scorecardresearch
 
साइंस न्यूज़

भविष्य यही है...अंतरिक्ष का 'पेट्रोल पंप' सैटेलाइट्स में भर देगा ईंधन, प्रोटोटाइप सफल

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 1/9

कुछ समय के बाद अंतरिक्ष में धरती की कक्षाओं में घूम रहे और स्थापित सैटेलाइट्स को ईंधन खत्म होने की वजह से निष्क्रिय नहीं होना होगा. न ही उन यानों को दिक्कत आएगी तो चांद या मंगल की यात्रा पर जाएंगे. क्योंकि उन्हें अंतरिक्ष में ही ईंधन भरने की सुविधा मिलेगी. इस साल जून में सैन फ्रांसिस्को स्थित एक स्टार्टअप कंपनी ने धरती की कक्षा में प्रोटोटाइप रीफ्यूलिंग स्टेशन लॉन्च किया था, जो सफलतापूर्वक काम कर रहा है. (फोटोः ऑर्बिट फैब)

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 2/9

इस स्टार्टअप कंपनी का नाम है ऑर्बिट फैब (Orbit Fab). कंपनी के रीफ्यूलिंग स्टेशन का नाम है तेनजिंग टैंकर-001 (Tenzing Tanker-001). हाल ही में कंपनी को 10 मिलियन डॉलर्स यानी 73.67 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली है. इस रीफ्यूलिंग स्टेशन का सबसे बड़ा फायदा उन देशों की सैटेलाइट्स को होगा जिनके ईंधन खत्म हो चुके हैं. उनमें ईंधन भरकर दोबारा से सक्रिय किया जा सकता है. (फोटोः ऑर्बिट फैब)

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 3/9

पुराने सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में ही रीफ्यूल करने से नए सैटेलाइट भेजने का खर्च बचेगा. साथ ही अंतरिक्ष में धरती की कक्षाओं में कचरा जमा होना बंद होगा. तीसरा सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि अंतरिक्ष का कचरा नहीं बढ़ने से सैटेलाइट्स के आपस में टकराकर धरती की ओर आने का खतरा कम होगा. भविष्य में चांद और मंगल पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को अपने यान में ईंधन डालने के लिए इस रीफ्यूलिंग स्टेशन से मदद मिलेगी. (फोटोः ऑर्बिट फैब)

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 4/9

ऑर्बिट फैब (Orbit Fab) ने प्रोटोटाइप तेनजिंग टैंकर-001 (Tenzing Tanker-001) को स्पेसएक्स (SpaceX) ट्रांसपोर्टर-2 के साथ लॉन्च किया गया था. उस समय की लॉन्चिंग सफल थी. कंपनी का मकसद था इस रीफ्यूलिंग स्टेशन के जरिए कुछ खास तरह के जांच किए जा सकें. ताकि यह पता चल सके कि इसके जरिए क्या सैटेलाइट्स को दोबारा रीफ्यूल किया जा सकता है या नहीं. (फोटोः ऑर्बिट फैब)

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 5/9

तेनजिंग टैंकर-001 (Tenzing Tanker-001) एक माइक्रोवेव के आकार का है. यह सूरज की कक्षा में धरती के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. सैटेलाइट्स में ईंधन भरने के साथ ही यह धरती की तस्वीरें भी लेगा और मौसम संबंधी जानकारियां भी देगा. इसका मुख्य उद्देशय अर्थ ऑब्जरवेशन और मौसम संबंधी जानकारी देने वाले सैटेलाइट्स में ईंधन भरना है. (फोटोः ऑर्बिट फैब)

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 6/9

ऑर्बिट फैब (Orbit Fab) के सीईओ डैनियल फेबर ने बताया कि हम दुनिया का पहला ऑपरेशनल सैटेलाइट फ्यूल डिपो बना है. यह ठीक वैसा ही होगा जैसे हम पेट्रोल डलाने के लिए पेट्रोल पंप पर जाते हैं. ठीक वैसे ही जिस सैटेलाइट को जरूरत होगी, उस सैटेलाइट तक यह फ्यूल स्टेशन खुद जाएगा और उसमें ईंधन भरेगा. इसके लिए सैटेलाइट को ऑपरेट करने वाले देश या निजी कंपनी को कुछ रकम देनी होगी. (फोटोः ऑर्बिट फैब)

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 7/9

डैनियल ने बताया कि अभी ईंधन खत्म होने पर सैटेलाइट्स बेकार हो जाते हैं. उनकी जगह नए सैटेलाइट्स भेजने पड़ते हैं. ये काफी महंगा पड़ता है. इससे कम पैसे में पुराने सैटेलाइट्स में ईंधन डाला जा सकेगा. फिलहाल हमारा प्रोटोटाइप रीफ्यूलिंग स्टेशन सफल रहा है. अब हम इससे बड़ा सैटेलाइट्स रीफ्यूलिंग स्टेशन लॉन्च करेंगे, जो कई सैटेलाइट्स में ईंधन भरने की क्षमता रखेगा. हम किसी भी ऑर्बिट में जाकर किसी भी सैटेलाइट को रीफ्यूल कर सकेंगे. (फोटोः ऑर्बिट फैब)

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 8/9

तेनजिंग टैंकर-001 (Tenzing Tanker-001) रैपिडली अटैचेबल फ्लूड ट्रांसफर इंटरफेस (RAFTI) तकनीक पर काम करता है. यह दूसरे सैटेलाइट के ईंधन वाले हिस्से से जुड़कर उसमें ईंधन भर देगा. इसमें ऐसे सेंसर्स लगे हैं जो ये बताएंगे कि सामने वाले सैटेलाइट में ईंधन पूरा भरा या नहीं. जैसे ही पूरा ईंधन भर जाएगा. यह उस सैटेलाइट से अलग होकर अन्य सैटेलाइट में ईंधन भरने निकल पड़ेगा. (फोटोः ऑर्बिट फैब)
 

Refueling Station Tenzing Tanker
  • 9/9

डैनियल ने बताया कि अभी तक हमने ईंधन भरने वाला परीक्षण नहीं किया है, लेकिन बहुत जल्द ही हम यह करने में सफल होंगे. नॉर्थरोप ग्रूमैन (Northrop Grumman) कंपनी हमारे इस आइडिया से बेहद उत्साहित है. उसने हमें 10 मिलियन डॉलर्स की फंडिंग की है. साथ ही वह अपने सैटेलाइट में ईंधन भरने के परीक्षण की अनुमति भी दे रहा है. और भी कई कंपनियां हमसे संपर्क कर रही है, ताकि उनके सैटेलाइट्स में ईंधन भरा जा सके. (फोटोः ऑर्बिट फैब)