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साइंस न्यूज़

Russia Ukraine War Scientific Impact: क्या रूस के हमले से रुक जाएंगे दुनिया के बड़े वैज्ञानिक प्रयोग?

Russia Ukraine War Scientific Impact
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यूक्रेन (Ukraine) पर रूस (Russia) का हमला हुआ. करीब 10 लाख लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर भागे. हजारों लोग मारे जा चुके हैं. बर्बादी ही बर्बादी दिख रही है. कई उद्योग और संस्थानों पर इसका बुरा असर पड़ा है. जिसमें से कई गैर-राजनीतिक हैं. जिनका युद्ध से नहीं, राजनीति से नहीं बल्कि सीधे तौर पर इंसानियत, धरती और ब्रह्मांड से लेना-देना है. लेकिन अब इन वैज्ञानिक संस्थानों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं. (फोटोः एपी)

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साइंटिफिक रिसर्च के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते होने में दशकों लग जाते हैं. मकसद होता है सिर्फ तकनीकी और वैज्ञानिक विकास का. ज्ञान को एक जगह से दूसरी जगह तक बांटने का. एक संयुक्त प्रयास करके दुनिया और इंसान का जीवन बेहतर बनाने का. लेकिन यूक्रेन पर हमले के बाद अब सवाल ये उठने लगा है कि क्या रूस दुनियाभर के वैज्ञानिक शोधकार्यों से खुद को बाहर कर लेगा? क्या उसकी इस हरकत से साइंटिफिक रिसर्च को नुकसान होगा. आइए जानते हैं उन बड़े शोधकार्यों के बारे में जहां पर रूस किसी न किसी तरह से जुड़ा जरूर है. (फोटोः गेटी)

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ITER: दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु एक्सपेरिमेंट

ITER दुनिया का सबसे बड़ा एटॉमिक फ्यूजन एक्सपेरिमेंट है. इसमें रूस (Russia), अमेरिका और चीन समेत दुनिया के 35 देश शामिल हैं. इन देशों के वैज्ञानिक मिलकर सूरज में होने वाले फ्यूजन रिएक्शन को धरती पर कर रहे हैं. ताकि भविष्य में साफ-सुथरी असीमित ऊर्जा मिल सके. यूक्रेन पर हमला करने के बाद फिलहाल अभी तक रूस ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ नहीं खींचे हैं. ITER के प्रवक्ता लाबन कोब्लेंट्ज ने कहा कि मेरी जानकारी में अभी तक ऐसी कोई सूचना नहीं है कि रूस ने इस प्रोजेक्ट से खुद को बाहर किया हो. ITER प्रोजेक्ट की शुरुआत कोल्ड वॉर के बाद की गई थी. मकसद था बेहतरीन ऊर्जा के स्रोत का जन्म करना, ताकि पूरी इंसानियत को फायदा हो. 

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ITER के इतिहास में भी उसके सदस्यों के बीच राजनीतिक मतभेद रहे हैं. व्यापारिक, सीमाई विवाद और अन्य पहलुओं के बाद भी इस प्रोजेक्ट पर अभी तक कोई असर नहीं पड़ा. लाबन कोब्लेंट्ज ने कहा कि इतने वर्षों में अभी तक किसी भी तरह के राजतीनिक विवादों की वजह से इस प्रोजेक्ट पर कोई असर नहीं पड़ा है. वर्तमान समय अनुमानित नहीं था. लेकिन इसे लेकर कोई अंदाजा लगाना फिलहाल ठीक नहीं है. उम्मीद है कि सभी ITER सदस्य Russia Ukraine War की वजह से इस प्रोजेक्ट को प्रभावित होने नहीं देंगे. (फोटोः एएफपी)

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ESA: यूरोपियन स्पेस एजेंसी की रॉकेट लॉन्चिंग

यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) यूक्रेन पर रूस के हमला करने के बाद सबसे पहले विरोध करने वाली संस्थाओं में थी. उसने 28 फरवरी 2022 को ही रूस की इस हरकत पर ऐतराज जताया था. एजेंसी ने कहा था कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ना दुखद है. साथ ही उसने कहा था कि वो अपने साथियों की मदद करेगी. प्रोग्राम को यूरोपियन वैल्यू के अनुसार चलाएगी. ESA ने साथी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन किया था. ESA ने बताया कि ExoMars मिशन में अब देरी हो सकती है. क्योंकि इसे वह रूस के साथ मिलकर कर रहा था. अब साल 2022 में होने वाली इसकी लॉन्चिंग आगे बढ़ सकती है. ExoMars मिशन के जरिए मंगल ग्रह पर प्राचीन और नए जीवन की खोज की जानी है. इससे पहले रूस ने ESA के लिए रॉकेट लॉन्चिंग बंद कर दी थी. (फोटोः एएफपी)

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ISC: द इंटरनेशनल साइंस काउंसिल 

द इंटरनेशनल साइंस काउंसिल (ISC) एक गैर-सरकारी संस्था है. जो दुनियाभर की साइंटिफिक बॉडीज को जोड़ने का काम करती है. ताकि विज्ञान को बढ़ाया जा सके. ISC ने रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने का विरोध किया. अपने बयान में संस्था ने कहा कि हमें यूक्रेन पर किए गए मिलिट्री कार्यवाही से अत्यंत दुख और निराशा है. इस आक्रामक रवैये की वजह से उन समस्याओं के समाधान खोजने में देरी होगी, जो विज्ञान जल्दी खोज सकता था. हालांकि, संस्थान ने अपने संबंधों को रूस के साथ खत्म नहीं किया है. उसका कहना है कि साइंटिफिक कम्यूनिटी को अलग-थलग करना पूरे समाज और धरती के लिए नुकसानदेह हो सकता है. इसलिए रूस के साथ आर्कटिक और स्पेस रिसर्च चलते रहेंगे. (फोटोः ISC) 

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CERN: हिग्स-बोसोन की खोज करने वाली लैब

यूरोप की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है CERN. यह दुनिया का सबसे बड़ा एटम स्मैशर है. जिसे लार्ज हैड्रन कोलाइडर (Large Hadron Collider) कहते हैं. यहां पर भी रूस के वैज्ञानिक शामिल हैं. हालांकि अभी तक इस संस्था ने रूस के हमले को लेकर किसी तरह का बयान जारी नहीं किया है. फिलहाल इस प्रयोगशाला में सभी भागीदार देशों के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. किसी को वापस नहीं बुलाया गया है. न ही कोई काम छोड़कर गया है. (फोटोः गेटी)

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ISS: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रिसर्च

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station- ISS) कई देशों के बीच वैज्ञानिक समझौते का सबसे बड़ा उदाहरण है. इसे चलाने में NASA, ROSCOSMOS, Japan Aerospace Exploration Agency, ESA और Canadian Space Agency शामिल हैं. स्पेस स्टेशन को बनाने का काम 1998 में शुरु हुआ था. सब सही चल रहा था लेकिन यूक्रेन पर हमले की वजह से यहां काम प्रभावित हो रहा है. रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने अपने ट्विटर हैंडल पर 3 मार्च को लिखा था कि उसने स्पेस स्टेशन पर जर्मनी के साथ सभी संयुक्त वैज्ञानिक प्रयोग रद्द कर दिए हैं. इसके पहले उसने कहा था कि क्या स्पेस स्टेशन को भारत और चीन पर गिरने दिया जाए? इस माहौल को देख कर लगता है कि स्पेस स्टेशन को साल 2031 से पहले ही बंद कर दिया जाएगा. (फोटोः गेटी)

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इस समय स्पेस स्टेशन पर सात एस्ट्रोनॉट्स हैं. जिनमें रूस के एंटोन शखापलेरोव और पितोर दुबरोव शामिल हैं. इनके अलावा अमेरिका की कायला बैरोन, मार्क टी. वांडे, राजा चारी, थॉमस मार्शबम और जर्मनी के मैथियास मॉरेर भी हैं. 28 फरवरी को स्पेस ऑपरेशंस मिशन डायरेक्टोरेट की एसोसिएस एडमिनिस्ट्रेटर और NASA की ह्यूमन फ्लाइट की प्रमुख अधिकारी कैथी ल्यूडर्स ने कहा कि हम वर्तमान वैश्विक स्थितियों को समझते हैं. लेकिन एक संयुक्त टीम की तरह ये सातों स्पेस स्टेशन पर काम कर रहे हैं. (फोटोः गेटी)