हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से शुरु होकर 7 अक्टूबर तक चलेगी. इस बार पूरे नौ दिन मां की उपासना की जाएगी. वहीं 8 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजय दशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा. इसके अलावा 8 अक्टूबर को ही दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा. नवरात्र शुरू होने से पहले ही कुछ विशेष सामग्री घर ले आएं. आइए जानते हैं नवरात्र के दौरान आपको किन-किन चीजों की जरूरत पड़ेगी.
देवी पूजन की विशेष सामग्री
- माता की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना के लिए चौकी
- मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति
- चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा
- मां पर चढ़ाने के लिए लाल चुनरी या साड़ी
- नौ दिन पाठ के लिए 'दुर्गासप्तशती' किताब
- कलश
- ताजा आम के पत्ते धुले हुए
- फूल माला या फूल
- एक जटा वाला नारियल
- पान
- सुपारी
- इलायची
- लौंग
- कपूर
- रोली, सिंदूर
- मौली (कलावा)
- चावल
अखंड ज्योति जलाने के लिए
- पीतल या मिट्टी का साफ दीपक.
- घी.
- लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती.
- दीपक पर लगाने के लिए रोली या सिंदूर.
- घी में डालने और दीपक के नीचे रखने के लिए चावल.
नौ दिन के लिए हवन सामग्री
- हवन कुंड
- आम की लकड़ी
- हवन कुंड पर लगाने के लिए रोली या सिंदूर
- काले तिल
- चावल
- जौ (जवा)
- धूप
- चीनी
- पांच मेवा.
- घी
- लोबान
- गुग्ल
- लौंग का जौड़ा
- कमल गट्टा
- सुपारी
- कपूर
- हवन में चढ़ाने के लिए प्रसाद की मिठाई और नवमी को हलवा-पूरी
- आचमन के लिए शुद्ध जल
कलश स्थापना के लिए
- एक कलश.
- कलश और नारियल में बांधने के लिए मौली (कलावा).
- 5, 7 या 11 आम के पत्ते धुले हुए.
- कलश पर स्वास्तिक बनाने के लिए रोली.
- कलश में भरने के लिए शुद्ध जल और गंगा जल.
- जल में डालने के लिए केसर और जायफल.
- जल में डालने के लिए सिक्का.
- कलश के नीचे रखने चावल या गेहूं.
जवारे बोने के लिए
- मिट्टी का बर्तन.
- साफ मिट्टी (बगीचे की या गड्डा खोदकर मिट्टी लाएं).
- जवारे बोने के लिए जौ या गेहूं.
- मिट्टी पर छिड़कने के लिए साफ जल.
- मिट्टी के बर्तन पर बांधने के लिए मौली (कलावा).
माता के श्रंगार के लिए
- लाल चुनरी
- चूड़ी
- बिछिया
- इत्र
- सिंदूर
- महावर
- बिंद्दी
- मेहंदी
- काजल
- चोटी
- गले के लिए माला या मंगल सूत्र
- पायल
- नेलपॉलिश
- लिपस्टिक (लाली)
- चोटी में लगाने वाला रिबन
- कान की बाली.
देवी पूजन में इन बातों का रखें ध्यान
- तुलसी पत्ती न चढ़ाएं.
- माता की तस्वीर या मूर्ति में शेर दहाड़ता हुआ नहीं होना चाहिए.
- देवी पर दूर्वा नहीं चढ़ाएं.
- जवारे बोए हैं और अखंड ज्योति जलाई है तो घर खाली न छोड़ें.
- मूर्ति या तस्वीर के बाएं तरफ दीपक रखें.
- मूर्ति या तस्वीर के दायें तरफ जवारे बोएं.
- आसन पर बैठकर ही पूजा करें.
- जूट या ऊन का आसन होना चाहिए.