टी20 वर्ल्ड कप से पहले बांग्लादेश के मैच भारत से बाहर कराने की मांग ने हलचल जरूर मचाई है, लेकिन असली सवाल यही है कि अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ऐसा करती है तो क्या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा? जवाब साफ है- यह कोई बड़ा झटका नहीं, बल्कि हालात पर निर्भर करने वाला सीमित असर होगा.
सबसे पहले एक भ्रम तोड़ना जरूरी है. आईसीसी इवेंट में टिकट, ब्रॉडकास्ट और सेंट्रल स्पॉन्सरशिप से होने वाली कमाई सीधे बीसीसीआई के खाते में नहीं जाती. ये सभी अधिकार ICC Business Corporation (IBC) के पास होते हैं. मेजबान बोर्ड होने के नाते बीसीसीआई की भूमिका आयोजन और संचालन तक सीमित रहती है, जबकि उसकी कमाई मुख्य रूप से मैच-डे सरप्लस, लोकल स्पॉन्सरशिप और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन से जुड़ी होती है.
यही वजह है कि बांग्लादेश के मैच भारत से बाहर जाने पर बीसीसीआई की ब्रॉडकास्ट या सेंट्रल वर्ल्ड कप आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा. नुकसान, अगर हुआ भी, तो केवल मैच-डे इकोनॉमिक्स तक सीमित रहेगा.
वर्तमान शेड्यूल के मुताबिक बांग्लादेश को ग्रुप चरण में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज, इटली और इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैच खेलने थे, जबकि चौथा मुकाबला मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में नेपाल के खिलाफ था. ईडन गार्डन्स की क्षमता करीब 63 हजार और वानखेड़े की 33 हजार है. इस तरह कुल मिलाकर लगभग 2.22 लाख सीटों की इन्वेंट्री दांव पर लगती है.
हालांकि टिकट की शुरुआती कीमतें 100 से 300 रुपये के बीच रखी गई हैं, लेकिन ये केवल प्रवेश स्तर हैं. असली कमाई बेहतर स्टैंड, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स और कॉर्पोरेट टिकटों से होती है. अगर इन चारों मैचों में 60 से 90 फीसदी तक दर्शक आते और औसत टिकट कीमत 500 से 1500 रुपये के बीच रहती, तो कुल ग्रॉस गेट कलेक्शन 7 से 30 करोड़ रुपये के दायरे में जा सकता था.
यह आंकड़ा सुनने में बड़ा लगता है, लेकिन ध्यान रहे कि यह पूरी टिकट कमाई है, न कि बीसीसीआई का शुद्ध लाभ. चूंकि टिकटिंग आईसीसी के नियंत्रण में है, इसलिए बीसीसीआई का वास्तविक जोखिम इससे कहीं कम बैठता है.
असल खेल यहां परिदृश्यों का है-
- अगर आईसीसी बांग्लादेश के मैच भारत से बाहर ले जाती है और उनकी जगह भारतीय वेन्यू को कोई दूसरा मुकाबला नहीं मिलता, तभी नुकसान अधिकतम होगा. लेकिन यह सबसे कम संभावित स्थिति मानी जा रही है.
- दूसरा और अधिक व्यावहारिक विकल्प यह है कि मैच तो बाहर हों, लेकिन भारतीय स्टेडियमों को अन्य मुकाबलों से बैकफिल कर दिया जाए. इस स्थिति में सीटें फिर भी बिकेंगी और नुकसान सिर्फ मांग की गुणवत्ता तक सीमित रहेगा. मसलन, इंग्लैंड बनाम बांग्लादेश जैसे मैच को रिप्लेस करना कठिन है, लेकिन बांग्लादेश-इटली जैसे मुकाबले का विकल्प आसानी से मिल सकता है.
- तीसरा विकल्प- और बीसीसीआई के लिए सबसे सुरक्षित- यह है कि आईसीसी केवल वेन्यू या तारीखों की अदला-बदली करे, ताकि भारत का मैच इन्वेंट्री बरकरार रहे. ऐसे में नुकसान राजस्व का नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और आयोजन की अतिरिक्त लागत तक सीमित रहेगा.
इस पूरे विवाद में ईडन गार्डन्स और वानखेड़े की अहमियत सिर्फ दर्शक क्षमता तक सीमित नहीं है. ये दोनों स्टेडियम लोकल स्पॉन्सरशिप और ऑन-ग्राउंड ब्रांड एक्टिवेशन के बड़े केंद्र हैं. खासकर इंग्लैंड जैसी टीम के मुकाबले, जो टिकट बिक्री और हॉस्पिटैलिटी दोनों के लिहाज से आकर्षक माने जाते हैं.
निचोड़ साफ है. यह मामला बीसीसीआई की वर्ल्ड कप कमाई को लेकर नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा मैचों की मैच-डे अपसाइड से जुड़ा है. नुकसान होगा भी तो वह न तो संरचनात्मक होगा, न ही दीर्घकालिक. सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आईसीसी इन मैचों को कैसे शिफ्ट या रिप्लेस करती है.
कुल मिलाकर, यह मुद्दा आर्थिक संकट से ज्यादा शेड्यूलिंग और आयोजन प्रबंधन का है - जहां शोर ज्यादा है, असर सीमित है.