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अगरबत्ती है खतरनाक, तो क्या इस्तेमाल करें?

हाल ही में एक रिसर्च के बाद यह जानकारी सामने आई कि ज्यादातर पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली सुगंधित अगरबत्ती और धूपबत्ती सेहत के लिहाज से खतरनाक होती है. रिसर्च के नतीजे आने के बाद लोग दुविधा में हैं कि आख‍िर अब वे पूजा-पाठ के वक्त अगरबत्ती की जगह क्या इस्तेमाल करें?

रिसर्च से ही सामने आ सकेगा अंतिम सच रिसर्च से ही सामने आ सकेगा अंतिम सच

हाल ही में एक रिसर्च के बाद यह जानकारी सामने आई कि ज्यादातर पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली सुगंधित अगरबत्ती और धूपबत्ती सेहत के लिहाज से खतरनाक होती है. रिसर्च के नतीजे आने के बाद लोग दुविधा में हैं कि आख‍िर अब वे पूजा-पाठ के वक्त अगरबत्ती की जगह क्या इस्तेमाल करें?

दरअसल, शोध में बताया गया है कि अगरबत्ती-धूपबत्ती से निकलने वाला धुआं शरीर की कोशिकाओं पर बुरा असर डालता है और यह सिगरेट के धुएं से भी ज्यादा जहरीला साबित होता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि इसके धुएं से कोशिकाओं के DNA में बदलाव होता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

वैसे भारत में अगरबत्ती बनाने वाली टॉप कंपनियों का दावा है कि रिसर्च चीन की अगरबत्तियों के बारे में सही हो सकता है, पर भारत की अगरबत्तियों के बारे में नहीं. इनका दावा है कि भारत की अगरबत्ति‍यों की सप्लाई कई देशों में होती है, जहां इन्हें कड़े टेस्ट से गुजरना पड़ता है.

हकीकत चाहे जो भी, लेकिन इस बारे में सचेत होने की जरूरत तो है ही. धुआं हर हाल में फेफड़े के लिए खतरनाक ही होता है, यह चाहे सिगरेट से निकले या अगरबत्ती से. ऐसे में इसके विकल्प की तलाश जरूरी है.

भारत में प्राचीन काल से ही प्राकृतिक तौर पर उपलब्ध सुगंधित लकड़‍ियों का इस्तेमाल होता रहा है. ऐसी लकड़‍ियों में चंदन, अगर, तगर आदि प्रमुख हैं. ये महंगी जरूर होती हैं, पर केमिकल से रहित होने की वजह से सेहत के लिए हानिकारक नहीं हैं. आसपास आसानी से उपलब्ध या घर के गमलों में लगाए जा सकने वाले फूलों को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करके अगरबत्ती-धूपबत्ती पर निर्भरता कम की जा सकती है.

वैसे अंतिम सत्य चाहे जो भी हो, पर नुकसान से पहले ही सचेत हो जाने में ही ज्यादा समझदारी है.

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