कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के आठवें दिन (5 अगस्त) भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन गोल्ड समेत छह मेडल हासिल किए. खास बात यह है कि ये सभी छह मेडल रेसलिंग में आए. इस दौरान महिल रेसलर साक्षी मलिक भी गोल्ड जीतने में कामयाब रहीं. साक्षी मलिक ने वूमेन्स 62 किलो भारवर्ग के फाइनल में कनाडा की एना गोडिनेज गोंजालेज को बाय फॉल (By Fall) के जरिए 4-4 से मात दी.
एक ही दांव ने जिता दिया गोल्ड मेडल
पहले राउंड में साक्षी के खिलाफ एना गोंजालेज ने दो बार टेक डाउन के जरिए दो-दो प्वाइंट हासिल करते 4-0 की बढ़त ले ली थी. ऐसे में लग रहा था कि मुकाबला साक्षी मलिक के हाथ से निकल सकता है. लेकिन 29 साल की साक्षी ने दूसरे हाफ की शुरुआत में ही और टेकडाउन से दो अंक लिए और फिर बेहतरीन दांव लगाते हुए कनाडाई खिलाड़ी को पिन कर गोल्ड मेडल जीत लिया.
गोल्ड जीतने के बाद साक्षी मलिक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं और पोडियो पर मेडल सेरमनी के दौरान उनकी आंखें नम थीं. यह साक्षी मलिक का राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण पदक है. इससे पहले वह राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और कांस्य पदक जीत चुकी हैं. साक्षी मलिक ने क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की केल्सी बार्न्स और सेमीफाइनल में कैमरून की एटेन नोगोले 10-0 से शिकस्त देकर फाइनल का टिकट हासिल किया था.
काफी शानदार रहा है सफर
साक्षी मलिक को कुश्ती विरासत में मिली थी क्योंकि उनके दादा बदलू राम जाने माने पहलवान थे. 12 साल की उम्र में ही साक्षी पहलवानी सीखने के लिए अखाड़े में जाने लगी थीं. साक्षी मलिक ने 17 साल की उम्र में एशियन जूनियर चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया. फिर साल 2009 में एशियन जूनियर चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर साक्षी ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किया. इसके बाद साल 2010 में विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भी साक्षी ने कमाल दिखाते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. बाद में साक्षी ने 2012 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया था.
फिर रियो में रचा था इतिहास
रियो ओलंपिक 2016 में साक्षी ने पहले क्वालिफिकेशन राउंड में स्वीडन की पहलवान मलिन जोहान्ना मैटसन को 5-4 से हराया. फिर राउंड ऑफ 16 में उन्होंने तकनीकी अंकों के आधार पर मॉल्डोवा की मारियाना चेरदिवारा को शिकस्त दी. इसके बाद क्वार्टर फाइनल में साक्षी को रूस की वेलेरिया कोबलोवा ने एकतरफा मुकाबले में 9-2 से हरा दिया. बाद में कोबलोवा के फाइनल मुकाबले में पहुंचने के चलते साक्षी को रेपचेज खेलने का मौका मिला जहां वह ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही. साक्षी ओलंपिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला रेसलर हैं.