Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में भोजन करने के तरीके, दिशा और स्थान को लेकर बहुत सारे नियम बताए गए हैं. मान्यता है कि ठीक तरीके से बैठकर भोजन करने से न केवल सेहत ही नहीं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी वास होता है. चाहे आप जमीन पर बैठकर खाते हों या डाइनिंग टेबल पर, वास्तु के अनुसार दोनों के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण नियम इस प्रकार हैं.
जमीन पर बैठकर भोजन करने के वास्तु नियम
वास्तु और आयुर्वेद दोनों में ही जमीन पर सुखासन यानी पालथी मारकर बैठकर भोजन करने को सर्वोत्तम माना गया है. इससे पृथ्वी तत्व से सीधा जुड़ाव होता है और पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है.
आसन का प्रयोग
जमीन पर सीधे बैठने के बजाय हमेशा सूती, ऊनी या कुशा के आसन (मैट) पर बैठकर भोजन करें. नंगे फर्श पर बैठकर खाना खाने से शरीर की ऊर्जा जमीन में चली जाती है.
सही दिशा का चुनाव
जमीन पर बैठते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
थाली की स्थिति
भोजन की थाली को सीधे जमीन पर रखने के बजाय किसी छोटी चौकी पर रखें. थाली का स्थान आपके बैठने के स्थान से थोड़ा ऊंचा होना चाहिए.
डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना
आज के आधुनिक दौर में डाइनिंग टेबल का चलन काफी ज्यादा बढ़ गया है. यदि आप डाइनिंग टेबल का उपयोग करते हैं, तो इन वास्तु नियमों का पालन करें.
टेबल का आकार
वास्तु के अनुसार, डाइनिंग टेबल का आकार चौकोर या आयतकार होना चाहिए. गोल डाइनिंग टेबल से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है.
स्थान और दिशा
डाइनिंग रूम या टेबल घर के पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना सबसे अच्छा माना जाता है. भोजन करते समय परिवार के मुखिया का मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए.
शीशे का प्रयोग
यदि संभव हो तो डाइनिंग टेबल के सामने या पास में एक दर्पण (आईना) लगाएं, जिसमें भोजन की थाली दिखाई दे. माना जाता है कि इससे घर में अन्न और धन की प्रचुरता बढ़ती है.
खाली न रखें
डाइनिंग टेबल को कभी भी पूरी तरह खाली या बिखरा हुआ न छोड़ें. उस पर हमेशा ताजे फल, पानी का जग या कुछ खाने की चीजें व्यवस्थित करके रखें.
भोजन की सही दिशाएं
1. पूर्व दिशा (East Facing)- पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा होती है, जिसे सकारात्मक ऊर्जा और जीवन शक्ति का स्रोत माना गया है. इस दिशा में मुख करके खाने से भोजन आसानी से पचता है, शरीर को पूरी ऊर्जा मिलती है और उम्र बढ़ती है. यह दिशा घर के बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और बच्चों के लिए अमृत समान है. अगर घर में कोई बीमार है, तो उन्हें हमेशा पूर्व की ओर मुंह करके ही भोजन कराएं.
2. उत्तर दिशा (North Facing)- उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर और ज्ञान की दिशा माना जाता है. इस दिशा में मुख करके भोजन करने से मस्तिष्क सक्रिय रहता है. करियर व धन से जुड़े नए विचार आते हैं. इस दिशा में विद्यार्थियों, युवाओं और नौकरीपेशा लोगों को बैठकर खाना चाहिए. इससे एकाग्रता और करियर में ग्रोथ मिलती है.
3. पश्चिम दिशा (West Facing)- पश्चिम दिशा को लाभ और वरुण देव (जल के देवता) की दिशा माना जाता है. इस दिशा में बैठकर खाने से व्यक्ति की व्यवहारिक समझ बढ़ती है और जीवन में सुख-साधन आते हैं. जो लोग व्यापार करते हैं या बिजनेसमैन हैं, उनके लिए पश्चिम दिशा में मुख करके भोजन करना बहुत अनुकूल माना जाता है.
4. दक्षिण दिशा (South Facing)- दक्षिण दिशा को यम (मृत्यु के देवता) और पितरों की दिशा माना जाता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, इस दिशा में मुख करके भोजन करने से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, पाचन तंत्र कमजोर होता है और व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान रह सकता है.