टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा वनडे सीरीज के बाकी मैचों के लिए चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह आयुष बदोनी को स्क्वॉड में शामिल किया. यह फैसला न सिर्फ चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि इसे जोखिम भरा कदम माना जा रहा है. सवाल उठता है- आखिर क्यों टीम ने अनुभवी और साबित स्पिन ऑलराउंडर्स को पीछे छोड़कर एक ऐसे खिलाड़ी को मौका दिया, जो अब तक क्रिकेट की बड़ी सुर्खियों से दूर रहा है? क्या यह साहसिक रणनीति है या टीम इंडिया ने अपनी मिडल-ऑर्डर और स्पिन की मजबूती पर जोखिम उठा लिया है?
स्पष्ट है कि टीम इंडिया को वॉशिंगटन सुंदर की तरह कोई खिलाड़ी चाहिए था - जो टॉप-6/7 में बल्लेबाजी कर सके और हल्की ऑफ स्पिन भी दे सके. एक विकल्प रियान पराग थे, लेकिन वह चोट से उबर रहे हैं और अभी पूरी तरह फिट नहीं हैं. ऐसे में नजर आयुष बादोनी पर पड़ी.
पर सवाल यही है- क्या आयुष बदोनी वाकई इस रोल के लिए तैयार हैं? IPL में उनका बल्ला चमकता जरूर है, लेकिन गेंदबाजी में उनका योगदान सीमित रहा है. घरेलू लिस्ट-ए और इंडिया ए में उनके कुछ अच्छे प्रदर्शन हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ यह आंकड़े कितने भरोसेमंद हैं?
टीम के पास अक्षर पटेल, शाहबाज अहमद, श्रेयस गोपाल जैसे अनुभवी विकल्प भी थे. ये खिलाड़ी न केवल स्पिन में मदद कर सकते हैं, बल्कि मैच की परिस्थितियों और दबाव को समझने में माहिर हैं. बावजूद इसके, टीम ने इन्हें पीछे छोड़ दिया. यह साफ संकेत देता है कि चयनकर्ताओं ने सुरक्षा की बजाय प्रयोग को प्राथमिकता दी.
आयुष बदोनी की लिस्ट-ए और इंडिया-ए की उपलब्धियां गौरतलब हैं- 700 रन के करीब, औसत 36, स्ट्राइक रेट लगभग 100 और पिछले साल से बढ़ती हुई गेंदबाजी. लेकिन घरेलू स्तर के आंकड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर कामयाबी की गारंटी नहीं देते. वनडे में दबाव, पिच की परिस्थितियां और न्यूजीलैंड जैसी टीम का सामना करना अलग स्तर की चुनौती है.
यह चयन एक साहसिक निर्णय है. अगर बदोनी रन और ओवर दोनों में टीम की मदद करते हैं, तो टीम इंडिया को इसका श्रेय मिलेगा और युवा खिलाड़ियों के लिए संदेश जाएगा कि टीम में मौका मिल सकता है... लेकिन अगर प्रदर्शन फ्लॉप हुआ, तो यह चयन आलोचना और सवालों का केंद्र बन जाएगा.
बुधवार को राजकोट में होने वाले दूसरे वनडे से पहले चर्चा का सबसे बड़ा विषय आयुष बदोनी का संभावित डेब्यू है. टीम इंडिया में ऑलराउंडरों को तरजीह देने की कोच गौतम गंभीर की रणनीति को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार रेड्डी को प्लेइंग XI में उतारने का विकल्प भी मौजूद है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बदोनी के रूप में एक बैटिंग-ऑफ स्पिन विकल्प खेलेगा या रेड्डी के रूप में एक और सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर.
संक्षेप में, आयुष बदोनी का चयन एक दोधारी तलवार है. यह युवा प्रतिभा को आजमाने की दिशा में सही कदम हो सकता है, लेकिन अनुभव और स्थिरता की कमी इसे जोखिम भरा बनाती है. वॉशिंगटन सुंदर जैसी भरोसेमंद भूमिका को किसी युवा को सौंपना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है और अब सबकी निगाहें बदोनी पर टिकी हैं.