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एक थे पॉल चंद्रशेखर वलथाटी

2011 का आईपीएल सीजन चल रहा था. मोहाली में किंग्स इलेवन पंजाब और चेन्नई सुपरकिंग्स का मैच था. पंजाब के लिए 189 का टारगेट बहुत मुश्किल दिख रहा था. लेकिन पंजाब की टीम से खेल रहे एक 27 साल के लड़के ने उस मैच में 63 गेंदों पर 120 रनों की तूफानी नाबाद पारी खेलकर न सिर्फ अपनी टीम को मुश्किल मैच जिताया, बल्कि क्रिकेट फैंस को भी अपनी बल्लेबाजी से हैरान कर दिया.

पॉल वल्थाटी (फाइल फोटो) पॉल वल्थाटी (फाइल फोटो)

2011 का आईपीएल सीजन चल रहा था. मोहाली में किंग्स इलेवन पंजाब और चेन्नई सुपरकिंग्स का मैच था. पंजाब के लिए 189 का टारगेट बहुत मुश्किल दिख रहा था. लेकिन पंजाब की टीम से खेल रहे एक 27 साल के लड़के ने उस मैच में 63 गेंदों पर 120 रनों की तूफानी नाबाद पारी खेलकर न सिर्फ अपनी टीम को मुश्किल मैच जिताया, बल्कि क्रिकेट फैंस को भी अपनी बल्लेबाजी से हैरान कर दिया.

अभी तक याद नहीं आया यहां किसकी बात हो रही है? वो जोशीला क्रिकेटर था मुंबई का पॉल चंद्रशेखर वलथाटी , जिन्होंने आईपीएल 2011 का पहला शतक जड़ा था. इसके बाद पॉल ने अगले मैच में 47 गेंदों पर 75 रनों की एक और धुआंधार पारी खेली और बॉलिंग में भी जौहर दिखाते 29 रन पर चार विकेट लिए. वल्थाटी का बढि़या प्रदर्शन का सिलसिला चलता रहा और फैंस की उनसे उम्मीदें बढ़ती गईं. पॉल ने फिर एक 46 रनों की ऐसी धुआंधार पारी खेली कि उनकी टीम ने सिर्फ तीन ओवरों में 50 रन का आंकड़ा पार करके आईपीएल में इतिहास रच दिया.

आईपीएल के तीन मैचों में पॉल ने ऐसा कमाल किया कि लोगों को उनमें अगला क्रिकेट स्टार दिखने लगा. लेकिन पॉल का जलवा चार दिन की चांदनी साबित हुआ. चार साल बाद वो कहां है, किसी को पता नहीं. क्रिकेटरों को भगवान की तरह पूजने वाले इस देश में पॉल वलथाटी का नामलेवा एक आदमी भी ढूंढना मुश्क‍िल है. ऐसा नहीं है कि पॉल 2011 के बाद आईपीएल खेले नहीं. वो 2013 तक आईपीएल खेले, लेकिन बल्ले को जैसे जंग लग गया. एक सीजन पहले गेंदबाजों को खौफ की नजर आने वाले इस बल्लेबाज की हालत ऐसी हो गई कि वो आईपीएल की आखिरी पांच पारियों में दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाया. 2013 में पॉल ने आईपीएल का अपना अंतिम मैच सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ खेला था और उसमें भी वो 6 रन ही बना सके.

हिमाचल प्रदेश के लिए पहला रणजी मैच खेलने वाले पॉल अब 31 साल के हो चुके हैं और लगता नहीं कि उनकी आईपीएल या फर्स्ट क्लास क्रिकेट में वापसी होगी.

पॉल आईपीएल के ऐसे अकेले चार दिन के स्टार नहीं है, जो पूरी तरह गुमनाम हो गए. पंजाब के रहने वाले लेग स्प‍िनर राहुल शर्मा ने पॉल वलथाटी से भी आगे का सफर तय किया था. राहुल भी पॉल की तरह 2011 आईपीएल की खोज थे. राहुल ने आईपीएल के उस सीजन में पुणे वॉरियर्स के लिए खेलते हुए 14 विकेट लिए और अपनी लेग ब्रेक तथा गुगली से टीम इंडिया के सेलेक्टरों को भी इतना प्रभावित कर दिया कि उन्हें भारतीय टीम में जगह मिल गई. बाकायदा राहुल ने भारत के लिए 4 वनडे और 2 ट्वंटी 20 इंटरनेशनल खेले भी, लेकिन अब वो भी अब अपनी आईपीएल टीम पुणे वॉरियर्स की तरह लाइमलाइट से गायब हो चुके हैं.

राहुल हालांकि पिछले साल तक आईपीएल खेले. आईपीएल से पुणे वॉरियर्स की छुट्टी हो जाने के बाद वो पिछले साल दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए खेले थे, लेकिन उनकी गेंदबाजी की चमक गायब हो चुकी थी. राहुल का करियर चौपट करने में कुछ योगदान उस ड्रग्स कांड का भी रहा, जिमसें वो साउथ अफ्रीका के बॉलर वायन पार्नेल के साथ पकड़े गए थे और उनका ड्रग्स टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था. उस कांड के बाद उनका करियर गिरता ही चला गया और अब वो लगभग गुमनाम हो चुके हैं.

आईपीएल शायद टीवी के किसी रियलिटी शो जैसा है, जो 2 महीने तक चलता है और जब तक चलता है देखने वाले अच्छा परफॉर्म करने वाले युवा क्रिकेटरों को भी चीयर करते हैं. लेकिन जैसे ही क्रिकेट का ये रियलिटी शो खत्म होता है, पॉल वल्थाटी और राहुल शर्मा की तरह बहुत सारे क्रिकेटर भुला दिए जाते हैं.

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