हिन्दू पंचांग के अनुसार, वर्ष का ग्यारहवां महीना माघ शुरू हो रहा है. माघ के बारे में एक छंद भी है...ज्योति धाम सविता प्रबल, तुमरे तेज़ प्रताप. छार-छार है जल बहै, जनम-जनम गम पाप॥ याने के इस महीने में संगम तट या किसी धर्मस्थल में पर स्नान दान और पूजापाठ से जन्मों के पाप मिटते जाते हैं. ज्योतिषाचार्य कमल नंदलाल विस्तार से बता रहे हैं माघ महीने की महिमा.
माघ महीने का महत्व-
* पद्म पुराण के अनुसार माघ महीने में संगम तट पर कल्पवास का विशेष महत्त्व है.* प्रयागराज में संगम पर ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, रुद्र, आदित्य गमन करते हैं.
* पुराणों में माघ मास के स्नान को नारायण की सिद्धि का सुगम मार्ग बताया है.
* महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार माघ में प्रयागराज में तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का समागम होता है.
* माघ में तिल, गुड़ व ऊनी वस्त्र दान देने से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है व विवादों में जीत हासिल होती है.
* विष्णु धर्मसूत्र शास्त्र ने माघ महीने में बहते जल में सुर्यौदय से पहले स्नान करना श्रेष्ठ कहा है.
* माघ मास में भगवान विष्णु के मधुसूदन स्वरूप का शास्त्र आदेश देते हैं.
* मधुसूदन भगवान कृष्ण का ही एक नाम है जिनहोने मधु नाम के रक्षण का वध किया था.
* माघ के महीने में भगवान मधुसूदन को मगद के लड्डू का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दिया जाता है.
* माघ के महीने में भगवान श्रीकृष्ण की काले तिलों से पूजा करने से शनि ग्रह के कुप्रभावों से छुटकारा मिलता है.
* माघ के महीने में माता सरस्वती की काले तिलों से पूजा करने से राहु के दोषों से मुक्ति मिलती है
* माघ के महीने में काले तिलों से पितृ तर्पण करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है.
महाउपाय-
भगवान श्रीकृष्ण का पंचोपचार पूजा करें - ॐ श्रीनाथाय नमः मंत्र का जाप करें - भूत भविष्य वर्तमान सुधारने के लिए इस महाउपाय से पाएं छुटकारा.
महाउपाय: भगवान श्रीकृष्ण पर 8 मुट्ठी काले तिल चढ़ाकर जल प्रवाह करें.