वीरेंद्र सहवाग, एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही तमाम तूफानी गेंदबाजों से लेकर बल्लेबाजों को क्रीज पर नचाने की कुव्वत रखने वाले स्पिनर भी खौफ खाते थे. प्रशंसक जिसके क्रीज पर होने भर से मनोरंजक खेल की उम्मीद में रहते थे. आज उसी सहवाग ने अपने बर्थडे पर क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर उन तमाम प्रशंसकों को निराश कर दिया.
1999 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला वनडे खेलने वाले सहवाग ने अपना पहला वनडे शतक सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब ग्राउंड पर न्यूजीलैंड के खिलाफ जड़ा था. सहवाग ने अपनी उस पारी में मात्र 70 गेंदों पर 100 रन बनाए थे.
पहले ही टेस्ट में जड़ा था शतक
2001 में टेस्ट टीम में जगह बनाने वाले सहवाग ने अपने पहले ही टेस्ट मैच में द. अफ्रीका के खिलाफ उन्हीं की धरती पर शतक ठोककर क्रिकेट जगत को अपनी धमक का एहसास करा दिया था. उन्होंने भारतीय धरती पर अपना पहला टेस्ट शतक वेस्ट इंडीज के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में जड़ा था.
तूफानी बल्लेबाजी थी सहवाग की पहचान
चौदह सालों तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सहवाग न तो द्रविड़ की तरह जबरदस्त डिफेंस वाले बल्लेबाज थे, न ही वो लक्ष्मण और अजहर की तरह कलाइयों के जादूगर थे. सचिन की तरह पैडल स्वीप और खूबसूरत स्ट्रेट ड्राइव उनकी पहचान नहीं थे, न ही दुनिया उन्हें दादा सौरव गांगुली की तरह 'गॉड ऑफ ऑफसाइड' कहती थी. सहवाग तो वो तूफान थे जो अपना दिन होने पर मैच की पहली ही गेंद को मैदान से बाहर भेज सकते थे और उसी पहली गेंद पर खुद भी पैवेलियन वापस जा सकते थे, हवा की तरह. जिसके बहने का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता.
टेस्ट में टी20 स्टाइल से खेलते थे सहवाग
टेस्ट क्रिकेट जैसे नीरस और तकनीक के बली लोगों के लिए अच्छे माने जाने वाले फॉरमेट को सहवाग ने ऐसे मनोरंजक खेल में बदला कि टेस्ट क्रिकेट की सबसे तेज ट्रिपल सेंचुरी का रिकॉर्ड आज भी उनके नाम है. 2007 में चेन्नई में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सहवाग ने महज 278 गेंदों पर ही तिहरा शतक ठोंक दिया था. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में आज तक 200 से भी कम गेंदों पर मात्र पांच डबल सेंचुरी लगी हैं, जिनमें से तीन सहवाग के नाम हैं. फास्टेस्ट डबल सेंचुरी के टॉप टेन नामों में पांच बार सहवाग का नाम आता है, बाकी पांचों नाम अलग-अलग बल्लेबाजों के हैं. यानी जो कारनामा कोई दूसरी बार भी नहीं कर पाया, उसे सहवाग ने पांच-पांच बार किया है.