कोरोना महामारी के कारण एक साल की देरी से हुआ टोक्यो खेल अब तक का सबसे महंगा ओलंपिक साबित हुआ है. यह ओलंपिक 2020 में होना था, जिसे 2021 में संपन्न कराया गया. टोक्यो ओलंपिक में 2013 में मेजबानी के मिलने के समय लगाए गए अनुमान से लगभग दोगुना खर्च हुआ है.
टोक्यो ओलंपिक के आयोजन में लगभग 1.42 ट्रिलियन येन (लगभग 8.19 खरब रुपये) खर्च हुए. टोक्यो ओलंपिक अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी बैठक की जिसमें इन खेलों के जुड़े खर्च के अंतिम विवरण को रखा गया. इस आयोजन समिति को इस महीने के आखिर में खत्म कर दिया जाएगा.
15.4 बिलियन डॉलर का अनुमान था
डॉलर और जापान की मुद्रा येन के बीच विनिमय दर में हालिया उतार-चढ़ाव के कारण हालांकि लागत की गणना करना चुनौतीपूर्ण है. पिछले साल जब खेलों का आयोजन शुरू हुआ था तब एक डॉलर लगभग 110 येन के बराबर था, जबकि सोमवार को यह 135 येन के करीब रहा. यह येन के मुकाबले डॉलर का लगभग 25 वर्षों में उच्चतम स्तर है.
वास्तविक लागत 13.6 बिलियन डॉलर रही
जब ये खेल संपन्न हुए थे तब आयोजकों ने इसमें 15.4 बिलियन डॉलर (लगभग 12 खरब रुपये) के खर्च होने का अनुमान लगाया था. इसके चार महीने के बाद आयोजकों ने कहा कि इसकी कुल लागत 13.6 बिलियन डॉलर (लगभग 10.61 खरब रुपये) है.
उन्होंने कहा कि प्रशंसकों के स्टेडियम में नहीं होने से इसमें बड़ी बचत हुई है. सुरक्षा लागत, स्थल रखरखाव आदि पर खर्च कम हुए. इससे हालांकि आयोजकों को टिकट बिक्री से होने वाली आय का नुकसान भी हुआ.
भारत के लिए शानदार रहा था टोक्यो ओलंपिक
टोक्यो ओलंपिक भारत के लिहाज काफी शानदार रहा था. इसमें भारतीय खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 7 मेडल अपने नाम किए थे. ओलंपिक इतिहास में भारत ने पहली बार एक बार में इतने ज्यादा मेडल जीते. भारत के खाते में इस ओलंपिक में 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं.