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साइंस न्यूज़

Indian Army Regiments: भारतीय सेना की 9 रेजिमेंट्स... जिनकी बहादुरी, दक्षता और हौसले से खौफ खाते हैं दुश्मन

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भारतीय सेना (Indian Army) के प्रमुख हिस्से हैं- आर्मर्ड, आर्टिलरी, इन्फैन्ट्री, मैकेनाइज्ड, कॉर्प्स ऑफ आर्मी एयर डिफेंस, कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स, आर्मी एविएशन कॉर्प्स और कॉर्प्स ऑफ सिग्नल. इनमें से कोई टैंक्स का रेजिमेंट है, तो किसी के पास मिसाइलों की ताकत है. किसी रेजिमेंट के नाम से ही दुश्मन खौफ खाते हैं, तो किसी रेजिमेंट के लड़ाकों से मौत भी हार मान जाती है. ये सभी रेजिमेंट भारतीय सेना की बहादुरी, दक्षता और विजय हासिल करने के हौसले के उदाहरण हैं. (फोटोः India Today Archive)

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आर्मर्ड रेजिमेंट (Armoured Regiment). इस रेजिमेंट में सबसे पहले आता है प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (President's Bodyguards). इसके अंदर ही हॉर्स, लैंसर्स, कैवलरी रेजिमेंट्स भी हैं. इनमें वो रेजिमेंट्स भी हैं, जिनमें जवान घोड़ों पर सवारी करते हैं. भारतीय सेना के पास कुल मिलाकर 68 आर्मर्ड रेजिमेंट्स हैं. जो छोट-छोटे हिस्सों में पूरे देश में तैनात हैं. इनके सबसे खतरनाक हथियार होते हैं टैंक्स यानी तोप और बख्तरबंद सैन्य वाहन. (फोटोः गेटी)

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आर्टिलरी रेजिमेंट (Artillery Regiment) को दो हिस्सों में बांटा गया है. पहला वो हिस्सा जो अपने घातक हथियारों के लिए प्रसिद्ध है. इसमें ही मिसाइल, रॉकेट्स, फील्ड गन्स, मीडियम गन्स और मोर्टार होते हैं. दूसरा वो हिस्सा जिसमें सपोर्ट यंत्र होते हैं, जैसे - UAV's, ड्रोन्स, सर्विलांस राडार, वेपनल लोकेटिंग राडार आदि. इसी रेजिमेंट के हिस्सों ने कारगिल युद्ध के समय दुश्मन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था. इसके बोफोर्स तोप ने दुश्मन को भागने पर मजबूर कर दिया था. Pinaka मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर्स भी इसी रेजिमेंट का हिस्सा है. ये रेजिमेंट असल में इतने ज्यादा छोटे हिस्सों में बांटा गया है, जो दिखने में बटालियन की तरह दिखते हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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इन्फैन्ट्री रेजिमेंट (Infantry Regiment) के कुल मिलाकर 27 इन्फैन्ट्री रेजिमेंट्स हैं. ये वो पैदल सैनिकों का बड़ा समूह है, जो किसी भी स्थिति, मौसम, इलाके में दुश्मन को बूट तले रौंद डालता है. इसमें हैं पैरा, पंजाब, मद्रास, ग्रैनेडियर्स, मराठा लाइट, राजपुताना राइफल्स, राजूपत, जाट रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट, सिख लाइट रेजिमेंट, डोगरा रेजिमेंट, गढ़वाल राफल्स, कुमाऊं (नागा सहित), असम, बिहार, महार, जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स (लद्दाख स्काउट्स सहित), जम्मू एंड कश्मीर लाइट और ग्रेनेडियर्स (1, 3, 4, 5, 8 और 11). (फोटोः India Today Archive)

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मैकेनाइज्ड (Mechanised Regiment) में दो हिस्से हैं. पहला ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स और दूसरा मैकेनाइज्ड इन्फैन्ट्री रेजिमेंट. ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स का केंद्र महाराष्ट्र के कांपटी में है. ये 62, 65, 71 के युद्ध और ऑपरेशन ब्लू स्टार समेत कई मिशनों में भाग ले चुके हैं. इनके पास BMP-2 यानी सारथ टैंक जैसे हथियार हैं. इसका केंद्र में महाराष्ट्र के अहमदनगर में है. इसके पास BMP-1, BMP-2, BTR-60, BTR-70 आर्मर्ड पर्सनल करियर और टाटा केस्ट्रेल है. (प्रतीकात्मक फोटोः विकिपीडिया)

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कॉर्प्स ऑफ आर्मी एयर डिफेंस (Corps of Army Air Defence) भारतीय सेना का वो हिस्सा है, जो भारतीय आसमान की सुरक्षा दुश्मन से करता है. इसके देश भर में करीब 56 छोटे रेजिमेंट्स हैं. जो अलग-अलग तरह की मिसाइलों, रॉकेट लॉन्चर्स और एयर डिफेंस हथियारों से लैस है. हवा से अगर दुश्मन हमला करता है तो उसे मार गिराने के लिए कब और कौन सी मिसाइल या एंटी-एयरक्राफ्ट गन का उपयोग करना है, वो यही रेजिमेंट तय करती है. (फोटोः India Today Archive)

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कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स (Corps of Engineers) रेजिमेंट के तीन हिस्से हैं. मद्रास सैपर्स (Madras Sappers), बंगाल सैपर्स (Bengal Sappers) और बॉम्बे सैपर्स (Bombay Sappers). ये तीनों रेजिमेंट युद्ध के समय बाकी रेजिमेंट को इंजीनियरिंग संबंधित सपोर्ट देती हैं. जरूरत पड़ने पर युद्ध भी करती हैं. इनके जवानों को भी कई बड़े बहादुरी पुरस्कार भी मिल चुके हैं. (फोटोः India Today Archive)

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आर्मी एविएशन कॉर्प्स (Army Aviation Corps) वो रेजिमेंट हैं जिसके पास अलग-अलग 24 स्क्वाड्रन्स हैं, जो देश की सीमाओं की निगरानी आसमान से करते हैं. इनके पास रीकॉनसेंस और ऑब्जरवेशन फ्लाइट्स होती हैं. इसके अलावा इनके पास यूटिलिटी हेलिकॉप्टर फ्लाइट्स और एडवांस्ड लाइट हेलिकॉरप्टर वीपन सिस्टम इंटीग्रेटेड विमानों की रेंज हैं. ये घुसपैठ, बचाव कार्य, निगरानी और जासूसी के कार्यों में दक्षता रखते हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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कॉर्प्स ऑफ सिग्नल (Corps of Signals) यह भारतीय सेना का वो हिस्सा है, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ मिलकर काम करता है. यह संयुक्त इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम बना चुका है. इनके जवानों की ट्रेनिंग मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में होती है. यहां के जवान राडार सिग्नल समझने, रेडियो तरंगों को समझते हैं. इलेक्ट्रॉनिक संदेशों को समझकर दुश्मन की पोजिशन आदी के बारे में हमलावर टुकड़ी को सूचना देती है. इनका मुख्य काम युद्ध के दौरान सैनिकों को मुख्यालय से जोड़कर रखना होता है. (फोटोः विकिपीडिया)