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आसन पर बैठकर क्यों की जाती है पूजा?

अक्सर लोग आसन या इस तरह की कोई चीज बिछाकर उस पर बैठकर ही पूजा-पाठ करते हैं. यह केवल आराम का मामला नहीं है, बल्कि पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण है.

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अक्सर लोग आसन या इस तरह की कोई चीज बिछाकर उस पर बैठकर ही पूजा-पाठ करते हैं. यह केवल आराम का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण है.

आसन पर बैठकर पूजा करने से पूरा फल तो मिलता ही है, साथ ही सीधे जमीन पर बैठकर पूजा करने से होने वाले दुष्प्रभावों से भी बचा जा सकता है. पवित्रता के साथ-साथ इसमें वैज्ञानिक कारण भी जुड़ा हुआ है.

दरअसल, ब्रह्मांड में अनंत ऊर्जा और शक्त‍ियां मौजूद होती हैं. हमारी पृथ्वी ब्रह्मांड का ही अंग है. पृथ्वी में भी विद्युत और चुंबकीय तरंगे प्रवाहित होती रहती हैं. जब कोई पूजा-पाठ करता है या बोलकर प्रार्थना-भजन करता है, तो इससे ऊर्जा पैदा होती है. आसन बिछाए बिना पूजा करने से शरीर का संपर्क सीधे धरती से हो जाता है और पैदा हुई सकारात्मक ऊर्जा सीधे पृथ्वी में समाहित हो जाती है.

इसके विपरीत, आसन शरीर व धरती के बीच का सीधा संपर्क तोड़ देता है और पूजा से पैदा हुई सकारात्मक ऊर्जा पृथ्वी में जाने से बच जाती है. इससे पूजा का पूरा फल मिलता है.

इस बात को एक और उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है. तेज बारिश के दौरान बादलों के टकराने के बाद आकाश से गिरने वाली बिजली की पूरी ऊर्जा धातु की किसी छड़ के जरिए बड़ी आसानी से पृथ्वी के अंदर चली जाती है. इससे पता चलता है कि पृथ्वी ऊर्जा को किस तरह अपने भीतर समाहित कर लेती है.

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