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CWG: दीपिका-जोशना ने रचा इतिहास, मुक्केबाजों ने किया निराश

दीपिका पल्लिकल और जोशना चिनप्पा ने स्क्वाश में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रचा, लेकिन ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट विजेंदर सिंह समेत फाइनल में पहुंचे चारों भारतीय मुक्केबाजों ने निराश किया और उन्हें सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा.

जोशना चिनप्पा और दीपिका पल्लिकल जोशना चिनप्पा और दीपिका पल्लिकल

दीपिका पल्लिकल और जोशना चिनप्पा ने स्क्वाश में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रचा, लेकिन ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट विजेंदर सिंह समेत फाइनल में पहुंचे चारों भारतीय मुक्केबाजों ने निराश किया और उन्हें सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा.

दीपिका और जोशना ने स्क्वाश के विमेंस डबल्स के फाइनल में इंग्लैंड की जैनी डंनकाफ और लौरा मासैरो को 11-6, 11-6 से हराकर इतिहास रचा. यह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्क्वाश में पहला मेडल है. मुक्केबाजी में भारत को चार गोल्ड मेडल की उम्मीद थी, लेकिन रिंग में दिन निराशा भरा रहा. स्टार मुक्केबाज विजेंदर पुरुषों के 75 किग्रा भार वर्ग में इग्लैंड के एंथनी फाउलर से हार गए, जबकि मनजीत जांगड़ा को 69 किग्रा में इंग्लैंड के स्कॉट फिट्जगार्ड और एल देवेंद्रो को 49 किग्रा में उत्तरी आयरलैंड के पैडी बर्न्‍स से हार का सामना करना पड़ा.

देवेंद्रों की बड़ी बहन एल सरिता देवी भी महिलाओं के लाइटवेट (60 किग्रा) भार वर्ग में ऑस्ट्रेलिया की शैली वाट्स से संघषर्पूर्ण मुकाबले में हारीं. इस तरह से भारत का मुक्केबाजी में सोने का तमगा हासिल करने का सपना पूरा नहीं हो पाया. भारत ने मुक्केबाजी में चार सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. पिंकी जांगड़ा ने शनिवार को महिलाओं के 51 किग्रा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

पांचवें नंबर पर बरकरार है भारत...
भारत को इसके अलावा बैडमिंटन में दो ब्रॉन्ज जबकि पावरलिफ्टिंग में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज पदक मिला. भारत के अब कुल मेडल्स की संख्या 60 हो गई है, जिसमें 14 गोल्ड, 28 सिल्वर और 18 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. भारत ने अपना पांचवां स्थान बरकरार रखा है. इंग्लैंड 156 मेडल लेकर टॉप पर है. उसके बाद ऑस्ट्रेलिया (128), कनाडा (78) और स्कॉटलैंड (52) का नंबर आता है. स्कॉटलैंड ने भारत से अधिक 19 गोल्ड मेडल जीते हैं.

पावरलिफ्टिंग में भारत का पावरफुल प्रदर्शन
पावरलिफ्टिंग में भारत के राजिंदर राहेलु ने पुरुषों के हैवीवेट में सिल्वर जबकि सकीना खातून ने महिला लाइटवेट (61 किग्रा तक) वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता. जालंधर में जन्में 41 वर्षीय राहेलु ने कुल 180.5 किग्रा भार उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया. नाईजीरिया के अब्दुलअजीज इब्राहीम ने कुल 197 किग्रा भार उठाया और उन्हें गोल्ड मेडल मिला. इससे पहले सकीना ने कुल 88.2 किग्रा वजन उठाया. वह नाईजीरिया की इस्थर ओयेमा (गोल्ड मेडलिस्ट) और इंग्लैंड की नटाली ब्लेक (सिल्वर मेडलिस्ट) के बाद तीसरे स्थान पर रहीं.

बैडमिंटन में ऐतिहासिक 'गोल्ड' पर नजर
बैडमिंटन में भारत ऐतिहासिक गोल्ड मेडल की दौड़ में बना हुआ है. पी कश्यप अब इससे केवल एक जीत दूर हैं, जबकि ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा अपने खिताब के बचाव के लिए उतरेंगी. युवा पी वी सिंधु और आरएमवी गुरुसाईदत्त सेमीफाइनल में हार गए, लेकिन उन्होंने तीसरे स्थान के मुकाबले जीतकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए. कश्यप ने एक घंटे 23 मिनट तक चले मेंस सिंगल्स मुकाबले में एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए दुनिया के 26वें नंबर के खिलाड़ी इंग्लैंड के राजीव ओसफ को 18-21, 21-17, 21-18 से हराकर कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया. अब कश्यप का सामना दुनिया के 40वें नंबर के सिंगापुर के डेरेक वोंग से होगा. ज्वाला और अश्विनी की जोड़ी ने विमेंस डबल्स सेमीफाइनल में लाई पेई जिंग और लू यिन लिम पर 21-7, 21-12 से आसान जीत दर्ज की. अब फाइनल में इस जोड़ी का सामना विवियान काह मुन हू और खे वेई वून की दुनिया की 18वें नंबर की मलेशियाई जोड़ी से होगा. मेंस सिंगल्स में आरएमवी गुरुसाईदत्त ने भी ब्रॉन्ज पदक जीता. सेमीफाइनल में वोंग से हारने वाले इस भारतीय ने एक घंटे तक चले मैच में ओसफ को 21-15, 14-21, 21-19 से हराकर पदक हासिल किया.

हॉकी में कम से कम 'चांदी' पक्की...
इस बीच भारतीय हॉकी टीम ने दो गोल से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए न्यूजीलैंड को 3-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया, जहां उसका सामना 2010 की तरह ऑस्ट्रेलिया से होगा. भारत 18वें मिनट तक 0-2 से पीछे चल रहा था. इसके बाद कप्तान रुपिंदर पाल सिंह, रमनदीप सिंह और आकाशदीप सिंह ने गोल करके भारत का कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर दिया.

भारत को त्रिकूद में मिला ब्रॉन्ज
भारत के अरपिंदर सिंह ने एथलेटिक्स प्रतियोगिता के पुरुषों के त्रिकूद में ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन पिछली बार की विजेता महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर रिले टीम को डिस्क्वालीफाई कर दिया गया. अमृतसर में जन्में 21 वर्षीय अरपिंदर ने अपने पहले प्रयास में 16.43 मीटर की कूद लगाई. इसके बाद वह अन्य किसी भी प्रयास में इस दूरी तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन यह उन्हें ब्रॉन्ज मेडल दिलाने के लिए काफी थी.

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