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साइंस न्यूज़

Russia: सफेद बर्फ में नीले रंग की चमकती रोशनी देख वैज्ञानिक हैरान

Glowing Snow in Russian Arctic
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आपने सफेद बर्फ देखी होगी. लेकिन हाल ही में रूस के आर्कटिक इलाके में मिखाइल नेरेटिन अपने दो कुत्तों के साथ सैर पर निकले. थोड़ा दूर जाने के बाद उन्हें सफेद बर्फ के अंदर से नीले रंग की रोशनी निकलती दिखाई पड़ी. मिखाइल के पिता मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट हैं. उन्होंने भी यह हैरतअंगेज नजारा देखा. क्योंकि यह इलाका रूस के सुदूर व्हाइट सी के तट के पास है. इसके बाद उन्होंने रूसी बायोलॉजिस्ट को बुलाया. (फोटोः एलेक्जेंडर सेमेनोव)

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रूसी बायोलॉजिस्ट वेरा एमिलिएनेंको ने इस चमकते हुए बर्फ की जांच करने की योजना बनाई. जैसे ही उन्होंने बर्फ को तोड़ना शुरु किया ताकि सैंपल निकाल सके. उसके नीचे की नीली रोशनी ज्यादा तेज होने लगी. जैसे-जैसे बर्फ ऊपर से टूट रही थी, नीली रोशनी और ज्यादा चमकदार होती जा रही थी. तब वेरा इस नजारे को कैद करने के लिए फोटोग्राफर एलेक्जेंडर सेमेनोव को बुलाया. उन्होंने इस पूरी घटना की तस्वीरें और वीडियो बनाए. (फोटोः एलेक्जेंडर सेमेनोव)

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ये चमकती हुई नीली रोशनी काफी बड़े इलाके में फैली थी. जैसे-जैसे वेरा, मिखाइल और एलेक्जेंडर कुत्तों के साथ इस बर्फ पर चल रहे थे, उसकी चमक बढ़ती जा रही थी. एलेक्जेंडर सेमेनोव ने अपने फेसबुक ये तस्वीरें डाली. इनसे संबंधित हैरान करने वाली कहानी भी लिखी. जिसे सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा पसंद किया जा रहा है. लेकिन उधर वेरा एमिलिएनेंको के मन में सवाल उफान मार रहे थे कि आखिर बर्फ के नीचे कोई Alien जीव तो नहीं. (फोटोः एलेक्जेंडर सेमेनोव)

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वेरा ने बर्फ का सैंपल निकला. उसे पिघलाया. फिर माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर जब जांच की तो पता चला कि ये समुद्री जीव है. जो बेहद छोटे होते हैं. असल में ये एक तरह के क्रस्टेशियंस (Crustaceans) हैं जो बायोल्यूमिनिसेंट होते हैं. यानी खुद से रोशनी छोड़ते हैं, जैसे जुगनू. बर्फ के नीचे नीली चमक छोड़ने वाले इस जीव का नाम है कोपेपॉड्स (Copepods). किसी समय में इन्हें लोग समुद्र का जंगली शैतान बुलाते थे. क्योंकि इसकी चमक से वो डरते थे. इसके बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी. (फोटोः गेटी)
 

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वेरा ने कोपेपॉड्स की जांच करने के लिए जब उन्हें सुई चुभोई तो वो तेजी से चमकने लगे. इनके अंदर से नीले रंग की रोशनी निकलने लगी. इस जीव के चमकने के पीछे कोई नई बात नहीं है. यह सामान्य प्रक्रिया है. यह आमतौर पर कई बार समुद्री किनारों पर चमकते हुए दिख जाते हैं. जिनकी वजह से समुद्र से आने वाली जब तटों से टकराती है तो एक नीली रोशनी फैलती है. (फोटोः गेटी)

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नेशनल जियोग्राफिक ने पहली बार मिखाइल नेरेटिन और वेरा एमिलिएनेंको की इस खोज का दस्तावेजीकरण किया है. जिसके बाद अब दुनियाभर के साइंटिस्ट इनकी स्टडी करने आर्कटिक जाने की अनुमत मांग रहे हैं. कोपेपॉड्स (Copepods) जिस केमिकल की वजह से चमकते हैं उसे कोलेनटेराजीन (Coelenterazine) कहते हैं. इस तरह की चमक पैदा करके वो शिकारियों से बचने का प्रयास करते हैं.  (फोटोः गेटी)

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हालांकि, हर बार कोपेपॉड्स (Copepods) की यह रक्षा प्रणाली हमेशा काम नहीं आती. क्योंकि इनकी चमक की वजह से कई शिकारी आकर इनका शिकार कर लेते हैं. इससे समुद्री जीवों के फूड चेन का सिस्टम नहीं बिगड़ता. बर्फ में इन जीवों का मिलना हैरानी की बात है, क्योंकि ये जीव आमतौर पर समुद्र की गहराइयों में मिलते हैं. (फोटोः गेटी)

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अब मिखाइल, वेरा और एलेक्जेंडर वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि आखिर ये बर्फ में कैसे फंसे. वह भी इतनी बुरे मौसम वाले माहौल में. जल्द ही ये लोग मिलकर एक स्टडी रिपोर्ट किसी साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित कराने वाले हैं. (फोटोः गेटी)