टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर ने 15 साल के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है. मांजरेकर का मानना है कि 'बेबी बॉस' वैभव जितने शानदार बल्लेबाज हैं, उतनी ही जरूरत उनके खेल के बाकी पहलुओं को परखने की भी है. उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ कुछ बड़े शॉट खेलने से कोई खिलाड़ी पूरी तरह तैयार क्रिकेटर नहीं बन जाता.
संजय मांजरेका ने कहा कि मौजूदा समय में कई खिलाड़ी सिर्फ बल्लेबाजी या गेंदबाजी तक सीमित हो गए हैं. इससे क्रिकेटर के असली स्किल का पता नहीं चलता. मांजरेकर के मुताबिक एक खिलाड़ी की पहचान सिर्फ उसके चौके-छक्कों से नहीं, बल्कि उसके पूरे खेल से होनी चाहिए. उन्होंने रोहित शर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि अब कई खिलाड़ी सिर्फ कुछ गेंदें खेलकर मैच से बाहर हो जाते हैं और उन्हें फील्डिंग, दबाव या बाकी चुनौतियों का सामना ही नहीं करना पड़ता.
स्पोर्ट्सस्टार के इनसाइट एज पॉडकास्ट में संजय मांजरेकर ने कहा, 'क्या हम वैभव सूर्यवंशी के खेल का सिर्फ एक ही पहलू देखना चाहते हैं. क्रिकेटर सिर्फ बल्लेबाज या गेंदबाज नहीं होना चाहिए. हमें यह भी देखना चाहिए कि वह दबाव में कैसा फील्डर है, मुश्किल हालात में कैसे रिएक्ट करता है और मैच के तनाव को कैसे संभालता है.'
इस रूल को लेकर भड़के मांजरेकर
संजय मांजरेकर ने कहा कि क्रिकेट की खूबसूरती इसी में है कि खिलाड़ी को हर विभाग में खुद को साबित करना पड़ता है. अगर कोई बल्लेबाज शानदार रन बनाता है लेकिन फील्डिंग में कमजोर है, तो विपक्षी टीम उसकी उस कमजोरी को निशाना बनाएगी और यही असली खेल है. उन्होंने आगे बताया, अगर कोई अच्छा गेंदबाज है, तो मैं सिर्फ उसके चार ओवर नहीं देखना चाहता. मैं यह भी देखना चाहता हूं कि वह फील्डिंग कैसी करता है. खेल को खिलाड़ी के हर पहलू की परीक्षा लेनी चाहिए.'
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संजय मांजरेकर का मानना है कि इम्पैक्ट प्लेयर नियम खिलाड़ियों की कमजोरियों को छिपाने का मौका देता है. उनके मुताबिक इससे युवा खिलाड़ियों का विकास भी प्रभावित हो सकता है, क्योंकि वे अपने खेल के बाकी हिस्सों पर उतना काम नहीं कर पाते.
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हालांकि वैभव सूर्यवंशी को खोजने वाले जुबिन भरूचा पहले ही उनकी फील्डिंग और एथलेटिक क्षमता की तारीफ कर चुके हैं. लेकिन संजय मांजरेकर अब भी मानते हैं कि जब तक कोई खिलाड़ी पूरे मैच में हर विभाग में खुद को साबित नहीं करता, तब तक उसकी असली परीक्षा पूरी नहीं मानी जा सकती.