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धरती पर मौजूद हैं मकड़ियों की 50 हजार प्रजातियां...गिनती अब भी जारी

घर की छत पर कोनों से लटकते जाल में झूलती मकड़ी को देख आप परेशान होते हैं. क्या आपको पता है कि धरती पर मकड़ियों की 50 हजार प्रजातियां हैं. पालतू से लेकर जहरीली. हाल ही में नई प्रजाति की खोज के साथ ही इनकी संख्या 50 हजार पहुंच गई. आइए जानते हैं मकड़ियों की दुनिया के बारे में...

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6 अप्रैल 2022 को वर्ल्ड स्पाइडर कैटालॉग ने की 50 हजारवीं प्रजाति की घोषणा. (फोटोः गेटी) 6 अप्रैल 2022 को वर्ल्ड स्पाइडर कैटालॉग ने की 50 हजारवीं प्रजाति की घोषणा. (फोटोः गेटी)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 275 सालों में खोजी गई ये प्रजातियां
  • वर्ल्ड स्पाइडर कैटालॉग में हिसाब
  • गुरियुरियस मिनुआनो है नई प्रजाति

मकड़ियां उन जीवों में से हैं, जिनकी हजारों प्रजातियां हैं. वर्ल्ड स्पाइडर कैटालॉग (World Spider Catalog - WSC) ने 6 अप्रैल 2022 को घोषणा की कि उन्हें मकड़ी की 50 हजारवीं प्रजाति मिल गई है. अब धरती पर मकड़ियों की 50 हजार प्रजातियां हो चुकी हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक जानते हैं. 

स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में मौजूद नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम से ही WSC काम करता है. उसने गुरियुरियस मिनुआनो (Guriurius Minuano) नाम की प्रजाति को मकड़ियों की प्रजातियों की सूची में 50 हजारवीं पोजिशन पर लिस्ट किया है. यह मकड़ी साल्टीसिडे (Salticide) फैमिली के जंपिंग स्पाइडर है. जो शिकार करने के लिए ब्राजील, उरुग्वे और ब्यूनस आयर्स के आसपास के जंगलों और झाड़ियों उछलकूद मचाती है. 

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इतनी और प्रजातियां अगले 100 सालों में खोज ली जाएंगी. (फोटोः गेटी)
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इतनी और प्रजातियां अगले 100 सालों में खोज ली जाएंगी. (फोटोः गेटी)

मकड़ियों की एक्सपर्ट किंबरले एस. मार्टा और उनके ब्राजीली साथियों ने इस मकड़ी को खोजा है. इसे इस इलाके में रहने वाले मिनुआनो लोगों के नाम पर नाम दिया गया है. मिनुआनो लोगों का समुदाय खत्म हो चुका है. किसी मकड़ी का पहला वैज्ञानिक विश्लेषण 1757 में किया गया था. इनकी 50 हजार प्रजातियों का पता चलने में 265 साल लग गए. इन्हें खोजने का काम अब बढ़ गया है. वैज्ञानिकों को लगता है कि अगले 100 साल में ही इतनी और मकड़ियों की प्रजाति खोज लेंगे. 

किंबरले मार्टा ने कहा कि हम आसानी से इतनी प्रजातियां और खोज सकते हैं. मकड़ियां धरती पर मौजूद महत्वपूर्ण शिकारियों में से एक हैं. धरती के इकोसिस्टम में इनका बड़ा योगदान है. ये हर साल 40 से 80 करोड़ टन कीड़ों को खाती हैं. अगर ये न हों तो कीड़ों की आबादी से नियंत्रण करने वाली एक जरूरी कड़ी टूट जाएगी. यानी ये इंसानों के लिए फायदेमंद हैं. 

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