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रियो ओलम्पिक में कुश्ती की पदक तालिक में सुधार पर नजरें: सतपाल

पद्म भूषण पुरस्कार के लिए चुने जाने से खुश कुश्ती कोच सतपाल सिंह ने कहा है कि यह सम्मान उन्हें और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा और अब उनका लक्ष्य 2016 रियो ओलंपिक में देश की पदक तालिका में सुधार करना है.

सफेद शर्ट में गुरु सतपाल सिंह सफेद शर्ट में गुरु सतपाल सिंह

पद्म भूषण पुरस्कार के लिए चुने जाने से खुश कुश्ती कोच सतपाल सिंह ने कहा है कि यह सम्मान उन्हें और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा और अब उनका लक्ष्य 2016 रियो ओलंपिक में देश की पदक तालिका में सुधार करना है. 26 जनवरी को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुने गए सतपाल ने कहा कि वह अपने शिष्यों को अगले साल होने वाले ओलंपिक में तीन से चार पदकों के लिए तैयार कर रहे हैं.

सतपाल ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘इस पुरस्कार के लिए चुने जाने से मैं काफी सम्मानित महसूस कर रहा हूं और यह मुझे अपनी टीम के साथ अपने शिष्यों पर कड़ी मेहनत करने के लिए अतिरिक्त प्रेरणा देगा जिससे कि रियो ओलंपिक में भारतीय पहलवान अपनी पदक तालिका में सुधार कर सकें.’ उन्होंने कहा, ‘मुझे 2016 में अपने पहलवानों से कम से कम तीन से चार पदकों की उम्मीद है.’ भारत ने 2012 लंदन ओलंपिक में जीते कुल छह पदकों में से दो पदक कुश्ती में हासिल किए थे. सुशील कुमार ने पुरुष 66 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में रजत पदक जीता जबकि योगेश्वर दत्त ने 60 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया.

पद्म भूषण के लिए चुने गए पहले पहलवान बने सतपाल ने कहा, ‘मुझे यकीन है कि हमारा कोई एक पहलवान रियो में स्वर्ण पदक जीत सकता है.’ वर्ष 1983 में पद्म श्री से नवाजे गए सतपाल ने कहा कि उन्होंने सुशील से स्वर्ण पदक से कम की उम्मीद नहीं है लेकिन साथ ही वह चाहते हैं कि अमित कुमार, बजरंग और योगेश्वर जैसे पहलवान भी रियो में पोडियम पर जगह बनाएं.

भारत के दोहरे ओलंपिक पदक विजेता सुशील के ससुर सतपाल ने कहा कि पुरस्कारों के लिए इस पहलवान की अनदेखी से हालांकि उन्हें निराशा हुई.

उन्होंने कहा, ‘सुशील को भी अगर यह मिलता तो यह सोने पर सुहागा होगा. लेकिन सरकार की अपनी नीति है. इसलिए मैं इस बारे में आगे कुछ नहीं कहना चाहता.’

भारतीय कुश्ती महासंघ ने पद्म भूषण के लिए खेल मंत्रालय को सुशील के नाम की सिफारिश की थी लेकिन कल जब पुरस्कारों की सूची जारी हुई तो इसमें इस दो बार के ओलंपिक पदक विजेता का नाम नहीं था.

इनपुटः भाषा

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