitness watch
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ब्लड में ऑक्सीजन होते हैं जो हीमोग्लोबीन के सहारे ट्रैवल करते हैं. जिस हीमोग्लोबीन में ऑक्सीजन होता है उसे ऑक्सीजनेटेड हीमोग्लोबीन कहता हैं और जिसमें ऑक्सीजन नहीं होता है उसे डीऑक्सीजनेडेट हीमोग्लोबीन कहते हैं. 

मिसाल के तौर पर हीमोग्लोबीन को छोटे छोटे हिस्सों में बांट लें. अब अगर 10 हीमोग्लोबीन में से किसी में भी ऑक्सीजन नहीं है इसका मतलब ब्लड ऑक्सीजन लेवल 0% है. इसी तरह अगर 10 हीमोग्लोबीन में से 5 में ऑक्सीनज है और 5 में नहीं है तो इसका मतलब ऑक्सीजन लेवल 50% है. इसी तरह सभी हीमोब्लोबीन में ऑक्सीजन है इसका मतलब सैचुरेशन 100% होगा.

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प्लस ऑक्सीमीटर लाइट के जरिए ब्लड में ऑक्सीजन सैचुरेशन डिटेक्ट करते हैं. डिवाइस लाइट के साथ लाइट डिटेक्टर भी लगा होता है. ऑक्सीमीटर का लाइट आपके फिंगर के आर पार हो कर नीचे की तरफ लाइट डिटेक्टर से टकराती है. जिन हीमोग्लोबीन में ऑक्सीजन होता है और लाइट को अलग अमाउंट में अबजोर्व करते हैं.

प्लस ऑक्सीमीटर में से दो लाइट निकलती है एक रेड लाइट और दूसरा इन्फ्रारेड. दोनों का वेभलेंथ अलग होता है. पल्स ऑक्सीमीटर ये चेक करता है कि दोनों तरह की लाइट्स को ब्लड ने किस तरह से अबजॉर्व किया है. ये डिवाइस इसे कैलकुलेट करके पता लगाती है कि ब्लड में ऑक्सीजन सैचुरेशन क्या है. 

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स्मार्ट वॉच या बैंड किस तरह से ब्लड ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर करती हैं? 

स्मार्ट वॉच या बैंड ब्लड ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर करने के लिए रिफ्लेक्टेंस पल्स ऑक्सीमटरी टेकनीक यूज करते हैं. यहां भी लाइट का ही यूज होता है, लेकिन यहां चूंकि ऑक्सीमीटर की तरह दूसरी तरफ लाइट डिटेक्ट नही होता, इसलिए लाइट रिफ्लेक्ट होने के आधार पर ऑक्सीजन सैचुरेशन कैलकुलेट किया जाता है. फिटनेस बैंड से भी रेड और इन्फ्रारेड एमिट होते हैं 

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स्मार्ट वॉच और ऑक्सीमीटर से ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन टेस्ट करने की मुख्य प्रक्रिया एक जैसी ही है, लेकिन स्मार्ट वॉच में तरीका  थोड़ा अलग है. यही वजह है कि मेडिकल ग्रेड प्लस ऑक्सीमीटर को ज्यादा सटीक माना जाता है. लेकिन फिटनेस बैंड और वॉच भी इन दिनों सटीक नतीजे दिखाते हैं.