जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम इंडिया का एलान हो चुका है. महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली समेत कई सीनियर खिलाड़ी नदारद हैं. उन्हें विश्राम दिया गया है. याद होगा आपको कि वीरेन्द्र सहवाग, जहीर खान, आशीष नेहरा, युवराज सिंह, गौतम गंभीर को जब टीम से बाहर किया गया था उस वक्त वजह से बताई गई थी कि ये खिलाड़ी अब काफी उम्रदराज हो गए हैं.
अब इनकी जगह युवा चेहरों को टीम में जगह मिलनी चाहिए. चयनकर्ता भविष्य की ओर देख रहे थे. लेकिन हरभजन सिंह को टीम में चुनकर क्या चयनकर्ताओं ने एक युवा खिलाड़ी के मौके को नहीं मार दिया?
हालांकि प्रदर्शन के लिए उम्र कोई पैमाना नहीं. एक खिलाड़ी अगर टीम के लिए उपयोगी है और वह अच्छा कर रहा है तो उम्र कोई मायने नहीं रखता. लेकिन हमारे इन्हीं सेलेक्टर्स ने बड़े-बड़े दिग्गजों को यह कह कर टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया था कि अब वह बूढ़े हो गए हैं. तो क्या आज हरभजन का टीम में चुना जाना उन दिग्गजों के साथ नाइंसाफी नहीं?
हरभजन अभी 35 साल के हैं. जहीर 37 साल के होने वाले हैं और नेहरा की उम्र 36 साल है. अगर इन खिलाड़ियों का हालिया प्रदर्शन देखा जाए तो नेहरा और जहीर, हरभजन से कहीं पीछे नहीं हैं. फिटनेस के मामले में भी ये दोनों भज्जी से बहुत पीछे नहीं दिखते.
आईपीएल में नेहरा ने चेन्नई सुपर किंग्स को अपनी गेंदबाजी के दम पर फाइनल में पहुंचाया. दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए जहीर ने जितने भी मैच खेले उनमें वह गजब की फॉर्म में नजर आए, तो उन्हें चयनकर्ताओं ने क्यों दरकिनार किया?
वैसे भी देखा जाए तो भारत में अब ऑफ स्पिन गेंदबाज लगभग विलुप्त से होते जा रहे हैं. फर्स्ट क्लास क्रिकेट या आईपीएल में भी कोई कायदे का ऑफ स्पिन बॉलर नजर नहीं आ रहा है जो बड़ी चिंता का विषय है. हरभजन के बाद आर अश्विन ने मोर्चा संभाला और अच्छा प्रदर्शन किया. क्या यह समय आगे किसी टैलेंट को बढ़ावा देने का नहीं? यह समय था अश्विन का विकल्प ढूंढने का लेकिन हम वापस हरभजन पर चले गए.
इन दिनों भारत की तेज गेंदबाजी औसत दर्जे से भी नीचे नजर आ रही है. ऐसे में क्या जहीर और नेहरा के साए में युवा गेंदबाजों को कोई फायदा न होता? चयनकर्ताओं को अपना नजरिया बदलने की जरूरत है. अगर एक खिलाड़ी पर उम्र का फॉर्मूला लगाकर उन्हें टीम से बाहर कर दिया जाता है तो फिर दूसरे खिलाड़ी पर वह फॉर्मूला क्यों नहीं लगता?
अगर आप भविष्य की ओर ही देख रहे हैं तो फिर सारे सीनियर्स के लिए टीम इंडिया के दरवाजे बंद होने चाहिए, चुनिन्दा चेहरों के लिए नहीं. क्या चयनकर्ता दोहरा मापदंड नहीं अपना रहे?