भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में 4 विकेट से जीत हासिल की. 11 जनवरी (रविवार) को वडोदरा के कोटाम्बी स्टेडियम में आयोजित इस मुकाबले में भारतीय टीम को जीत के लिए 301 रनो का टारगेट मिला था, जिसे उसने 6 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. भारतीय टीम ने इस जीत के साथ ही सीरीज में 1-0 की लीड ले ली. वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला 14 जनवरी को राजकोट में खेला जाएगा.
वडोदरा वनडे में भारतीय टीम की जीत में विराट कोहली की अहम भूमिका रही. कोहली ने 8 चौके और एक छक्के की मदद से 91 गेंदों पर 93 रन बनाए. इस शानदार प्रदर्शन के लिए कोहली को 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया. कोहली ने वनडे इंटरनेशनल में 45वीं बार ये अवॉर्ड जीता है. कोहली ने मैच के कहा कि उन्होंने जो कुछ हासिल किया है, उसके लिए वो भगवान के आभारी हैं क्योंकि भगवान ने उन्हें उम्मीदों से ज्यादा दिया है. कोहली ने ये भी कहा कि वो माइलस्टोन के बारे में कभी नहीं सोचते.
विराट कोहली ने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो मुझे मुझे बिल्कुल पता नहीं है कि मैंने कितने 'प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड' जीते हैं. मैं बस सारी ट्रॉफियां गुरुग्राम में अपनी मां को भेज देता हूं. उन्हें संभालकर रखना बहुत पसंद है. अगर मैं अपने पूरे सफर को पीछे मुड़कर देखूं, तो यह मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं है. मुझे हमेशा अपनी क्षमताओं पर भरोसा था, लेकिन मुझे यह भी पता था कि यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी. भगवान ने मुझे जितना दिया है, वह मेरी उम्मीदों से कहीं ज्यादा है. मैं अपने सफर को बहुत कृपा और आभार के साथ देखता हूं और मुझे इस पर बहुत गर्व है."
शतक से चूकने पर क्या कहा?
विराट कोहली कहते हैं, "अगर मैं पूरी ईमानदारी से कहूं, तो अभी के खेल के तरीके के हिसाब से मैं किसी भी माइलस्टोन के बारे में नहीं सोचता.अगर हम पहले बल्लेबाजी कर रहे होते, तो शायद मैं और तेज खेलता. लेकिन चेज में जब लक्ष्य सामने हो, तो आपको स्थिति के हिसाब से खेलना पड़ता है. मन कर रहा था कि और बाउंड्री मारूं, लेकिन अनुभव काम आता है. मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि टीम को आसान जीत की स्थिति में लाना है."
विराट कोहली ने बताया, "बुनियादी सोच यह है कि मैं नंबर तीन पर बल्लेबाजी करता हूं. अगर मुश्किल स्थिति हो, तो मैं इंतजार करने के बजाय काउंटर-अटैक करने में यकीन रखता हूं. किसी भी गेंद पर आपका नाम लिखा हो सकता है, इसलिए ज्यादा धीमा रहने का कोई फायदा नहीं. साथ ही यह भी जरूरी है कि ज्यादा कुछ अतिरिक्त नहीं किया जाए और अपने स्ट्रेंथ पर टिका रहूं. जब मैं रोहित के आउट होने के बाद अंदर आया, तो मुझे लगा कि अगर मैं शुरुआती 20 गेंदों में थोड़ा जोर लगाऊं, तो हम विपक्षी टीम पर दबाव बना सकते हैं. वही अंतर पैदा हुआ."
विराट कोहली ने आगे कहा, "यह सब अलग-अलग ग्राउंड पर अलग-अलग समय पर होता है. मैं इसके बारे में जानता हूं. सच कहूं तो मुझे अच्छा नहीं लगता. एमएस के साथ भी मैंने यही होते देखा है. जो खिलाड़ी आउट होकर वापस जा रहा होता है, उसके लिए यह अच्छा एहसास नहीं होता. मैं समझता हूं कि भीड़ उत्साहित होती है, लेकिन मैं अपनी जिम्मेदारी पर फोकस रखने की कोशिश करता हूं और ज्यादा नहीं सोचता. मैं बेहद आभारी हूं. यह सच में एक आशीर्वाद है. सिर्फ वही खेल खेलकर, जिसे मैं बचपन से प्यार करता हूं. लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला पाता हूं, इससे ज्यादा मैं क्या मांग सकता हूं. मैं अपना सपना जी रहा हूं और लोगों को खुश देख मुझे खुशी होती है."