वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं रहे, बल्कि एक ऐसा ‘टेम्पलेट’ बनते जा रहे हैं, जिसे देखकर हर पिता, हर कोच अगला सुपरस्टार तैयार करना चाहता है. IPL में कम उम्र में जिस तरह उन्होंने दुनिया के बड़े-बड़े गेंदबाजों पर हमला बोला, उसने भारतीय क्रिकेट की सोच ही बदल दी है. लेकिन इस बदलाव का एक डरावना पहलू भी सामने आने लगा है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में करीब 10-11 साल का एक बच्चा क्रिकेट किट पहनकर नेट्स के बाहर खड़ा दिखाई देता है. सामने बड़े उम्र के तेज गेंदबाज अभ्यास कर रहे हैं. जैसे ही उसे बल्लेबाजी के लिए अंदर ले जाया जाता है, बच्चा डर जाता है. उसकी आवाज कांपती हुई सुनाई देती है -
'नहीं… मैं नहीं खेलूंगा'
'मुझे चोट लग जाएगी…'
लेकिन इसके बावजूद एक शख्स, जिसे लोग उसका पिता या कोच मान रहे हैं, उसका हाथ पकड़कर उसे नेट्स की ओर ले जाता है. बच्चा पीछे हटने की कोशिश करता है, लेकिन उसे फिर भी तेज गेंदबाजों के सामने खड़ा कर दिया जाता है. वीडियो यहीं खत्म हो जाता है, लेकिन कुछ सेकेंड की इस क्लिप ने इंटरनेट पर लंबी बहस छेड़ दी.
वीडियो ने इंटरनेट को दो हिस्सों में बांट दिया.
एक वर्ग का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में बच्चे को डर के बावजूद तेज गेंदबाजों के सामने धकेलना गलत है. क्रिकेट सीखना और डर के खिलाफ लड़ना अलग बात है, लेकिन जब बच्चा खुद साफ तौर पर घबराया हुआ दिखे, तब उसे मजबूर करना मानसिक दबाव भी बन सकता है.
Dude... pic.twitter.com/6jFmNfrPSN
— Haydos🛡️ (@GovindIstOdraza) May 13, 2026
वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे 'हार्ड ट्रेनिंग' का हिस्सा बता रहे हैं.उनका तर्क है कि बड़े खिलाड़ी बनने के लिए डर से लड़ना जरूरी है. कई लोगों ने तो सीधे सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर इतनी कम उम्र में बड़े मंच पर सफल होना है, तो वैसी ही निडरता भी चाहिए.
यहीं से शुरू होती है असली बहस
क्या अगला वैभव सूर्यवंशी बनाने की होड़ में बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला जा रहा है? क्या 15 साल के एक क्रिकेटर की सनसनीखेज सफलता अब बाकी बच्चों के बचपन का पैमाना तय करने लगी है?
2026 का दौर शायद भारतीय क्रिकेट में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है. अब सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि बहुत छोटी उम्र में 'निडर' दिखने की उम्मीद भी बच्चों से की जाने लगी है. और यही वजह है कि यह वायरल वीडियो सिर्फ एक बच्चे की घबराहट की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलती क्रिकेट संस्कृति का आईना बन गया है, जहां सपने बड़े हैं… लेकिन उन सपनों का दबाव शायद उससे भी बड़ा.