2025 के दूसरे हिस्से तक आते-आते शुभमन गिल भारतीय क्रिकेट के सबसे चमकते सितारों में शुमार हो चुके थे. इंग्लैंड के खिलाफ एक युवा कप्तान के तौर पर 754 रन, आईपीएल में 650 रनों वाला दमदार सीजन और इसके बाद दो फॉर्मेट में एशिया कप और चैम्पियंस ट्रॉफी जैसे खिताब... सब कुछ उनकी ओर इशारा कर रहा था कि भारत को भविष्य का सर्वकालिक टॉप-ऑर्डर बैटर और कप्तान मिल गया है. इसी अवधि में गिल को टेस्ट और वनडे टीम की कप्तानी दी गई और टी20 टीम में उप-कप्तान बनाकर स्पष्ट उत्तराधिकार योजना तैयार की जा रही थी.
...लेकिन जैसे ही कैलेंडर 2026 में दाखिल हुआ, माहौल बदल गया. वर्ष का अंत गिल ने चोट के बीच किया, भारत घरेलू टेस्ट सीरीज दक्षिण अफ्रीका से हार गया और सबसे महत्वपूर्ण झटका- टी20 फॉर्म में गिरावट के चलते गिल अपनी जगह खो बैठे. घर में होने वाले टी20 विश्व कप के सामने गिल का टी20 से बाहर होना एक ऐसा संकेत था, जिसने सवाल खड़े किए कि आखिर यह गिरावट कितनी गहरी है और इसका अर्थ क्या है.
फिलहाल खबर है कि तिलक वर्मा की सर्जरी हो गई है और उनकी टी20 वर्ल्ड कप में खेल पाना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में टीम में एक जगह खाली हो रही है- तो क्या शुभमन गिल को शामिल किया जा सकता है? खैर, यह तो भविष्य के गर्भ में है.
दबाव इसलिए नहीं कि गिल आउट ऑफ फॉर्म हैं, बल्कि...
गिल के सामने असली चुनौती फॉर्म नहीं, बल्कि समय और अवसर हैं. यदि 2025 की तरह किसी बल्लेबाज को फॉर्म टेस्ट करने के लिए लगातार मैच न मिलें तो गिरावट से वापसी का रास्ता लंबा हो जाता है. प्रश्न यह है कि 2026 में गिल को अपनी क्षमता साबित करने के लिए पर्याप्त क्रिकेट मिलेगा भी या नहीं?
वनडे क्रिकेट में तो स्थिति और चिंताजनक है. ODI में गिल के रिकॉर्ड पर कोई बड़ी आलोचना नहीं, मगर यह सवाल जरूर उठता है कि क्या वे अपने आंकड़ों को उच्च दबाव के मुकाबलों में भी दोहरा पाएंगे? 2026 के लिए भारत के पास केवल 6 ODI सीरीज निर्धारित हैं और हर सीरीज तीन-तीन मैचों की- यानी साल भर में केवल 18 मैच. वह भी तब, जब शुरुआती मुकाबले एक रोटेटेड न्यूजीलैंड टीम के खिलाफ हैं, जिनमें प्रदर्शन तो हो सकता है, पर मूल्यांकन नहीं.
2026 के तीन सबसे कठोर परीक्षण
गिल के लिए 2026 को तीन हिस्सों में समझना ज़रूरी है -
1. इंग्लैंड दौरा (जुलाई)
इंग्लैंड दौरा हमेशा ही भारतीय बल्लेबाजों के लिए एक बेंचमार्क रहा है. 2025 की महान सीरीज के बाद यही देखने को मिलेगा कि क्या वह प्रदर्शन दोहराना किसी सिस्टम का हिस्सा था या केवल फॉर्म का शिखर.
2. न्यूजीलैंड दौरा (वर्ष का अंत)
न्यूजीलैंड दौरों का फायदा यह है कि वे भारतीयों को Test चुनौती देते हैं. 2026 में भारत का केवल चार टेस्ट मैचों का कैलेंडर तय है, जिसमें न्यूजीलैंड दौरा मुख्य है. गिल को इस अवधि में रन का पहाड़ खड़ा करना होगा- क्योंकि यही वह फॉर्मेट है जिसमें उनके नेतृत्व और बल्लेबाजी दोनों की परीक्षा होगी.
3. आईपीएल के दौरान टी20 प्रासंगिकता
अगर गिल टी20 इंटरनेशनल के लिए टीम में वापसी चाहते हैं, तो सिर्फ रन बनाना काफी नहीं होगा. उन्हें स्ट्राइक-रेट और इरादे (intent) दोनों दिखाने होंगे. पिछले सीजन में उनका पावरप्ले स्ट्राइक-रेट अच्छा रहा है, लेकिन आज टी20 में ओपनर्स से और तेज शुरुआत की उम्मीद रहती है. इसलिए गिल को रन के साथ यह भी साबित करना होगा कि वे स्थिति के हिसाब से गियर बदल सकते हैं.
कप्तान शुभमन VS बल्लेबाज शुभमन
2026 गिल के करियर का वह समय बनने जा रहा है जब लोग सिर्फ उनके रन नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व को भी परखेंगे. भारत के क्रिकेटिंग सिस्टम में विराट कोहली-रोहित शर्मा जैसे कप्तानों के बाद जो विरासत आई है, उसे सिर्फ रणनीति से नहीं, बल्कि टीम को जीत की आदत दिलाकर आगे बढ़ाना होगा.
दूसरी बात- रणनीति और वर्कलोड मैनेजमेंट... चोटों ने 2025 के अंत में गिल को रोक दिया था और 2026 में भारतीय क्रिकेट में workload एक बड़ा विषय होगा. गिल को फिट भी रहना होगा और परफॉर्म भी करना होगा- यह दोनों चीजें कभी-कभी आपस में टकराती हैं.
क्या वे 2025 दोहराएं?
2025 जैसी उपलब्धियों को दोहराना लगभग नामुमकिन है, क्योंकि वह साल गिल के करियर में एक अलग ही स्तर का था. उस तरह के प्रदर्शन को फिर से हासिल करने की कोशिश खिलाड़ी को थका सकती है. बेहतर यही है कि अब ध्यान इस बात पर हो कि गिल छोटे-छोटे कदमों से बेहतर बल्लेबाज और ज्यादा समझदार कप्तान बन रहे हैं या नहीं.
2025 के अंत में गिल सभी फॉर्मेट मिलाकर सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाले खिलाड़ी थे और सर्वकालिक महान बल्लेबाज जो रूट के साथ उस वर्ष संयुक्त रूप से सबसे अधिक शतक वाले खिलाड़ी. यह याद रखने लायक है क्योंकि इससे पता चलता है कि गिरावट के बावजूद baseline कितना ऊंचा है.
लक्ष्य 2026 नहीं, 2027 होना चाहिए
2027 विश्व स्तर पर भारतीय क्रिकेट के लिए असली परीक्षा का वर्ष है. साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर आएगी. साल का समापन वनडे विश्व कप से होगा.अगर गिल को कप्तान के तौर पर दुनिया के सामने स्वयं को साबित करना है, तो 2026 वह पुल है जिस पर से उन्हें गुजरना होगा- कहीं गिरकर नहीं, बल्कि सीखकर.
शुभमन गिल के लिए 2026 मुश्किल साल है, क्योंकि यहा फॉर्म, मैचों का दबाव, लोगों की सोच और कप्तानी...सब साथ में चुनौती बनेंगे. यह ऐसा साल होगा, जिसमें सवाल कम होंगे और मौके ज्यादा, बस उन्हें सही तरह से निभाने की जरूरत होगी.
कप्तान के रूप में लक्ष्य 2025 जैसी चमक दोहराना नहीं होना चाहिए, बल्कि 2027 के लिए भारत को तैयार करना होना चाहिए. यही वजह है कि 2026 गिल का सबसे कठिन साल है- गिरने की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि अब उन्हें और ऊपर जाना है.