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India tour of South Africa: पेस-उछाल..क्यों अफ्रीका में मिली हार? एशियाई टीमों को झेलनी पड़ती है मुश्किल

एशियाई टीमों के दक्षिण अफ्रीका की मुश्किल विकेटों पर हमेशा से ही परेशानी का सामना करना पड़ता है. अभी तक सिर्फ श्रीलंका ही एकमात्र एशियाई ऐसी टीम है जिसने दक्षिण अफ्रीका में सीरीज जीत दर्ज की है.

India vs South Africa Cape Town (Getty) India vs South Africa Cape Town (Getty)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टीम इंडिया के हाथ फिर रहे खाली
  • सिर्फ 1 टेस्ट में जीत दर्ज कर पाई टीम इंडिया

भारतीय टीम एक बार फिर से दक्षिण अफ्रीका में सीरीज जीत दर्ज करने में नाकाम रही. 1992 में पहली बार दक्षिण अफ्रीका का दौरा करने वाली भारतीय टीम के हाथ पिछले 30 वर्षों से खाली हैं. 7 बार भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया है और सिर्फ 4 टेस्ट में ही जीत दर्ज कर पाई है. टीम इंडिया को अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज करने में काफी समय लगा था. टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका में अपनी पहली टेस्ट जीत साल 2006 में दर्ज की थी. 

सिर्फ श्रीलंका ने जीती है टेस्ट सीरीज

एशियाई टीमों को दक्षिण अफ्रीका की मुश्किल विकेटों पर हमेशा से ही परेशानी का सामना करना पड़ता है. अभी तक सिर्फ श्रीलंका ही एकमात्र एशियाई ऐसी टीम है जिसने दक्षिण अफ्रीका में सीरीज जीत दर्ज की है. श्रीलंका ने 2018-19 के दौरे पर दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से मात दी थी. श्रीलंका ने उस वक्त ट्रांजिशन से गुजर रही दक्षिण अफ्रीकी टीम को मात दी थी. भारतीय टीम को भी इसी वजह से इस सीरीज को जीतने के लिए फेवरेट माना जा रहा था. पाकिस्तान ने भी दक्षिण अफ्रीका में सिर्फ 2 टेस्ट जीते हैं. 

एक बार फिर से भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका में तेज पिचों पर चकमा खा गई. टीम इंडिया के गेंदबाजों ने बेहतर तरीके से कंडीशंस का इस्तेमाल किया लेकिन बल्लेबाज अफ्रीकी गेंदबाजों की हाईट और शॉर्ट ऑफ लेंथ गेंदों के सामने धाराशाई नजर आए. अक्सर भारतीय टीम के बल्लेबाजों के सामने यह समस्या बनी रहती है और यही एक मुख्य कारण है जो बार बार भारत को सीरीज जीत के करीब होने के बाद भी दूर कर देता है.

दक्षिण अफ्रीका के पास हमेशा से लंबी हाइट और अच्छी पेस वाले गेंदबाज मौजूद रहे हैं, जिससे वह एशियाई टीमों को अपनी कंडीशन के हिसाब से चैलेंज करने में अक्सर कामयाब रही है. 

विकेट पर लेंथ परखना होता है मुश्किल

एशिया में स्लो और लो बाउंस वाली विकेटों पर खेलने वाली टीमों के लिए दक्षिण अफ्रीका में आते ही तेज और हाई बाउंस वाली विकेटों पर एडजस्ट करना काफी मुश्किल होता है. दक्षिण अफ्रीका के पास हमेशा से टीम में ऐसे गेंदबाज मौजूद रहे हैं. पुरानी सीरीजों में शॉन पोलॉक, एलन डोनाल्ड, मोर्ने मोर्कल, डेल स्टेन के अलावा मौजूदा टीम में भी कैगिसो रबाडा, लुंगी नगीदी जैसे लंबे और तेज गेंदबाज मौजूद थे.

इनके अलावा ड्वेन ओलिवर, मार्को यानसेन ने भी टीम इंडिया के बल्लेबाजों को शॉर्ट बॉल और अपनी पेस से खासा परेशान किया है. दक्षिण अफ्रीका की विकेटों पर लेंथ को परखना आसान नहीं होता है. यह सबसे कारण है एशियाई टीमों के इस मुल्क में विफलता है. इन विकेटों पर उछाल हमेशा एक समान नहीं होता, यब बल्लेबाजों के लिए सबसे मुश्किल काम होता है और उनके लिए परेशानी पैदा करता है. रबाडा, नगीदी और यानसेन ने मिलकर 60 में से 54 भारतीय विकेट झटके. 

दक्षिण अफ्रीका के इस माहौल का फायदा भारतीय गेंदबाजों ने भी बखूबी निभाया है, लेकिन बल्लेबाजों की गलतियों की वजह से टीम इंडिया 3 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे होने के बाद भी एक बार फिर से दक्षिण अफ्रीका से खाली हाथ वापस लौटेगी. टीम इंडिया की गेंदबाजी के साथ बेहतर बल्लेबाज और ऑस्ट्रेलिया में टीम के शानदार प्रदर्शन के बाद सभी को उम्मीद थी कि टीम यहां सीरीज जीत दर्ज करेगी लेकिन दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों कि उछाल के सामने भारतीय बल्लेबाज सरेंडर करते नजर आए. 

 

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