टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का मानना है कि 2003 में टीम इंडिया रिकी पोंटिंग की कप्तानी वाली बेहतरीन ऑस्ट्रेलियाई टीम से हारी, पर आज की तारीख में ऐसा नहीं होने वाला.
सलाम क्रिकेट कॉन्क्लेव 2014 के पहले सत्र ‘Pressures of the World Cup’ में गांगुली ने कहा, 'भारतीय टीम की कप्तानी करना बेहद ही मुश्किल काम है, क्योंकि आप पर बहुत ज्यादा दबाव होता है.' 2003 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों मिली हार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'जोहानसबर्ग में हारने के बाद हमारे घरों पर पत्थर फेंके गए. हम भारतीय दबाव में प्रतिक्रिया देते हैं. पर टीम धीरे-धीरे इस दबाव की आदी हो गई है. आपको इसका सामना करना पड़ेगा.'
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इस सत्र में वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज टीम के कप्तान क्लाइव लॉयड, 1996 की वर्ल्ड चैंपियन श्रीलंकाई टीम के कैप्टन अर्जुन रणतुंगा और चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान एलन बॉर्डर ने भी हिस्सा लिया.
एक सवाल के जवाब में गांगुली ने कहा, '2001-02 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज भारतीय क्रिकेट के लिए टर्निंग प्वाइंट रहा. स्टीव वॉ की कप्तानी वाली वर्ल्ड चैंपियन टीम को 2-1 से पटखनी देने के बाद हमें अपनी क्षमता का एहसास हुआ. अचानक ही एक ऐसी टीम बन गई जो लड़ने को तैयार थी.'
वर्ल्ड 2015 से पहले दबाव के पहलुओं का जिक्र करते हुए एलन बॉर्डर ने कहा, 'भारत में क्रिकेट को लेकर अद्भुत जुनून है.'
वहीं, 1975 और 1979 की वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज टीम के कप्तान क्लाइव लॉयड ने कहा, 'दबाव तो हमेशा रहेगा. जहां तक वेस्टइंडीज का सवाल है तो हमारी टीम अलग-अलग द्वीप से आने वाले खिलाड़ियों को मिलाकर बनी है. हर द्वीप की अपनी एक संस्कृति है. जबकि इंग्लैंड और भारत एक देश है. वेस्टइंडीज में सभी लोगों को एक साथ ला पाना आसान नहीं है, आप विभिन्न किस्म के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं.'