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Effects of Adult Content: आपके दिमाग से ऐसे खेलती हैं 'वो' वाली फिल्में, शरीर चुकाता है कीमत

'वो' वाली फिल्में... मतलब तो आप समझ ही गए होंगे. कभी सोचा है कि वो आपके दिमाग के साथ क्या करती हैं? क्या आपको पता है कि आपके क्षणिक आनंद की कीमत पूरा शरीर चुकाता है. वैसी फिल्में आपके दिमाग को बदल देती हैं. नुकसान पहुंचाती हैं. ज्यादा देखने से स्वस्थ मानसिकता प्रभावित होती है. जानिए इसका असर...

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दिमाग पर असर डालती है पोर्न देखने की लत (Photo: Getty)
दिमाग पर असर डालती है पोर्न देखने की लत (Photo: Getty)

सबसे पहला सवाल तो यही है कि 'वो' वाली फिल्में यानी एडल्ट कंटेंट हमारे दिमाग पर असर डालता है या नहीं? जवाब है, हां डालता है और ये अच्छा नहीं है. पोर्नोग्राफी देखने की तलब ठीक वैसी है, जैसे किसी ड्रग एडिक्ट को ड्रग्स को लेकर होती है. बार-बार एडल्ट कंटेंट देखने से, दिमाग का वह हिस्सा जो निर्णय लेने और इच्छाशक्ति के लिए जिम्मेदार होता है, वह असल में सिकुड़ने लगता है. आगे जानेंगे कि इस बारे में विज्ञान और क्या कहता है. 

हमारा मस्तिष्क एक जैविक कंप्यूटर (Biological computer) है, जिसमें अरबों न्यूरॉन्स सूचनाओं को प्रोसेस करते रहते हैं, ये आपके शरीर को नियंत्रित करते हैं. आपकी भावनाओं को आकार देते हैं. दिमाग के केमिकल्स एक साथ काम करते हैं. आपको खुशी, दर्द और इस तरह की कई भावनाओं का अनुभव कराते हैं. 

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पोर्न दिमाग में उन्हीं रसायनों को सक्रिय करता है जो सेक्स को आनंददायक बनाते हैं. (Photo: Getty)

सबसे पहले समझिए कि एडल्ट कंटेंट देखने से होता क्या है

यौन संबंध बनाते समय या एडल्ट कंटेंट देखते समय, दिमाग के उस हिस्से में डोपामाइन (Dopamine) रिलीज़ होता है, जो भावनाओं और सीखने (Learning) के लिए जिम्मेदार होता है. इससे व्यक्ति का फोकस शार्प होता है. तलब की भावना पैदा होती है. जैसे- 'मुझे बस यही चाहिए'.. इस तरह का आनंद मिलता है.  

दिमाग में Norepinephrine हॉर्मोन भी रिलीज़ होता है, जो सतर्कता और फोकस बढ़ाता है. यह मस्तिष्क को बताता है, 'कुछ होने वाला है और हमें इसके लिए तैयार रहना है.' यौन संबंध और एडल्ट कंटेंट से ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) और वैसोप्रेसिन (Vasopressin) भी रिलीज़ होता है. ये हार्मोन कोशिकाओं को पुरानी यादें रखने में मदद करते हैं. यह व्यक्ति की यादों को किसी ऐसी चीज से बांध देते हैं, जिसने उसे यौन सुख दिया हो.

शरीर से एंडोर्फिन (Endorphin) भी रिलीज़ होता है. इससे पूरे शरीर में नशे जैसा अनुभव होता है. एक बार संतुष्ट होने के बाद, सेरोटोनिन (Serotonin) का स्तर भी बदलता है, जिससे शांति और रिलैक्स होने की अनुभूति होती है. यह प्रक्रिया तब उसी तरह से काम करती है, जब यौन संबंध बनाया जा रहा होता है. Norepinephrine, एंडोर्फिन और सेरोटोनिन की वजह से साथी के साथ सुखद अनुभूति होती है. जबकि, ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन की वजह से साथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता है. समय के साथ, डोपामाइन की वजह से सेक्स की तलब एक दूसरे के लिए यौन इच्छा में बदल जाती है.

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दिमाग पोर्न से जुड़ता है, व्यक्ति से नहीं (Photo: Getty)

जब आप एडल्ट कंटेंट देखते हैं, तब भी बिल्कुल ऐसा ही होता है. आपके मस्तिष्क में उन्हीं सुखद रसायनों को सक्रिय करता है जो यौन संबंध को आनंददायक और सार्थक बनाते हैं. लेकिन एडल्ट कंटेंट असल में यौन संबंध बनाना नहीं है. यह सिस्टम को शॉर्ट-सर्किट करता है. इसके साइड इफेक्ट्स होते हैं. 

 तीन तरीकों से एडल्ट कंटेंट हमारे दिमाग को प्रभावित करता है

जब एडल्ट कंटेंट देखते हैं, तो दिमाग अलग तरह से काम करता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, मस्तिष्क में काम करने वाले केमिकल 3 तरह से प्रभाव डालते हैं-

1. एडल्ट कंटेंट की छवियां दिमाग पर छप जाती हैं

दिमाग इस तरह से डिजाइन्ड है कि ये महत्वपूर्ण स्थितियों और घटनाओं को याद रख सके. एडल्ट कंटेंट देखते समय भी दिमाग को ये सिग्नल मिलता है कि कुछ महत्वपूर्ण हुआ है. नतीजा ये होता है कि एडल्ट कंटेंट देखने के काफी समय बाद भी मस्तिष्क पर उसकी छवि बनी रहती है. बहुत से लोग जिन्होंने एडल्ट कंटेंट देखना छोड़ दिया है, उनके दिमाग में अब भी उस समय की छवियां अंकित हैं. ऐसा नॉरपेनेफ्रिन, ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन की वजह से होता है, जो मेमोरी बनाने पर काम करते हैं. इससे दिमाग में ऐसी छवियों की एक लाइब्रेरी बन सकती है जिसे आप मिटा नहीं सकते. वायर्ड फॉर इंटिमेसी के लेखक न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. विलियम स्ट्रूथर्स इसे न्यूरोलॉजिकल टैटू (Neurological tattoo) कहते हैं, जिसे न तो भुलाया जा सकता है और न मिटाया. 

2. दिमाग एडल्ट कंटेंट से जुड़ता है, व्यक्ति से नहीं

सेक्स करने से आप किसी व्यक्ति से जुड़ते हैं, जबकि एडल्ट कंटेंट के मामले में जुड़ाव किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि काल्पनिक अनुभव से होता है. दिमाग को यह पता होता है कि आपको कहां सबसे अच्छा यौन अनुभव हुआ था. हर बार जब आपको यौन इच्छा होती है, तो आपको पता होता है कि आपको क्या देखना है.

इसके अलावा, एडल्ट कंटेंट दिमाग को एक अप्राकृतिक उन्माद का अनुभव करता है. नतीजा ये होता है कि रोज़-रोज़ ऐसा करने से उत्साह खत्म हो जाता है. व्यक्ति पहले की तरह आनंद पाने के लिए पहले से भी बेहतर कुछ देखना चाहता है. दिमाग में इस तरह के असंतुलन से कई परेशानियां होती हैं. जैसे- अपने साथी के साथ निष्क्रिय रहना, बार-बार मास्टरबेट करना और कम संतुष्टि पाना, चिंता, थकान, और ज़्यादा एडल्ट कंटेंट की इच्छा करना.
 
3. इससे दिमाग सिकुड़ता है

हां, ये बात थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन एडल्ट कंटेंट देखने वालों का दिमाग वास्तव में, सामान्य से छोटा होता है. कैम्ब्रिज न्यूरोसाइकायट्रिस्ट वैलेरी वून (Valerie Voon) की रिसर्च के मुताबिक, इसके आदी लोगों का दिमाग शराबियों के दिमाग से काफी मिलता है. वेंट्रल स्ट्रिएटम (Ventral striatum) नाम का ब्रेन स्ट्रक्चर, मस्तिष्क को आनंद देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह मस्तिष्क का वही हिस्सा है जो तब तुरंत एक्टिव हो जाता है, जब कोई शराबी शराब की तस्वीर देखता है.

वहीं, डॉ विलियम स्ट्रूथर्स (Dr. William Struthers) का कहना है कि पोर्नोग्राफी देखकर मास्टरबेट करना असल में हमारे मस्तिष्क के सिंगुलेट कॉर्टेक्स (Cingulate cortex) को कमजोर करता है. यह वो हिस्सा है जो नैतिक और आचार संबंधी निर्णय लेने और इच्छाशक्ति के लिए जिम्मेदार होता है. इसके कमजोर होने से एडल्ट कंटेंट देखना व्यक्ति को ज़रूरी लगता है. ऐसा होने पर, व्यक्ति का व्यवहार खतरनाक हो सकता है. ऐसे में वह काम पर भी एडल्ट कंटेंट देखेगा, इल्लीगल एडल्ट कंटेंट की तरफ रुख करेगा या अन्य तरीकों से अपनी यौन इच्छा शांत करेगा.

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रासायनिक ही नहीं इसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी हैं (Photo: Getty)

मस्तिष्क पर एडल्ट कंटेंट के मनोवैज्ञानिक प्रभाव

रासायनिक स्तर पर एडल्ट कंटेंट के प्रभाव आपने समझ लिए, अब बात करते हैं एडल्ट कंटेंट के मनोवैज्ञानिक प्रभावों के बारे में. सेक्स एडिक्शन थेरेपिस्ट और पोर्न रिकवरी एक्सपर्ट डॉ. केविन स्किनर (Dr. Kevin Skinner) कहते हैं कि हमारी भावनाएं हमारे शरीर में मौजूद केमिकल्स से बहुत प्रभावित होती हैं. जब व्यक्ति एडल्ट कंटेंट देख रहा होता है, तो वह अपनी सामान्य भावनात्मक स्थिति को बदल रहा होता है. लेकिन जब इन केमिकल्स का असर कम होता है, तो वह ज्यादा उदास और भावनात्मक रूप से खुद को लो महसूस कर सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स ... 

इससे चिंता या डिप्रेशन बढ़ सकता है- रिसर्च से एडल्ट कंटेंट देखने और चिंता या डिप्रेशन के बीच संबंध का पता चलता है. कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि यह रिश्तों को प्रभावित कर सकता है, जिससे अवसाद या चिंता हो सकती है.
 
एडल्ट कंटेंट यौन विश्वासों को बदल सकता है- व्यक्ति एडल्ट कंटेंट में जो देखता है उसकी इच्छा करने लगती है. व्यक्ति यह भी सोच सकता है कि सेक्स में हिंसा अच्छी है. इससे महिलाओं को देखने का नज़रिया भी बदलता है. यह भी हो सकता है कि वह महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट के रूप में देखने लगे. शोध बताते हैं कि एडल्ट कंटेंट देखने से लोगों में महिलाओं को देखने का तरीका बदल सकता है. डॉ. डोल्फ ज़िलमैन और डॉ. जेनिंग्स ब्रायंट ने अपने शोध में पाया कि एडल्ट कंटेंट देखने वाले लोग हिंसक सेक्स और बलात्कार के प्रति असंवेदनशील थे. 

इससे हो सकता है मेमोरी लॉस- कुछ मामलों में, एडल्ट कंटेंट से मेमोरी लॉस हो सकता है. ये सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन एक शोध के मुताबिक, एडल्ट कंटेंट की लत किशोरों में मेमोरी लॉस ला सकती है. इसपर एक से ज्यादा शोध किए गए हैं और नतीजा करीब-करीब एक जैसे ही हैं.

 

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