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करें विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के दर्शन

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 30 किमी दूर एक ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर जो भोजपुर के बेतवा नदी के तट पर स्थित है जहां स्थापित है भोलेनाथ का विशाल शिवलिंग. जिसे भक्त भोजेश्वर शिवलिंग के नाम से भी जानते हैं. शिव भक्तों के लिए इस शिवलिंग का महत्व किसी ज्योतिर्लिंग से कम नहीं है.

कोटिलिंगेश्वर धाम कोटिलिंगेश्वर धाम

भोजपुर में है एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 30 किमी दूर एक ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर जो भोजपुर के बेतवा नदी के तट पर स्थित है जहां स्थापित है भोलेनाथ का विशाल शिवलिंग. जिसे भक्त भोजेश्वर शिवलिंग के नाम से भी जानते हैं. शिव भक्तों के लिए इस शिवलिंग का महत्व किसी ज्योतिर्लिंग से कम नहीं है.

शिव के प्रिय सावन मास की छटाओं से सजा और एक छोटी सी पहाड़ी की चोटी पर बना ये मंदिर भारतीय वास्तुकला की अनुपम कृति है जिसका निर्माण एक हजार दस ईसा से एक हजार तीरपन ईसा के मध्य परमार राजा भोज ने कराया था. इसलिए इस मंदिर का नाम भोजपुर मंदिर पड़ा जिसे भोजेश्वर मंदिर भी कहा जाता है. ये मंदिर कभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया. मगर ये भी भोलेनाथ की महिमा ही है कि इस मंदिर में आने वाले किसी भी भक्त की कोई भी मनोकामना कभी भी अधूरी नहीं रहती.

प्राचीन काल में भोजपुर को उत्तर भारत का सोमनाथ कहा जाता था और ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहीं व्यतित किया था. कहते हैं कि माता कुंती भगवान भोलेनाथ की पूजा के बगैर जल तक ग्रहण नहीं करती थीं इसलिए अपने अज्ञातवास के दौरान भीम ने अपने भाइयों की सहायता से साढ़े 21 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग स्थापित किया था.

सावन के महीने और शिव के विशेष दिनों में भोजेश्वर मंदिर में भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ता है. इन दिनों में मंदिर में पांच बार आरती का विधान होता है साथ ही मान्यता है कि जो भी कुंवारी कन्याएं 5 सोमवार का व्रत कर यहां भोले भंडारी का आशीर्वाद लेती हैं उन्हें जल्द ही मनचाहे वर की प्राप्ति होती है.

कोटिलिंगेश्वर धाम जहां है विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग

कर्नाटक के कोलार जिले के एक छोटे से गांव काम्मासांदरा में बसा है कोटिलिंगेश्वर धाम. इस मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों की नजरें एक टक केवल मंदिर के आकार को ही निहारती हैं क्योंकि यहां बसा है महादेव का वो रूप जो शायद दुनिया भर में अपनी तरह का इकलौता मंदिर है. यहां मंदिर का आकार ही शिवलिंग के रूप में है जो दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग है. शिवलिंग रूप में इस मंदिर की ऊंचाई 108 फीट है जिसके दर्शन कर श्रद्धालु पूरी तरह से शिवमय हो जाते हैं और इसकी गवाही देते हैं मंदिर के चारों ओर मौजूद करीब 1 करोड़ शिवलिंग.

इस मंदिर में भक्त अपने मन में सच्ची श्रद्धा लिए आते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार 1 फीट से लेकर 3 फीट तक का शिवलिंग अपने नाम से यहां स्थापित करवाते हैं. ये महादेव की महिमा ही है कि अब इन शिवलिंगों की संख्या करीब 1 करोड़ तक पहुंच चुकी है.

इस विशाल शिव-लिंग के सामने भव्य और विशाल रूप दर्शन देते हैं नंदी. जिसकी ऊंचाई 35 फीट है और वह एक 60 फीट लंबे, 40 फुट चौड़े और 4 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थित है. इस विशाल शिवलिंग के चारों ओर देवी मां, श्री गणेश, श्री कुमारस्वामी और नंदी महाराज की प्रतिमाएं ऐसे स्थापित हैं जैसे वे अपने आराध्य को अपनी पूजा अर्पण कर रहे हों. मंदिर का यही अद्भुत रूप और हर मन्नत पूरी होने की मान्यता ही दूर-दूर से हजारों भक्तों को यहां खींच लाती है.

मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही कोटिलिंगेश्वर की प्रतिमा में भक्तों को साक्षात् महादेव के दर्शनों की अनुभूति होती है और कोटिलिंगेश्वर रूप में भोले अपने भक्तों के कष्टों के हरने के लिए आतुर दिखाई देते हैं. पूरे मंदिर परिसर में कोटिलिंगेश्वर के मुख्य मंदिर के अलावा 11 मंदिर और भी हैं. जिनमे ब्रह्माजी, विष्णुजी अन्न्पूर्नेश्वरी देवी, वेंकटरमानी स्वामी, पांडुरंगा स्वामी, पंचमुख गणपति, राम-लक्ष्मण-सीता के मंदिर मुख्य रूप से विराजमान हैं.

मान्यता है की मंदिर परिसर में मौजूद दो वृक्षों पर पीले धागे को बांधने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है. विशेषकर शादी-ब्याह में आने वाली अड़चने दूर हो जाती हैं. मंदिर की तरफ से भी निर्धन-गरीब परिवारों की कन्याओं का विवाह नाममात्र का शुल्क ले कर करवाया जाता है. सारी व्यवस्था मंदिर की तरफ से की जाती है वहीं दूर-दूर से आने वाले भक्तों के रहने-खाने का भी यहां उचित इंतजाम किया जाता है. महाशिवरात्रि पर तो इस मंदिर की छटा देखते ही बनती है. अपने आराध्य देव को अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण कर पुण्य का लाभ कमाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या दो लाख तक पहुँच जाती है.

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