क्वार्टर फाइनल में पाकिस्तान भले ही ऑस्ट्रेलिया से हार गया, लेकिन हारते-हारते कंगारू टीम को हराने की तरकीब भी बता गया. अब जरूरत इस बात की है कि 26 मार्च को जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल खेलने उतरे, तो इन तरकीबों को जज्ब करके उतरे और वह जज्बा लेकर उतरे, जो बड़ी टीमों को परास्त करने के लिए जरूरी होता है.
20 मार्च को ओवल के मैदान में हुए इस मैच में भारत के पास कई सबक हैं. सबसे बड़ा सबक है वहाब रियाज का कातिलाना स्पेल . वहाब ने आतिशी बल्लेबाज शेन वॉटसन को अपनी बाउंसर गेंदों से इस कदर परेशान किया कि वह स्पेल इतिहास में दर्ज हो गया. वहाब अपनी गेंदों के साथ बॉडी लैंग्वेज से भी आक्रामक रहे. यह गुस्सा यूं ही नहीं था. जब वह बल्लेबाजी कर रहे थे तो स्टार्क ने टिपिकल ऑस्ट्रेलियाई अंदाज में उनसे स्लेजिंग की थी. इसका बदला बाद में उन्होंने अपनी गेंदों से लिया. उनकी सनसनाती बाउंसर्स एक के बाद एक शेन वॉटसन के कान के पास से निकलती चली गईं. उनके दिमाग में अपने कप्तान मिस्बाह का वही वाक्य था, 'जाओ और हमला करो.'

भारतीय टीम को भी यही करना होगा. बाउंसर मारो, हमला बोलो, जरूरत पड़े तो स्लेजिंग भी करो. क्रिकेट में एक आम मान्यता है कि एशियाई बल्लेबाज उछाल लेती तेज गेंदों को अपेक्षाकृत रूप से अच्छा नहीं खेल पाते. एक अरसे से कैरेबियाई और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज अपने पेस और बाउंस से एशियाई बल्लेबाजों पर हमला करते रहे हैं. लेकिन वहाब ने साबित किया है कि कंगारुओं को उन्हीं के अंदाज में अटैक करके बैकफुट पर धकेला जा सकता है. भारतीय पेस बैटरी इन दिनों शानदार फॉर्म में है. वहाब ने जो काम किया उसकी जिम्मेदारी 6 फुट के उमेश यादव उठा सकते हैं. बीते मैचों में वह 145 किमी/घंटा की स्पीड से गेंदबाजी कर चुके हैं. मोहम्मद शमी भी लगातार 140 की स्पीड से गेंद फेंक रहे हैं. इस वर्ल्ड कप में उन्होंने शॉर्ट ऑफ गुड लेंथ गेंदों का बढ़िया इस्तेमाल किया है. यहां तक कि अपेक्षाकृत रूप से धीमी गेंदबाजी करने वाले मोहित शर्मा भी छोटी गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान कर चुके हैं.

गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी के मोर्चे पर भी यही करना होगा. बॉडी लैंग्वेज आक्रामक रखी जाए और भीतर से अपनी नर्व्स पर कंट्रोल भी रखा जाए. 'प्रेशर कुकर सिचुएशन' में डेल स्टेन जैसा गेंदबाज भी एक ओवर में 12 रन डिफेंड नहीं कर पाता. इसलिए डर का हटना जरूरी है. यानी कुल मिलाकर वैसा खेल दिखाने की जरूरत है जैसा फिल्म 'चक दे इंडिया' में शाहरुख की टीम अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में दिखाती है. 26 मार्च का खेल टेंपरामेंट का खेल होगा, टैलेंट का नहीं. याद कीजिए 'चक दे' का वह सीन, जब कबीर खान अपनी नसें नुमायां करते हुए टीम से कहता है, 'वो एक मारें तो तुम चार मारो. उनको उन्हीं की जुबान में जवाब दो.'