डायबिटीज हर साल हजारों-लाखों लोगों को हो जाता है. हाल ही में हुई एक नई स्टडी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रकृति की गोद में डायबिटीज का इलाज छिपा है. कम से कम 400 औषधीय पौधे हैं, जो डायबिटीज को रोक सकते हैं. ठीक कर सकते हैं. यह रिपोर्ट वर्ल्ड जर्नल ऑफ डायबिटीज में प्रकाशित हुई है.
वैज्ञानिकों ने कहा कि अब तक सिर्फ 21 औषधीय पौधों पर ही काम किया गया है. जबकि, इन पौधों पर ढेर सारे रिसर्च की जरुरत है. सभी पौधों पर रिसर्च किया जाना चाहिए. इससे मधुमेह की रोकथाम के मौजूदा प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है.
पुड्डूचेरी के जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (JIPMR) और पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने मिलकर यह स्टडी की है. प्रकृति में करीब 400 ऐसे औषधीय पादप मौजूद हैं, जो खून में शुगर की मात्रा को कम करते हैं. इन पौधों से डायबिटीज टाइप 2 को कंट्रोल कर सकते हैं. इन 400 में से अभी तक 21 औषधीय पादपों के बारे में ही प्रभावी अध्ययन हुए हैं. जबकि 8 औषधीय पौधो को लेकर आंशिक आंकड़े मौजूद हैं.
स्टडी में यह भी बताया कि विजयसार, जामुन, जीरा, दारुहरिद्रा, एलोवेरा, बेल, मेथी, अदरक, नीम, आमला सहित 21 पादप में मौजूद एक्टिव केमिकल शुगर को कम करते हैं. इनमें से कई पौधों से मधुमेह रोधी दवाएं बनी हैं, जिनका डायबिटीज के इलाज में काफी असर मिला है. इन्हीं में से एक दवा बीजीआर-34 को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने गहन अध्ययन के बाद तैयार किया है.
बीजीआर-34 में एक नहीं बल्कि चार औषधीय पादपों में दारुहरिद्रा, गुड़मार, मेथी और विजयसार से मिले फाइटो कंपाउंड हैं. इनके अलावा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इसमें गिलोय और मजीठ भी मिलाया गया है. हाल ही में, AIIMS दिल्ली में हुई स्टडी में इस दवा को डायबिटीज के लिए कारगर पाया था. साथ ही इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर बनाता है.
स्टडी में बताया गया है कि डायबिटीज की दवा में मेटफोर्मिन केमिकल होता है. जिसका बड़ा सोर्स गलेला ऑफिसिनैलिस पौधा है. 19वीं सदी में यूरोप में इसी पौधे का इस्तेमाल डायबिटीज के लिए होता था. इसी तरह सेब के पेड़ की छाल से फ्लोरिजिन से भी डायबिटीज के लिए SGLT-2 का निर्माण होता था. एलोपैथिक दवाओं की भांति हर्बल औषधि के मामले में भी सक्रिय तत्व की जानकारी होना जरूरी होता है.
डॉ. संचित शर्मा कहते हैं कि प्रकृति में अनेकों तरह की गुणकारी औषधियां मौजूद हैं. इसकी जानकारी चिकित्सा और आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में भी उपलब्ध है. चूंकि भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या काफी अधिक है. ऐसे में मॉडर्न रिसर्च के तहत अन्य औषधियों पर शोध, चिकित्सा क्षेत्र को एक नई उपलब्धि दे सकते हैं.