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हेल्थ से भी पहले वर्ल्ड कप जीतना मेरे दिमाग में थाः युवराज सिंह

युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट का वो चमकता सितारा है जो न केवल टीम इंडिया को दूसरी बार क्रिकेट वर्ल्ड कप दिलाने के पीछे सबसे बड़ा नाम है बल्कि उस दौरान अपनी बीमारी (कैंसर) को पीछे छोड़ते हुए इस कामयाबी को पाने वाला दुनिया का एकमात्र खिलाड़ी होने का गौरव भी उसे प्राप्त है. आज तक के क्रिकेट कॉनक्लेव ‘सलाम क्रिकेट’ में युवराज सिंह ने वर्ल्ड कप 2011 के दौरान कैंसर से जूझते हुए खिताबी कामयाबी दिलाने के पीछे की अपनी कहानी शेयर की, पेश है उसके प्रमुख अंश:

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कॉनक्लेव ‘सलाम क्रिकेट’ में युवराज सिंह कॉनक्लेव ‘सलाम क्रिकेट’ में युवराज सिंह

युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट का वो चमकता सितारा है, जो न केवल टीम इंडिया को दूसरी बार क्रिकेट वर्ल्ड कप दिलाने के पीछे सबसे बड़ा नाम है, बल्कि उस दौरान अपनी बीमारी (कैंसर) को पीछे छोड़ते हुए इस कामयाबी को पाने वाला दुनिया का एकमात्र खिलाड़ी होने का गौरव भी उसे प्राप्त है. आज तक के क्रिकेट कॉनक्लेव ‘सलाम क्रिकेट’ में युवराज सिंह ने वर्ल्ड कप 2011 के दौरान कैंसर से जूझते हुए खिताबी कामयाबी दिलाने के पीछे की अपनी कहानी शेयर की, पेश है उसके प्रमुख अंश:

आपकी तबीयत खराब थी. आपको खांसी में खून आ रहा था. आप पर बहुत अधिक दबाव था.
युवराजः भारत के लिए खेलना खुद में दबाव होता है. तब मुझे खून आ रहा था. मुझे वर्ल्ड कप से पहले दक्षिण अफ्रीका में ऐसा हुआ. लेकिन टीम इंडिया के लिए खेलना अपने आप में बहुत बड़ी बात है और मैं खेलते रहना चाहता था. जब आप एक एथलीट होते हैं और आपको इस बात की ट्रेनिंग दी जाती है कि आप खुद को स्वस्थ रखें तो आप अपने खेल पर ध्यान रखना चाहते हैं और देश के लिए बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं.

इस दौर से गुजरने के बाद भी आप वर्ल्ड कप के लिए खुद को तैयार करना चाहते थे. आपने अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया और कम से कम वर्ल्ड कप खेलना चाहते थे. आप वर्ल्ड कप में खेलने से पहले कैसा महसूस कर रहे थे?
युवराजः वर्ल्ड कप से पहले मैं कुछ चोटिल था लेकिन मुझे अपनी योग्यता पर पूरा यकीन था. मुझमें कप्तान का विश्वास था. मुझे यकीन था कि एक पारी से पूरा माहौल बदल जाएगा.

इंग्लैंड के खिलाफ अर्धशतकीय पारी ने सब कुछ बदल दिया?
युवराजः कितने क्रिकेटरों को वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिलता है? मैं अपना तीसरा वर्ल्ड कप खेल रहा था. शरीर आपका साथ छोड़ देता है लेकिन दिमाग ऐसा नहीं कर पाता. और यही वो जरिया है जिसकी वजह से एक खिलाड़ी चुनौतियों और बाधाओं को पार कर जाता है. मेरा शरीर साथ नहीं दे रहा था लेकिन मुझे वर्ल्ड कप चाहिए था. मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं है कि मैंने अपनी तबीयत का ख्याल नहीं रखा लेकिन इसकी वजह से मैंने अपने क्रिकेट के बेहतरीन साल खो दिए. इंग्लैंड के खिलाफ मैंने 59 रनों की पारी खेली लेकिन एक के बाद एक लगातार तीन अर्धशतक ने मुझे आगे बढ़ते जाने की ताकत दी. वर्ल्ड कप जीतना सबसे बड़ा ऑनर है. एक क्रिकेटर के लिए इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है. मुझे इस बात की खुशी है कि मैं भारत के लिए वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा था.

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